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सचिव वित्‍त विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगी केजीएमयू कर्मचारी परिषद

-बढ़ा वेतन देने के लिए केजीएमयू व एसजीपीजीआई को आय बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है सचिव ने

प्रदीप गंगवार


सेहत टाइम्‍स
लखनऊ।
किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय की कर्मचारी परिषद ने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के लिए मरीजों के उपचार व जांचों के शुल्‍क बढ़ाने सम्‍बन्‍धी सचिव वित्‍त विभाग के फरमान को धन उगाही बताते हुए इस सम्‍बन्‍ध में उप मुख्‍यमंत्री व विभागीय मंत्री के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराने का फैसला लिया है। ज्ञात हो मनमाना फरमान जारी करने वाले सचिव संजय कुमार व़ही अधिकारी हैं जिनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक कर्मचारी का आर्थिक शोषण करने पर ज़मानती वारंट जारी कर जेल भेजने की भी मंशा जताते हुए कार्यवाही की गयी थी।

केजीएमयू कर्मचारी परिषद के अध्‍यक्ष प्रदीप गंगवार ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि 23 अगस्त 2016 को के जी एम यू के कर्मचारियों को एस जी पाई जी आई के कर्मियों के समान वेतनमान एवं भत्ते प्रदान करने के शासनादेश के क्रम में कर्मचारी परिषद द्वारा पिछले लगभग ६ वर्षों में निरंतर अनेक बार पत्राचार /वार्ता, अनुरोध, प्रदर्शन एवं आंदोलन किए गए किंतु पिछले 6 वर्षों में मात्र आठ समवर्गो का ही समवर्ग़िये पुनर्गठन किया गया।


उन्‍होंने बताया कि शासन के वित्त विभाग में 28 समवर्गों की फ़ाइल पिछले कई महीनो से लम्बित पड़ी है किंतु वित्त विभाग द्वारा उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। अपितु 6 अप्रेल को सचिव – वित्त विभाग द्वारा प्रमुख सचिव , चिकित्सा शिक्षा को एक पत्र जारी किया गया जिसमें के जी एम यू एवं एस जी पाई जी आई को अपने कर्मियों के वेतनमान देने के लिए आय/ क्षमता बढ़ाने की सलाह दी गयी है। उन्‍होंने कहा है कि किसी भी चिकित्सा संस्थान को अपनी आय बढ़ाने के लिए मरीज़ों के उपचार एवं जांचों में बढ़ोतरी कर धन उगाही का कार्य करना होगा, जोकि प्रदेश की जनता के साथ सरासर अन्याय है। उन्‍होंने कहा कि शासन द्वारा दी गयी सलाह पूर्ण रूप से सरकार की कार्य शैली के विपरीत है, क्‍योंकि जहां सरकार प्रत्‍येक ज़िले में 100 बेड का सरकारी अस्पताल खोलकर प्रदेश की गरीब जनता को उपचार देने की मंशा रखती है , वहीं शासन में बैठे अधिकारी प्रदेश की गरीब जनता से धन उगाही का फ़रमान जारी करते हैं।

उन्‍होंने कहा है कि कर्मचारी परिषद, प्रदेश की जनता के प्रति सम्‍वेदनशील रहने वाले उपमुख्यमंत्री/मंत्री चिकित्सा शिक्षा विभाग से जल्द ही सचिव वित्त विभाग के तर्कहीन तथ्यों एवं सम्‍वेदनहीनता की शिकायत कर उनके विरुद्ध कार्यवाही की मांग करेगी ताकि भविष्य में कोई भी प्रदेश की जनता के प्रति इतनी तुच्छ मानसिकता न रख सके।

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