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केजीएमयू का न्यूरो सर्जरी विभाग एक बार फिर बना निराश्रित मरीज की जान और जहान का रखवाला

-आठ वर्ष पूर्व घर से लापता हुए युवक को बेहोशी और घायल अवस्था में भर्ती करा गया था एक राहगीर

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय न्यूरो सर्जरी विभाग एक बार फिर हालातों के थपेड़ों से निराश्रित हो चुके व्यक्ति की जान बचाने और उसे उसके जहान तक पहुंचाने का माध्यम बना है। 20 वर्षीय युवक मरीज आठ वर्ष पूर्व अपने घर से लापता हो गया था, किसी फिल्मी रील लाइफ की कहानी लगने वाली इस घटना के बारे में सुनकर सभी के मुंह से विभाग की प्रशंसा हो रही है।

मिली जानकारी के अनुसार एक डेस्टिट्यूट मरीज केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में 22 दिसंबर को बाराबंकी के एक राहगीर के द्वारा लाया गया था उसे वह मरीज घायल और बेहोश अवस्था में रेलवे ट्रैक के पास मिला था। सीटी स्कैन पर पता चला कि ब्रेन में ब्लीडिंग है। उसका तुरंत ऑपरेशन किया गया और आईसीयू में रखा गया। धीरे-धीरे वह होश में आने लगा और अपने और अपने परिवार के कुछ लोगों के नाम लेने लगा जैसे डिजिल सोरेन, दखिन सोरेन, कनई सोरेन इत्यादि। कुछ समय बाद उसने बताया कि वह चिकुलिया थाना में बर्डी कानपुर गांव का रहने वाला है। यह जगह झारखंड में पड़ती है।

बताया जाता है कि इसके बाद वहां की पुलिस के माध्यम से इसके गांव वालों को खोज कर उनसे संपर्क किया गया। घरवालों को जब युवक के बारे में जानकारी दी गयी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े, उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति उनका भाई है और लगभग 8 वर्ष पहले 12 वर्ष की अवस्था में घर से लापता हो गया था, तभी से परिवार वाले अपने इस बच्चे को खोज रहे थे पर उन्हें अभी तक मिला नहीं था। बच्चे की बुद्धि भी सामान्य से कम थी। उन लोगों के पास मरीज का आधार कार्ड भी था और उन लोगों को बुलवाया गया और आज 3 जनवरी को मरीज को उनके सुपुर्द कर दिया गया।

मरीज की सेवा कर उसे स्वस्थ बनाने में जहां न्यूरो सर्जरी के ट्रॉमा सेंटर के फर्स्ट फ्लोर के वार्ड की सिस्टर इंचार्ज रजनी सिंह और उनकी टीम ने बहुत मेहनत की वहीं मरीज के घर वालों को ढूंढने और उन्हें बुलाने में न्यूरो सर्जरी के टेक्नीशियन अतुल उपाध्याय ने बहुत प्रयत्न किया। ज्ञात हो इस तरह की सेवा करना विभाग के लिए नया नहीं है, अब तक न्यूरो सर्जरी विभाग द्वारा 200 से भी ज्यादा डेस्टिट्यूट मरीजों के घर ढूंढ़ कर उन्हें उनके घर तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की है।

इस केस के बारे में जानकारी पाने के बाद वाइस चांसलर प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने इस मामले में उस राहगीर को बहुत बधाई दी है जो मरीज को घायल अवस्था में लेकर आया, इसके साथ ही उन्होंने विभागाध्यक्ष प्रो बीके ओझा सहित पूरी न्यूरोसर्जरी टीम को मरीज का पूर्ण इलाज मुफ्त में पूरी तन्मयता से करने के लिए और बाद में उसके घर परिवार वालों को ढूंढ़ कर उन्हें बुलाने और मरीज को घर परिवार को सुपुर्द करने के लिए ढेरों आशीर्वाद और बधाइयां दी हैं।

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