-कोलकाता में आयोजित गोल्डेन जुबिली सेलीब्रेशन में डॉ गिरीश गुप्ता ने प्रस्तुत की फंगल इन्फेक्शन पर इन विट्रो स्टडी
-होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की XXIII All India Homoeopathic Congress & Homoeo Expo-2025 सम्पन्न


सेहत टाइम्स
लखनऊ। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का गोल्डेन जुबिली सेलीब्रेशन XXIII All India Homoeopathic Congress & Homoeo Expo-2025 कोलकाता में बीती 26 से 28 दिसम्बर तक आयोजित किया गया। सम्मेलन में स्पीकर के रूप में आमंत्रित लखनऊ के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ गिरीश गुप्ता ने होम्योपैथिक दवाओं पर लैब में कल्चर प्लेट पर की गयी अपनी इन विट्रो रिसर्च के बारे में व्याख्यान देते हुए बताया कि इस रिसर्च को करने का मुख्य उद्देश्य होम्योपैथी पर लगा साइकोथेरेपी, प्लेसबो का लेबल हटाना था, जिसमें सफलता मिली। उन्होंने स्लाइड के माध्यम से शोध की विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की वेस्ट बंगाल राज्य शाखा द्वारा बिश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर के भव्य ऑडीटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में लगभग चार हजार डेलीगेट्स और करीब 100 स्पीकर्स आये थे।
इस सम्मेलन के बारे में ’सेहत टाइम्स’ के साथ विशेष बातचीत में डॉ गुप्ता ने बताया कि फंगल गतिविधियों पर होम्योपैथिक दवाओं के असर के बारे में की गयी इन विट्रो स्टडी पर प्रस्तुत व्याख्यान का विषय एंटी कंडाइडल एक्टिविटी ऑफ होम्योपैथी ड्रग्स anti condidal activity of homeopathy drugs था। आपको बता दें कि सेमिनार में आये स्पीकर्स ने कई प्रकार के रोगों के उपचार पर शोध प्रस्तुत किये गये लेकिन इन विट्रो एक्सपेरिमेंट पर शोध अकेले डॉ गुप्ता का ही था। इस विशेष रिसर्च की आये हुए प्रतिभागियों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

डॉ गुप्ता ने बताया कि पहली बार 1981 में उन्होंने भारत सरकार के प्रतिष्ठित संस्थान सीएसआईआर की लखनऊ स्थित विंग नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) की लैब में निकोटियाना ग्लूटिनोसा Nicotiana glutinosa पौधे पर लगने वाले टोबेको मोसाइक वायरस tobacco mosaic virus पर स्टडी वहां के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की निगरानी में की थी।
डॉ गुप्ता ने 1995 में अपने निजी संस्थान गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च में माइक्रोलॉजी लैब स्थापित की तथा यहां वरिष्ठ वैज्ञानिकों की देखरेख में भी कई बार इस पर स्टडी की और होम्योपैथिक दवाओं में बायोलॉजिकल इफेक्ट होने के परिणाम हासिल किये। इस विषय पर डॉ. गिरीश के कई शोध पत्र मुख्य रूप से “इंडियन जर्नल ऑफ रिसर्च इन होम्योपैथी“ (Indian Journal of Research in Homoeopathy), “एडवांसमेंट्स इन होम्योपैथिक रिसर्च” (Advancements in Homeopathic Research) सहित अन्य जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। उनके शोध कार्यों का मुख्य संग्रह उनकी पुस्तक “एक्सपेरिमेंटल होम्योपैथी” (Experimental Homoeopathy) में संकलित है।

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