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वैश्विक पर्यटन के मद्देनजर अयोध्या मेडिकल कॉलेज में बढ़ेंगी कई सुविधाएं

-‘इंडियन सोसाइटी ऑफ़ इंटेंसिव केयर एंड पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ (ISICPM 2026) के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में ब्रजेश पाठक ने की घोषणा

सेहत टाइम्स

लखनऊ। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या में दर्शनार्थ आने वाले वैश्विक पर्यटकों के मद्देनजर अयोध्या के राजर्षि दशरथ ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज’ के लिए स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी योजनाओं की घोषणा की है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर एडवांस्ड टर्शियरी केयर (उच्च-स्तरीय विशिष्ट चिकित्सा) के लिए न्यूरोलॉजी (Neuro), नेफ्रोलॉजी (Nephro) और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी (Gastro) विभाग शुरू करने और विकसित करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों और आने वाले पर्यटकों दोनों को तुरंत जीवन बचाने वाली कार्डियक सुविधाएँ देने के लिए जल्द से जल्द एक अत्याधुनिक कार्डियोलॉजी कैथ लैब बनाई जाएगी।

उपमुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं अयोध्या में ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ़ इंटेंसिव केयर एंड पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ (ISICPM 2026) का तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होते हुए अपने सम्बोधन में की। उन्होंने कहा कि चौबीसों घंटे क्रिटिकल इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ़ और सहायक पैरामेडिकल टीमों के लिए कैंपस के अंदर ही आवासीय सुविधा देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल केयर बेड का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए, अयोध्या मेडिकल कॉलेज के ICU को डिजिटल ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के ज़रिए एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ से जोड़ा जाएगा। एसजीपीजीआई की मुख्य इंटेंसिव केयर टीमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग और एडवांस्ड बेड आवंटन की ट्रैकिंग में मदद करेंगी।

ज्ञात हो भगवान राम की नगरी अयोध्या में ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ़ इंटेंसिव केयर एंड पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ (ISICPM 2026) का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 2 से 4 अक्टूबर तक ‘राजर्षि दशरथ ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज’ में आयोजित इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम को एसजीपीजीआई लखनऊ के एनेस्थिसियोलॉजी और इंटेंसिव केयर विभाग ने मेजबान मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर आयोजित किया था।

‘पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ पर मुख्य फोकस

जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ पर मुख्य फोकस था, जो आधुनिक हेल्थकेयर में एक नई और मरीज़-केंद्रित अवधारणा है। दरअसल “पेरिऑपरेटिव शब्द (periopertive) रोगी की सर्जिकल यात्रा की पूरी प्रक्रिया (सर्जरी से पहले, उसके दौरान और उसके बाद की देखभाल) को कवर करता है, तथा “एक क्लिनिक, एक टीम, एक प्लान” के सिद्धांत पर काम करते हुए, यह सर्जरी वाले मरीज़ों की मेडिकल ज़रूरतों को एक ही, तालमेल वाले सिस्टम में जोड़ता है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (anesthesiologists) को ऑपरेशन थिएटर की पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर मरीज़ की पूरे उपचार के दौरान व्यापक मेडिकल देखभाल और सुरक्षा का तालमेल बैठाना होता है। इसका अंतिम लक्ष्य सर्जरी वाले मरीज़ों को सुरक्षित, आसान और कम तनाव वाले उपचार का अनुभव देना है।

राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि चूँकि अयोध्या में दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है, इसलिए शहर में बेहतर मेडिकल सुविधाएँ बढ़ाना समय की मांग है। इस वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उन्होंने राजर्षि दशरथ ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज’ (अयोध्या मेडिकल कॉलेज) के लिए स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी योजनाओं की घोषणा की।

बेहतरीन काम का सम्मान

उप मुख्यमंत्री ने विजयी पोस्ट-ग्रेजुएट रेजिडेंट्स और खास फैकल्टी सदस्यों को स्वयं प्रतिष्ठित एकेडमिक पुरस्कार और सम्मान दिए। इससे PG साइंटिफिक क्विज़, पोडियम रिसर्च प्रेजेंटेशन और क्लिनिकल एब्स्ट्रैक्ट कैटेगरी में चिकित्सकों के शानदार योगदान को मान्यता मिली।

इस सम्मेलन में भारत भर के टॉप संस्थानों से 200 से ज़्यादा जाने-माने क्लिनिकल एक्सपर्ट्स और पोस्ट-ग्रेजुएट रेजिडेंट्स ने हिस्सा लिया। तीन दिन के वैज्ञानिक कार्यक्रम में 2 कार्यशालाएं, 27 एक्सपर्ट लेक्चर, 2 संगोष्ठी (सिम्पोजियम), 1 पैनल डिस्कशन, 1 पोस्ट-ग्रेजुएट क्विज़ और लगभग 40 पोस्टर और पोडियम प्रेजेंटेशन शामिल थे। इसके अलावा कुल 75 रेजिडेंट्स को जटिल मेडिकल सिद्धांतों और असल दुनिया में इसके क्लिनिकल इस्तेमाल के बीच के अंतर को कम करने के लिए सीधे ‘हैंड्स-ऑन’ ट्रेनिंग भी दी गई, इसमें पहला दिन पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड (POCUS) और जटिल क्लिनिकल स्थितियों के लिए एडवांस्ड एयरवे मैनेजमेंट की खास प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर केन्द्रित था।

प्रेसिडेंट-इलेक्ट, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ़ सोसाइटीज़ ऑफ़ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट्स इसके साथ ही मुख्य सत्र में सटीक ब्लड मैनेजमेंट, थोरेसिक केयर, पीडियाट्रिक सर्जरी सुरक्षा और रोगी की निगरानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर चर्चा की गई। प्रेसिडेंट-इलेक्ट, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ़ सोसाइटीज़ ऑफ़ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट्स डॉ. जे बालावेन्कटसुब्रमण्यम ने यह भाषण दिया, जिसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी, परिणाम-आधारित पेरिऑपरेटिव मेडिसिन की ओर संरचनात्मक बदलाव पर ज़ोर दिया गया। इसमें कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज़ टेस्टिंग (CPET) पर खास लाइव मशीन मॉड्यूल और आधुनिक सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया पर तकनीकी चर्चा शामिल थी।

कॉन्फ़्रेंस में राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए एक अनोखा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी शामिल था। इसमें कॉन्फ़्रेंस में शामिल 250 से ज़्यादा लोगों के लिए श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के दर्शन और सूरज कुंड व अयोध्या के ऐतिहासिक मंदिरों की यात्रा का आयोजन किया गया।