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समूची मानवता की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए था गुरु तेग बहादुर का अमर बलिदान

-आशियाना गुरुद्वारे में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस कार्यक्रम में बोलेविधायक डॉ. राजेश्वर सिंह,

-कार्यक्रम में आरएसएस के अवध प्रांत प्रचारक कौशलजी भी रहे मौजूद

-गुरु नानक द्वार निर्माण, करतारपुर साहिब दर्शन यात्रा के बाद अब आशियाना बनेगा में ‘विरासत-ए-खालसा’ संग्रहालय

सेहत टाइम्स

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने रविवार को गुरु तेग बहादुर सिंह के 350वें शहीदी दिवस कार्यक्रम में सहभागिता की। आशियाना गुरुद्वारे में आयोजित शहीदी दिवस एवं नगर कीर्तन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत प्रचारक कौशलजी भी मौजूद रहे। इस अवसर पर विधायक ने नवम सिख गुरु को एक महान एवं निर्भीक योद्धा बताते हुए उनके अद्वितीय साहस, त्याग और मानवता-प्रधान आदर्शों को नमन किया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का अमर बलिदान किसी एक पंथ तक सीमित नहीं था, बल्कि समूची मानवता की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए था। उनका उदय ऐसे समय पर हुआ जब विचारों पर भी पहरा था, औरंगजेब ने धर्म – आस्था पर पहरा लगाया था। उन्होंने अपने शीश का बलिदान देकर इतिहास में अंतःकरण की स्वतंत्रता का वह अधिकार अंकित किया, जिसे आज भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सुनिश्चित करता है। यह बलिदान धर्म, न्याय और राष्ट्रबोध की सर्वोच्च मिसाल है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरोजनीनगर से ‘अमृतसर–करतारपुर साहिब दर्शन यात्रा’ का सफल संचालन कर 41 सिख श्रद्धालुओं को गुरु नानक देव की पावन भूमि के दर्शन कराए जा चुके हैं। साथ ही, विधायक निधि के माध्यम से आशियाना क्षेत्र में भव्य गुरु नानक द्वार का निर्माण कर सिख समाज की आस्था और विरासत के प्रति सम्मान को सशक्त रूप दिया गया है। डॉ. राजेश्वर सिंह ने भविष्यदृष्टि साझा करते हुए कहा कि सभी सिख गुरुओं के अमर बलिदान, त्याग, सेवा और मानवता-केंद्रित आदर्शों से भावी पीढ़ी प्रेरणा ले, इसी उद्देश्य से सरोजनीनगर में भव्य, ऐतिहासिक, अद्वितीय ‘विरासत-ए-खालसा’ की स्थापना के लिए वे संकल्पित हैं और इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेंगे। यह पहल सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और सद्भाव का सशक्त प्रतीक बनेगी।

इस अवसर पर पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया, निर्मल सिंह (अध्यक्ष, केन्द्रीय सिख सभा गुरुद्वारा आलमबाग), जसपाल सिंह वोरा (अध्यक्ष, आशियाना गुरुद्वारा), सुरेंद्र पाल सिंह बक्शी (उप्र गुरुद्वारा सिख मैनेजमेंट कमेटी), सरबजीत सिंह, रतपाल सिंह गोल्डी, मनजीत सिंह तलवार, प्रशांत भाटिया, टी.पी.एस. अनेजा, अनिल विरमानी, परविंदर सिंह, जे.एस. चड्ढा, सुनील कालरा, पार्षद कौशलेन्द्र द्विवेदी, कमलेश सिंह, विमल तिवारी आदि मौजूद रहे।

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