Saturday , October 16 2021

एमडी पाठ्यक्रमों में टीबी संबंधी थीसिस को देंगे बढ़ावा : डॉ. सूर्यकान्त

-टास्‍क फोर्स की दो दिवसीय वर्चुअल बैठक में चेयरमैन ने की घोषणा

-सीवियर एक्यूट रेस्परेटरी इलनेस, इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस और टीबी के सभी रोगियों की कोविड जांच आवश्‍यक

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए उत्‍तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में शोध करने पर अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। एमडी के पाठ्यक्रमों में टीबी से संबंधित थीसिस को बढ़ावा दिया जायेगा।

यह बात प्रदेश में क्षय रोग उन्मूलन के लिए कार्यरत स्टेट टास्क फ़ोर्स की 40वीं दो दिवसीय वर्चुअल बैठक में फोर्स के चेयरमैन डॉ सूर्यकांत ने अपने सम्‍बोधन में कही। दो दिवसीय बैठक का बुधवार को समापन हो गया । डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि इस दो दिवसीय बैठक में करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सम्बंधित जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ), मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि ने भी भाग लिया।

इस मौके पर डॉ. सूर्यकान्त ने सभी प्रतिनिधियों को भारत सरकार के उस द्विदिशात्मक दिशा-निर्देश के बारे में बताया जिसमें सभी सीवियर एक्यूट रेस्परेटरी इलनेस (सारी) व इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) और कोविड के रोगियों में टीबी की जांच अनिवार्य कर दी गयी है। इसके साथ ही टीबी के सभी रोगियों में कोविड की जांच अनिवार्य कर दी गयी है। डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में टीबी पर शोध को बढ़ावा देने के लिए दो लाख रुपये प्रति शोध विकल्प का अनुदान किया जाएगा। इस दो दिवसीय बैठक में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉ. यश (जिन्हें हाल ही में केजीएमयू की सर्वश्रेष्ठ थीसिस का अवार्ड दिया गया है) और रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज, बरेली की थीसिसों को 30,000 रुपये प्रति थीसिस अनुदान देने का निर्णय लिया गया है ।

​बैठक में राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि कोविड काल और लॉकडाउन के दौरान मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी बंद होने के कारण टीबी नोटिफिकेशन में जो शिथिलता आई थी उसे और गति प्रदान करने के लिए सम्बंधित मेडिकल कॉलेज के टीबी नोडल अधिकारी तथा जिला क्षय रोग अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के छह जिलों- लखनऊ, आगरा, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी तथा अलीगढ़ में टीबी के कल्चर एवं ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट की सुविधा है तथा प्रदेश सरकार द्वारा चार जनपदों- झाँसी, कानपुर, गोरखपुर और सैफई-इटावा में इस लैब को स्थापित करने की कार्यवाही चल रही है ।

बैठक में यह भी कहा गया कि टीबी देश एवं दुनिया की एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है और भारत में प्रतिदिन करीब 1000 लोगों की मृत्यु टीबी के कारण हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी दुनिया से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य वर्ष 2030 निर्धारित किया गया है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लक्ष्य को वर्ष 2025 तक प्राप्त करने का संकल्प लिया है । 

​बैठक में टीबी उन्मूलन की राष्ट्रीय टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन डॉ. दिगंबर बहेरा, नॉर्थ जोन के चेयरमैन डॉ. ए. के. भारद्वाज, उप्र टीबी शोध समिति के चेयरमैन डॉ. सुधीर चौधरी, वायस चेयर पर्सन डॉ. रिचा मिश्रा और उप्र स्टेट टीबी ट्रेनिंग एवं डिमांसट्रेशन सेंटर, आगरा के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र भटनागर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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