फेफड़ों के कैंसर पर शोध के लिए आरएमएलआई का चयन
-अध्ययन का उद्देश्य फेफड़ों के कैंसर से जुड़े आणविक पहलुओं की बेहतर समझ विकसित करना
सेहत टाइम्स
लखनऊ। जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के एनआरआई/पीआईओ/ओसीआई अनुसंधान सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2026–27 के लिए एक अनुसंधान प्रस्ताव का चयन किया गया है।
प्रस्ताव ID: NRI-2026-1170 के अंतर्गत “नॉन-स्मॉल सेल लंग कार्सिनोमा में टिश्यू कॉनकोर्डेंस एनालिसिस के साथ फेफड़ों से जुड़े प्लाज़्मा-व्युत्पन्न एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स की जीनोमिक और ट्रांसक्रिप्टोमिक प्रोफ़ाइलिंग” नामक अनुसंधान परियोजना का चयन किया गया है। पूरे भारत में कुल आठ अनुसंधान परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से एक परियोजना डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश को प्रदान की गई है।
परियोजना का संचालन
इस परियोजना का संचालन डॉ. विपिन राय, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा किया जा रहा है। परियोजना में डॉ. वंदना तिवारी, प्रोफेसर, बायोकैमिस्ट्री विभाग मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, डॉ. अजय वर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग तथा डॉ. सौम्या शुक्ला, प्रोफेसर, पैथोलॉजी विभाग परियोजना में सह-मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
यह अनुसंधान परियोजना नॉन-स्मॉल सेल लंग कार्सिनोमा (एनएससीएलसी) में फेफड़ों से संबंधित प्लाज्मा-व्युत्पन्न एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स के जीनोमिक एवं ट्रांसक्रिप्टोमिक प्रोफाइलिंग तथा ऊतक के साथ उनकी समानता (टिश्यू कॉनकॉर्डेंस एनालिसिस) के अध्ययन पर केंद्रित है। इस अध्ययन का उद्देश्य फेफड़ों के कैंसर से जुड़े आणविक पहलुओं की बेहतर समझ विकसित करना तथा उन्नत कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में चल रहे प्रयासों को और मजबूत करना है।
डीएचआर कार्यक्रम के अंतर्गत इस अनुसंधान प्रस्ताव का चयन परियोजना टीम के अनुसंधान प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि एवं मान्यता है। यह उपलब्धि प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान की दिशा में सहयोगात्मक एवं नवोन्मेषी जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के महत्व को भी रेखांकित करती है।

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