लकवा में थ्रम्बोलाइसिस उपचार के लिए कार्यशाला

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू स्थित ट्रॉमा सेन्टर में 10 जून को मस्तिष्क आघात स्ट्रोक के मरीजों के थ्रम्बोलाइसिस उपचार में ध्यान रखने वाली बातों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गयी। इस कार्यशाला में पैरामेडिकल स्टाफ और चिकित्सा से जुड़े अन्य स्टाफ के लोगों को बताया गया कि इमरजेंसी में स्ट्रोक का मरीज आने पर उसे दिये जाने वाले वाले उपचार में किस तरह का ध्यान रखना है और किस प्रकार के कदम उठाने की जरूरत है।

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में आयोजित हुई कार्यशाला

यह जानकारी इमरजेंसी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष व ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ हैदर अब्बास ने देते हुए बताया कि चूंकि ट्रॉमा सेंटर में तैनात चिकित्सा स्टाफ एवं पैरामेडिकल स्टाफ सर्वप्रथम इमरजेंसी में आने वाले मरीज के सम्पर्क में आता है, ऐसे में ऐसे मरीजों की पहचान कर उन्हें गोल्डेन आवर्स में इलाज मिलने में इन स्टाफ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

…ताकि तुरंत हो जाये सीटी स्कैन

उन्होंने बताया कि कार्यशाला में जानकारी दी गयी कि हम लोगों ने स्ट्रोक्स अटैक वाले मरीजों के सीटी स्कैन के लिए नारंगी यानी ऑरेंज कलर का फॉर्म डिजाइन किया है ताकि स्टाफ को अन्य परचों के साथ ये फॉर्म अलग से ही दिख जाये और इनका सीटी स्कैन तुरंत हो सके। डॉ हैदर ने बताया कि स्टाफ को लकवा के लक्षण पहचानने का भी प्रशिक्षण दिया गया तथा इन लक्षणों के बारे में अन्य लोगों को जागरूक करने का भी आह्वान किया गया।  डॉ हैदर ने कहा कि आघात या मस्तिष्क आघातों की स्थिति में समय बहुत मूल्यवान है और यह कहा जा सकता है कि समय ही मस्तिष्क है। कार्यशाला में डॉ हैदर अब्बास और न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ मनन मेहता ने स्टाफ को प्रशिक्षित किया।
ज्ञात हो केजीएमयू ने बीती 30 मई को लकवा यानी स्ट्रोक्स के मरीजों को साढ़े चार घंटे के गोल्डेन आवर्स के अंदर ट्रॉमा सेन्टर में थ्रम्बोलाइसिस उपचार करने के लिए एक हेल्पलाइन नम्बर नम्बर 8887147300 जारी किया था। लक्षणों को देखकर मरीज को स्ट्रोक होने की पुष्टि होते ही इस हेल्पलाइन नम्बर पर अगर सूचना दे दी जायेगी तो केजीएमयू के ट्रॉमा सेन्टर में सारी तैयारियां पहले से ही कर ली जायेंगी ताकि गोल्डेन आवर्स के अंदर मरीज के पहुंचते ही उसे उपचार देना शुरू किया जा सके। थ्रम्बोलाइसिस उपचार की विशेषता यह है कि इस उपचार में लगाया जाने वाला इंजेक्शन आरटीपीए (रिकॉम्बिनेन्ट टिश्यू प्लाजमिनोजेनेन एक्टीवेटर) के गोल्डेन आवर्स में मिल जाने की स्थिति मेंं लकवा का इलाज किया जाना संभव है और इससे विकलांगता जैसे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

लकवा के लक्षण

किसी भी व्यक्ति को लकवा हुआ है अथवा नहीं यह जानने के लिए आवश्यक है कि लोगों में इन लक्षणों की जानकारी हो। लकवा के लक्षण हैं अचानक एक हाथ या एक पैर में अचानक कमजोरी आना, अचानक बोलने में दिक्कत होना या बोली का अस्पष्ट होना, अचानक धुंधला दिखना या एक आंंख से न दिखना, अचानक मूच्र्छित हो जाना, अचानक लडखड़़ाना या ठीक से न चल पाना।