Wednesday , February 1 2023

आनुवांशिक जांचों का डेटा सुरक्षित व गोपनीय रखना एक बड़ी चुनौती

-एसजीपीजीआई में 9-10 दिसम्‍बर को हो रही कॉन्‍फ्रेंस मे जुटेंगे देश-विदेश के जेनेटिक्‍स विशेषज्ञ

डॉ शुभा फडके

सेहत टाइम्‍स

खनऊ। किसी भी व्‍यक्ति को भविष्‍य में कौन सी गंभीर बीमारी हो सकती है, इसके बारे में जेनेटिक्‍स टेस्‍ट से पता लगाया जाता है, भारत में इसकी उपलब्‍धता और इन टेस्‍ट के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इन आनुवांशिक परीक्षणों के परिणामों के डेटा को सुरक्षित और उनकी गोपनीयता बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती होगी। यह टेस्‍ट कब कराये जायें, इसके परिणाम कितने गोपनीय रखने हैं, परिणामों के बारे में किस-किस को बताया जा सकता है, ऐसे तमाम पहलुओं पर विचार करने के साथ ही रोगों के निदान में आनुवांशिक जांचों की भूमिका जैसे महत्‍वपूर्ण विषयों पर विचार करने के लिए यहां लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई में आगामी 9 व 10 दिसम्‍बर को  आयोजित कॉन्‍फ्रेंस में देश-विदेश के विशेषज्ञ एकत्रित हो रहे हैं।

यह जानकारी एसजीपीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्‍स विभाग की विभागाध्‍यक्ष डॉ शुभा फडके ने देते हुए बताया कि एसजीपीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्‍स विभाग और सोसाइटी ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स (SIAMGCON)  द्वारा आयोजित इस 7वीं वार्षिक कॉन्‍फ्रेंस में होने वाली चर्चा से निकले बिंदुओं से आनुवांशिकी जांचों और उसके परिणामों की गोपनीयता की नीति को भारतीय परिप्रेक्ष्‍य में तैयार करने में खासी मदद मिल सकती है। भारत में आनुवंशिक परीक्षणों की उपलब्धता व इसके प्रति बढ़ती जागरूकता और परीक्षणों की सटीकता, रोगी स्वायत्तता और आनुवंशिक डेटा की गोपनीयता के बारे में बढ़ती चिंताओं के परिपेक्ष्य में  इस वर्ष के सम्मेलन के लिए सर्वथा उपयुक्त विषय चुना गया है, जो है-  “परिशुद्ध चिकित्सा ( precision medicine) के लिए जीनोमिक डेटा, स्वास्थ्य देखभाल में ”जीनोमिक्स की भूमिका पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य”।

उन्‍होंने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान और भारत के लिए दो तरह से प्रासंगिक हैं। पहला कि SGPGIMS में मेडिकल जेनेटिक्स विभाग, भारत का पहला विभाग है, जो अपनी स्थापना के तीन से अधिक दशक पूर्ण कर चुका है और विभाग के पूर्व छात्रों ने देश के सभी हिस्सों में जेनेटिक्स विभाग स्थापित किए हैं। भारत के लिए दूसरी महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि भारत में आनुवंशिक विकारों के लिए अत्याधुनिक नैदानिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। भारत में आनुवंशिक विकारों वाले प्रत्येक रोगी और परिवार के लिए सभी महत्वपूर्ण जीनों या पूरे जीनोम का अनुक्रमण (sequencing) उपलब्ध है। Next generation sequencing based आनुवंशिक तकनीक एक शक्तिशाली तकनीक है और सभी आनुवंशिक विकारों के लिए एक परीक्षण है।

उन्‍होंने कहा कि ऐसे विकार, जो नवजात शिशु में पहले दिन ही गंभीर बीमारी के साथ प्रकट हो सकतें हैं या क्रमशः विकासात्मक अक्षमताओं, जन्म दोष, एनीमिया, छोटे कद, प्रतिरोधक क्षमता  विहीनता आदि के साथ प्रकट हो सकतें हैं। इन विकारों के लिए उम्र कोई सीमा नहीं है। वयस्कों में कई न्यूरोलॉजिकल विकार, दृष्टि समस्याएं और पारिवारिक कैंसर मौजूद हो सकते हैं। नेक्स्ट जनरेशन बेस्ड जेनेटिक टेस्टिंग डायग्नोस्टिक प्रतिमान को बदलने वाली एक शक्तिशाली और अद्भुत तकनीक है।

सम्मेलन का उद्देश्य भारत में बड़े डेटा के प्रबंधन के उचित तरीकों और दुनिया के अन्य  क्षेत्रों की तुलना में भारतीयों के जीनोम की समानता व असमानता बारे में चर्चा करना है।

उन्‍होंने कहा कि दो दिनों के इस सम्मेलन को यू के, यूएसए और स्विट्जरलैंड के विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञों द्वारा जीनोमिक डेटाबेस, precision medicine, कैंसर की आनुवंशिकी, नवजात और हृदय रोगों पर सत्रों को शामिल करने के लिए सावधानीपूर्वक डिजाइन किया गया है।

डॉ शुभा फडके ने कहा कि 8 दिसंबर को एक प्रीकॉन्फ्रेंस कार्यशाला के साथ सम्मेलन का प्रारंभ  होगा, जिसमें डॉ माधुरी हेगड़े, एसवीपी और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी, पर्किन एल्मर, यूएसए और डॉ शेरोन प्लॉन, प्रोफेसर, बायलर कॉलेज, यूएसए एवं Principal Investigator, Clinical Genome Research द्वारा जीनोमिक अनुक्रम विविधताओं की व्याख्या पर विचार विमर्श किया जायेगा।  11 दिसंबर को सम्मेलन के उपरांत प्रसूति रोग विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों के लिए लक्षित “गर्भ से पालने तक” विषय पर प्रसवपूर्व, प्रसवकालीन और नवजात आनुवंशिकी पर एक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें गर्भ में पल रहे बच्चे व नवजात शिशु में वाले विभिन्न आनुवंशिक विकारों के दृष्टिकोण पर चर्चा की जाएगी। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि 2021 में आई भारत की दुर्लभ रोग नीति द्वारा आनुवंशिक विकारों के लिए 8 उत्कृष्ट केन्द्रों में से एक के रूप में SGPGI के Medical Genetics विभाग को स्थापित किया गया है। 

उन्‍होंने कहा कि COVID19 महामारी के कारण 2 साल के वेबिनार और टेलीकॉन्फ्रेंस के बाद इस बार भारत में चिकित्सा आनुवंशिकी पर सबसे बड़े सम्मेलन में देश के कोने-कोने से विशेषज्ञों, छात्रों और शिक्षाविदों के भाग लेने की उम्मीद है। इस आयोजन से कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सहयोग की अपेक्षा है। हमें उम्मीद है कि चिकित्सा में आनुवंशिकी के विज्ञान पर उच्च स्तर के विचार-विमर्श से आनुवंशिक विकारों के निदान और प्रबंधन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

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