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आत्मनिर्भर भारत का है यह स्वतंत्रता दिवस

-आत्‍मनिर्भर बने भारतवासियों के लिए खास बन गया है यह दिन

लक्ष्‍मी सैनी

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त का दिन अर्थात हमारी आजादी का दिन। 15 अगस्त 2021 का वर्ष हमारी आजादी का 75वां वर्ष है जिसे अमृत महोत्सव के रूप में पूरा देश मना रहा है। हमारे अनगिनत देशभक्तों के बलिदान का ही फल है कि हम भारतवासी गुलामी की जंजीरों से मुक्त होकर आजादी की सांस लेते हुए खुशहाल जीवन जी रहे हैं। पिछले दो वर्षों से पूरे विश्व के साथ-साथ भारत देश को भी ‘कोरोना संकट’ ने घेरा है। जिसके चलते भारत देश का प्रत्येक प्रदेश और स्थानों पर कोलाहल मचा हुआ है। जन-धन हर प्रकार की हानि का सामना देश और देशवासी कर रहे हैं अर्थात देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

व्यक्ति की जीवनी कर्म से ही चलती है। लेकिन कोरोना संकट के चलते लाखों लोगों को अपने कर्म से हाथ धोना पड़ा है। देश के बाहर जाकर काम करने वाले व्यक्तियों को अपनी नौकरी छोड़ कर वापस आना पड़ा। जिससे कई लोग बेरोजगार हुए। देश के भविष्य युवा और बच्चे भी इससे अछूते नहीं रहे। सबसे ज्यादा हानि देश के बच्चों की शिक्षा की हुई है जिससे बच्चों के स्कूल / कॉलेज बंद होने के कारण शिक्षा की बहुत बड़ी हानि हुई है। किंतु हम सभी संकटों और हानियों के चलते कहीं न कहीं देश, देशवासी, युवा और बच्चे आत्मनिर्भर भी बने हैं।

तकनीकी के क्षेत्र में कोरोना के चलते प्रगति कारगर साबित हुई है। पिछले इतने वर्षों में ऑनलाइन तकनीकी का शिक्षा के क्षेत्र में इतना प्रयोग कभी नहीं हुआ, होगा जितना इन 2 वर्षों में हुआ है। देश का कैसा भी स्कूल अथवा कॉलेज हो, वहां नेटवर्किंग तथा तकनीकी ने अपना स्थान बना ही लिया है। स्कूल, कॉलेज ही नहीं बल्कि सरकारी अथवा प्राइवेट दफ्तरों, दुकानों, कंपनियां आदि कई स्थानों पर नेटवर्किंग को अपनाकर देश आत्मनिर्भर बना है। तकनीकी के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि लोगों ने ऐसे कई लघु उद्योग खुले हैं जो उनकी जीवनी का साधन बने जैसे, बाहर जाकर काम करनेजाने वालों को नौकरी से कोरोना के चलते हटाए जाने पर अपने देश वापस आकर वे पूरी तरह से बेरोजगार हुए। लेकिन इस संकट के काल में भी व्यक्ति चुपचाप और शांत न बैठकर छोटे-छोटे स्तर पर अपने घरेलू उद्योग शुरू किए। जैसे ग्रामीण इलाकों में देखा गया लोगों ने अपने घर पर ही सब्जी का व्यवसाय शुरू किया, वहीं पर कुछ लोगों ने यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन कोचिंग क्लासेस शुरू कर शिक्षा में भी सहयोग प्रदान किया, तो कहीं किसी ने तत्कालीन सुविधा उपलब्ध करने का जिम्मा उठाया। कहने का अर्थ यह है कि व्यक्ति हार न मानकर कहीं न कहीं आत्मनिर्भर बना और अपनी जीविका का साधन जुटाकर कार्यरत रहा।

कोरोना वास्तव में तो एक भयंकर संकट है, किंतु कहीं न कहीं यह लोगों के व्यक्तिगत विकास में एक शस्त्र के रूप में साबित हुआ है क्योंकि, कोरोना के चलते लोगों का, बच्चों का घर से बाहर निकलना बहुत हद तक वंचित रहा। इस दौरान अधिकतर लोगों ने घर पर ही रह कर अपने व्यक्तित्व को विकसित किया। सबसे ज्यादा प्रभाव तकनीकी और नेटवर्किंग का शिक्षा के क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।

आज देश की वर्तमान स्थिति यह है जब कोरोना का प्रभाव कम हुआ है कि देश के बहुत से लोग ऑनलाइन ही काम करके अपनी जीविका के साधन जुटा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में कंप्यूटर आधारित तकनीकी पूरी तरह से अपने पांव जमा लिए हैं, जो पिछले इतने सालों में कभी नहीं हुआ। कहने का अर्थ यह है कि, लोगों ने अपने व्यक्तिगत जीवन में तकनीकी का प्रयोग इतना अधिक कभी नहीं किया जितना इन 2 वर्षों में हुआ है।

पिछले कुछ वर्षों से हमने देखा कि, हमारा युवावर्ग तथा बच्चा वर्ग आज आधुनिकता की चमक – दमक में खोता जा रहा है। किंतु इन 2 वर्षों में बाल तथा युवा वर्ग ने भी अपना व्यक्तित्व विकास किया है।

अतः अगर यह कहा जाए कि, कोरोना संकट के इस दौर में भारत कहीं न  कहीं आत्मनिर्भर बना है और आत्मनिर्भरता के चलते कार्यरत भी रहा है तो यह बात गलत नहीं होगी। इसलिए कोरोना संक्रमण यह हमारा दूसरे वर्ष का स्वतंत्रता दिवस एक विशेष दिवस है, जहां हम आर्थिक संकट के दौर में एक आत्मनिर्भर देश को देख रहे हैं। कहा जा सकता है कि हमारे लिए दिया गया वीरों का बलिदान भारतवासी जा़या नहीं जाने देंगे …..जय हिंद….

(लेखिका लक्ष्मी सैनी, मध्‍य प्रदेश के मुरैना जिले के अम्बाह पीजी कॉलेज, अम्बाह के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में सहायक प्राध्‍यापक हैं)

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