-विटामिन 12 की कमी से होने वाली परेशानियों पर विस्तार से जानकारी दी प्रो एके त्रिपाठी ने
-‘रक्त और उसके अवयव’-भाग 4

सेहत टाइम्स
रक्त (blood), अस्थि मज्जा (bone marrow), और लसीका प्रणाली (lymphatic system) से संबंधित बीमारियों के उपचार की विशिष्टता रखने वाले किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआई) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में महत्वपूर्ण पदों पर सेवारत रह चुके राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट प्रो ए.के.त्रिपाठी द्वारा स्वस्थ बने रहने के लिए जिन बातों का ध्यान रखना चाहिये, उनकी जानकारी कारण सहित आसान शब्दों में देने के लिए ‘सेहत टाइम्स’ द्वारा शृंखला चलायी जा रही है। यह जानकारी जहां प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के गुणों को बारीकी से समझाने में सहायक है, वहीं दूसरी ओर स्नातक स्तर की पढ़ाई करने वाले मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है, क्योंकि प्रो त्रिपाठी चिकित्सा के आचार्य यानी प्रोफेसर भी हैं, ऐसे में मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए किस प्रकार से जानकारी दी जाये, इसका उन्हें लम्बा अनुभव है। उनके पढ़ाये हुए विद्यार्थी आज देश-विदेश के नामी चिकित्सकों में शामिल हैं।
अभी तक भाग 1 में ‘हृदय और गुर्दा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है एनीमिया’, भाग 2 में ‘झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी की वजह हो सकती है खून में आयरन की कमी’ तथा भाग 3 में ‘सही तरीके’ और ‘सही समय’ से लेने पर ही लाभ देती हैं आयरन की गोलियां शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की जा चुकी हैं।
————————————————————————————–
भाग 1 – ‘हृदय और गुर्दा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है एनीमिया’
भाग 2 – ‘झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी की वजह हो सकती है खून में‘ आयरन की कमी
भाग 3- ‘सही तरीके’ और ‘सही समय’ से लेने पर ही लाभ देती हैं आयरन की गोलियां
———————————————————-
अब भाग 4 में विटामिन बी 12 की कमी से जो एनीमिया होता है, के बारे में अत्यन्त महत्वपूर्ण जानकारियां, जो प्रो त्रिपाठी ने दीं, यहां दी जा रही हैं। प्रस्तुत है ‘रक्त और उसके अवयव’-भाग 4
आधुनिक शैली की देन है विटामिन बी-12 की कमी
प्रो त्रिपाठी ने बताया कि विटामिन 12 की कमी से भूख कम लगना, जल्दी थकान, अवसाद (Depression), नींद कम आना, बात-बात में गुस्सा आना, कभी-कभी बहकी-बहकी बातें करना जैसे लक्षण होते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसा देखा गया है कि शुरुआत में यह समझा जाता है कि शायद इसकी वजह पढ़ाई-लिखाई का तनाव हो, लेकिन जब स्थिति में सुधार नहीं होता है, और खून की जांच करायी जाती है, तब इसका पता चलता है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति फोलिक एसिड की कमी से भी होती है। उन्होंने बताया कि जैसा कि मैं पूर्व में भी बता चुका हूूं कि विटामिन बी-12 के मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण कार्य हैं। यह लाल रक्त कोशिकाओं (आर.बी.सी.) के सामान्य रूप से बनने तथा परिपक्व होने के लिए आवश्यक है। इसके अलावा स्नायुतंत्र (nervous system) को स्वस्थ रखने के लिए भी जरूरी है। अतः विटामिन बी-12 की कमी होने से एनीमिया होने के साथ-साथ मरीजो में स्नायुतंत्र से सम्बन्धित लक्षण जैसे हाथों पैरों में जलन, घबराहट सुन्नपन, पैरों में कमजोरी व लड़खड़ाहट, दिमागी कमजोरी, मानसिक असन्तुलन भी पैदा हो सकते हैं।
प्रो त्रिपाठी ने बताया कि शरीर में सामान्य मात्रा में आर.बी.सी. का निर्माण करने के लिए तत्वों एवं खाद्य-पदार्थों के अलावा कुछ विटामिन्स की आवश्यकता होती है। इनमें मुख्य हैं विटामिन बी-12 (साइनोकोबालामीन) फोलिक एसिड तथा विटामिन बी-6 (पाइरीडाक्सिन)। उन्होंने बताया कि विटामिन बी-12 दूध, दही, मांस, मछली, अण्डे में पाया जाता है। उन्होंने बताया कि ध्यान रहे, यह विटामिन फलों शाक सब्जियों या अनाज में नहीं मिलता है। अतः जो लोग दूध, दही, अण्डा, मांस का सेवन नहीं करते उन्हें विटामिन बी-12 की कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि हालांकि विटामिन बी-12 सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक होता है क्योंकि यह यकृत (लिवर) में प्रचुर मात्रा में संचित रहता है, इसलिए इसकी कमी तभी होती है जब भोजन में इसकी कमी पूरी करने वाले आवश्यक खाद्य-पदार्थ काफी दिनों से न लिए जा रहे हों।
यदि आपके मन हैं इस विषय को लेकर कोई प्रश्न तो कृपया अपनी स्क्रीन पर बने व्हाट्सअप बटन पर क्लिक कर अपना प्रश्न भेजें, प्रश्न का उत्तर प्रो एके त्रिपाठी द्वारा दिया जायेगा
प्रो त्रिपाठी ने बताया कि कुछ लोगों में विटामिन बी-12, समुचित मात्रा में शोषित (absorb) न हो पाने की वजह से इसकी कमी हो जाती है। लम्बे समय तक पेट ख़राब (दस्त) रहने से या आंतों की बीमारी में इसका पाचन या शोषण नहीं हो पाता है। एक बात गौर करने की है कि विटामिन बी-12 के पाचन के लिए आमाशय में सामान्य रूप से अम्ल (एसिड) का रहना ज़रूरी है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति काफी दिन तक एसिड की दवाएं (जैसे ओमीप्राजोल, पेन्टाप्राजोल) प्रयोग करता है तो एसिड की मात्रा में कमी हो जाने की वजह से विटामिन बी-12 का पाचन नहीं हो पाता। इसके अतिरिक्त आजकल लोगों में पान-मसाला, तम्बाकू और शराब का सेवन करने का चलन बढ़ गया है। इन चीज़ों के सेवन से आमाशय एवं आंतों की अन्दरूनी सतह ख़राब हो जाती है जिसके फलस्वरूप व्यक्ति बी-12 की कमी का शिकार हो सकता है।
प्रो त्रिपाठी ने बताया कि यदि हीमोग्लोबिन ज्यादा ही कम हो जाता है तो उपचार के लिए इंजेक्शन देना श्रेयस्कर होता है। इससे हीमोग्लोबिन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। उन्होंने बताया कि इसके बाद यदि व्यक्ति अपनी आदत सुधार कर अपने खाने-पीने में सुधार करने के साथ ही पान-मसाला एवं शराब बन्द कर दे तो कुछ समय वह पूर्व की तरह पूर्ण स्वस्थ हो जाता है।
विटामिन बी-12 की कमी के मुख्य कारण
1. भोजन में दूध, दही, अण्डे, मांस का प्रयोग न होना।
2. पेट का लम्बे अरसे तक ख़राब रहना।
3. पान-मसाला, तम्बाकू एवं शराब का सेवन।
4. लम्बे समय से एसिड के खिलाफ दवाएं प्रयोग करना।

Sehat Times | सेहत टाइम्स Health news and updates | Sehat Times