Tuesday , July 27 2021

भारतीय संस्‍कारों से दूर होती युवा पीढ़ी पाश्‍चात्‍य देशों का अंधानुकरण कर रही

-सेवा भारती के विक्रमादित्‍य सेवा केंद्र के उद्घाटन मौके पर राज्‍यपाल ने जतायी चिंता
-सेवा केंद्र के उद्घाटन के साथ ही सेवा व्रतियों को सम्‍मानित किया आनंदी बेन ने  

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि बहुत से दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति व संस्कार से दूर होकर पाश्चात्य देशों के अंधानुकरण में लगी है। आधुनिकता की पैरवी वहां तक ही ठीक, जिससे अपने देश की संस्कृति व सेवा का भाव नष्ट न हो।

राज्यपाल आज यहां केजीएमयू के अटल बिहारी साइंटिफि‍क कन्‍वेन्‍शन सेंटर में आयोजित सेवा भारती, अवध प्रांत के तत्‍वावधान में आरएएलसी, केजीएमयू में सम्राट विक्रमादित्‍य सेवा केंद्र के उद्घाटन व सेवा व्रति‍यों के सम्‍मान समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में सम्‍बोधित कर रही थीं। उन्‍होंने कहा कि पंडित दीनदयाल का यह कथन आज भी प्रासंगिक है कि हम विदेशों में से जो भी ग्रहण करें, उसे अपने देश के व समाज के अनुकूल बना लें।

राज्यपाल ने सेवा भारती संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि सेवा व संस्कार के क्षेत्र में सेवा भारती ने उच्च मानक स्थापित किए हैं। सेवा भारती ने संस्कारक्षम, मानवीय मूल्यों की चिंता करने वाले, धर्म का आदर करने वाले, परोपकारी, अनुशासित, राष्ट्रप्रेमी व चरित्रवान समाज के निर्माण का कार्य किया है, इसी से देश मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास’ जैसे संकल्प से सामंजस्य और सौहार्द्र होगा, जो देश के लिए आज बहुत जरूरी है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर पर आर एस एस के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सेवा प्रमुख नवल किशोर ने कहा कि पूरे देश में 5 हज़ार से अधिक सेवा केंद्र में सक्रिय सेवा भारती के माध्यम से संघ ‘नर सेवा नारायण सेवा’ के कार्य में संलग्न है । उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों और राष्ट्र भक्तों की राष्ट्र-आराधना की कड़ी में 1925 में डॉक्टर हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी, उसी के व्यापक स्वरूप में सेवा भारती एक उपकरण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पता चला कि तब 2 करोड़ 80 लाख लोग कूड़ा बीनते हैं । छह करोड़ 70 लाख लोग भीख मांगते हैं। यह देश की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जबकि तब देश में सारे 37 लाख एनजीओ थे।  84 हजार करोड़ का वार्षिक बजट सेवा कार्यो के लिए तब भारत सरकार इन एनजीओ को देती थी। कॉरपोरेट सेक्टर से अलग 24 हज़ार करोड़ इन्हें मिलते थे। एफसीआरए में विदेश से भी करोड़ों का चंदा इन एनजीओ को आता रहा। फिर भी, मलिन बस्तियां और लोग गरीब व वंचित बने रहे।

नवल ने कहा कि व्यक्तित्व में श्रेष्ठता है लेकिन निष्क्रियता भी है, तो वह पूज्य कभी न होंगे। उन्होंने कहा कि संघ के सेवा कार्यो ने देश में 1लाख 70 हज़ार सेवा कार्य किए हैं, जो प्रचार से इतर सार्थक योगदान करने में सेवा व्रतियों के सहयोग से चल रहे हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और महापौर संयुक्ता भाटिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेवा बस्तियों में इस सेवा भारती से जुड़ाव रखते हुए जो-जो कार्य हुए हैं, वह धरातल पर हुए हैं। सेवा कार्य में “मैं नहीं, तू ही” का संकल्प लेकर कार्य करने की पद्धति से संघ ने चरित्र निर्माण का कार्य भी किया है।  नर ही नारायण है की इस भावना से कार्य करने की पवित्रता सेवा भारती में दिखता आयी है, जो अन्य के लिए अनुकरणीय है।

सेवा भारती के इस कार्यक्रम में नववर्ष चेतना समिति के संचालन में केजीएमयू के रिहैबिलिटेशन एंड आर्टिफिशियल लिंब सेंटर परिसर में रोगियों की सेवा व सहायता के लिए सम्राट विक्रमादित्य सेवा केंद्र का लोकार्पण किया गया और चिकित्सकों और समाजसेवियों का सम्मान भी राज्यपाल ने किया।

डॉ गिरीश गुप्‍ता ने अपने सम्‍बोधन में कहा कि नववर्ष चेतना समिति का गठन 24 दिसम्‍बर 2009 को डॉ एससी राय के निवास स्‍थान पर हुआ था, इसका मुख्‍य उद्देश्‍य भारतीय नववर्ष को मनाना था, क्‍योंकि सामान्‍य तौर पर नव वर्ष 1 जनवरी को लोग मनाते हैं और अपना भारतीय नववर्ष भूलते जा रहे हैं, इसी चिंता से उन्‍होंने समिति गठन करने का निर्णय लिया। इस समिति में कलाकार, चिकित्‍सक, वकील, समाजसेवी, पत्रकार जैसी अनेक शख्सियत को उन्‍होंने समिति में जोड़ा, उन्‍होंने मुझे भी इस लायक समझा और मुझे जोड़ा।

डॉ गिरीश ने बताया कि तभी से हर वर्ष हम लोग चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन लखनऊ में जोरशोर से प्रमुख जगहों पर नववर्ष समारोह मनाते हैं। इसमें एक पत्रिका नवचैतन्‍य का प्रकाशन भी करते हैं, जिसमें पूरे भारत वर्ष के लोगों के लेख छपते हैं। इसके अलावा भारतीय तिथियों वाला एक कलैंडर पंचांग भी प्रकाशित कर रहे हैं, जिसे सभी ने बहुत पसंद किया। 22 सितम्‍बर 2016 को आजाद भारत में पहली बार सम्राट विक्रमादित्‍य पर एक डाक टिकट भी लखनऊ की धरती पर जारी किया गया था। उन्‍होंने बताया कि सेवा भारती से जुड़े ओमप्रकाश के मन में सेवा भारती के तत्‍वावधान में सेवा करने की इच्‍छा जागृत हुई और इसी का नतीजा है कि केजीएमयू में विक्रमादित्‍य सेवा केंद्र के उद्घाटन पर हम सब यहां उपस्थित हुए हैं।

राज्‍यपाल आनंदी बेन के साथ मंचस्थ लोगों में लखनऊ की महापौर संयुक्‍ता भाटिया तथा सेवा भारती से जुड़े हुए नवल किशोर, आरईएस के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र गंगवार, बलरामपुर चिकित्सालय के निदेशक डॉ राजीव लोचन, नववर्ष चेतना समिति की रेखा त्रिपाठी व डॉ गिरीश गुप्ता शामिल रहे। इस मौके पर सेवा भारती द्वारा 21 चिकित्‍सकों को सेवा भूषण सम्‍मान, 21 चिकित्‍सकों सहित 24 लोगों  को सेवा गौरव सम्‍मान, 19 लोगों को सामाजिक सेवा सम्‍मान तथा इं.शैलेन्‍द्र सिंह को युवा भारती सम्‍मान से नवाजा गया। मंच का संचालन डॉ अलका रानी, डॉ सृष्टि श्रीवास्‍तव, डॉ पूरन चंद्र तथा डॉ प्रांजलि दत्‍त ने किया। इस अवसर पर दिव्‍यांगों को उपहार भी भेंट किये गये।

समारोह में प्रमुख लोगों में संजय गांधी पीजीआई के डॉक्टर सुनील अग्रवाल, कार्यक्रम संयोजक ओमप्रकाश पांडेय, सेवा आयाम के तेजभान सिंह, हेमेंद्र तोमर, ललराम चौधरी, राघवेंद्र मिश्रा व देवेंद्र अस्थाना आदि उपस्थित रहे।

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