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इन चिकित्‍सक ने व्‍यथित होकर 1991 में अपने घर में ही कर ली थी प्राणप्रतिष्‍ठा के साथ राम दरबार की स्‍थापना

-अयोध्‍या में होने वाले शिलान्‍यास कार्यक्रम को लेकर उल्‍लास से लबरेज डॉ गिरीश गुप्‍ता ने साझा कीं यादें

-वर्ष 2013 में चांदगंज स्थित मुगलकालीन हनुमान म‍ंदिर में की गयी थी गाजे-बाजे के साथ राम दरबार की स्‍थापना

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 90 के दशक में जब अयोध्‍या में सरयू का जल रक्‍त से लाल हुआ, अयोध्‍या की गलियों में गोलियों की तड़तड़ाहट, लाठियां, सुरक्षा बलों की बूटों की आवाजें, राम का नाम लेने पर रोक, कुल मिलाकर राम भक्‍तों ने जिस पीड़ा का अनुभव किया था, राम भक्‍तों की श्रीराम जन्‍मभूमि पर मंदिर बनने की अभिलाषा जो तब पूरी नहीं हो सकी थी, सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्‍त हुआ। अयोध्‍या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बनाने के लिए 5 अगस्‍त को शिलान्‍यास होने जा रहा है, करोड़ों रामभक्‍तों के मन में अपार खुशी है। इन्‍हीं राम भक्‍तों में एक ऐसे भी रामभक्‍त हैं जो इन सारे प्रकरणों से अत्‍यंत व्‍यथित थे, और अयोध्‍या में श्रीराम के मंदिर बनने का विश्‍वास मन में लिए 1991 में अपने घर में ही पूरे विधिविधान के साथ मूर्तियों की प्राणप्रतिष्‍ठा करते हुए राम दरबार की स्‍थापना कर ली थी। यह राम भक्‍त हैं लखनऊ के जाने-माने होम्‍योपैथिक फि‍जीशियन और गौरांग क्‍लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्‍योपैथी रिसर्च के संस्‍थापक डॉ गिरीश गुप्‍ता।

डॉ गिरीश गुप्‍ता से ‘सेहत टाइम्‍स’ ने बात की तो उन्‍होंने कहा कि अयोध्‍या में राम मंदिर बनने के लिए शिलान्‍यास होने जा रहा है, इसकी मुझे जो खुशी हो रही है, उसे व्‍यक्‍त करने के लिए मेरे पास शब्‍द नहीं हैं। उन्‍होंने बताया कि राम मंदिर आंदोलन के बाद से राम मंदिर को लेकर मन में बहुत बेचैनी थी, 15 अगस्‍त, 1991 को जानकीपुरम में मेरे घर का गृहप्रवेश हुआ, इसके बाद मेरे और मेरी पत्‍नी सीमा गुप्‍ता के मन में आया अयोध्‍या में मंदिर बनने में अभी अड़चनें हैं इसलिए क्‍यों न हम अभी मंदिर की स्‍थापना अपने घर पर ही कर लें। इसके बाद हम दोनों जयपुर पहुंचे वहां से साढ़े तीन फीट की मूर्तियां लाये। इसके बाद घर पर एक सप्‍ताह का स्‍थापना कार्यक्रम चला, जिसमें पूरे विधिविधान से मूर्तियों की प्राण प्रतिष्‍ठा की गयी। इसके बाद भगवान राम की बारात निकली, हमारे रिश्‍तेदार आदि सभी आये, सीता जी का पैरपूजन हुआ उनका कन्‍यादान उसी तरह किया गया जैसे कि लड़की का कन्‍यादान किया जाता है।

वर्ष 2013 में मंदिर में राम दरबार की स्‍थापना के समय पत्‍नी सीमा गुप्‍ता के साथ पूजा-अर्चना करते डॉ गिरीश गुप्‍ता की फाइल फोटो

डॉ गिरीश गुप्‍ता ने बताया कि इसके बाद तो स्‍थापित राम दरबार की पूजापाठ नियमित रूप से सुबह-शाम पूजा, आरती, भोग मैं और पत्‍नी मिलकर करते रहे। कुछ वर्षों बाद कुछ लोगों ने मुझे राय दी कि घर पर प्राण प्रतिष्‍ठा की हुई मूर्तियों की विधिवत पूजा हमेशा ही करनी होती है, तो आगे चलकर अगर बच्‍चे लोग इस सेवा को न निभा पाये तो यह मूर्तियों का अपमान होगा, इसलिए बेहतर होगा कि इन्‍हें किसी मंदिर में रखवा दें, जहां इनकी रोज पूजा होती रहे। उन्‍होंने बताया कि इसके बाद अलीगंज स्थित पुराने हनुमान मंदिर के पुजारी गोपाल दास से बात हुई तो पहले उन्‍होंने इसे अयोध्‍या में उनके द्वारा बनवाये जा रहे मंदिर में स्‍थापना की सलाह दी, लेकिन लगभग 22 साल से राम दरबार की सेवा करती आ रहीं पत्‍नी का मन विचलित होने लगा कि इतनी दूर हम लोग जल्‍दी-जल्‍दी कैसे पहुंच कर दर्शन कर पायेंगे।

डॉ गुप्‍ता ने बताया कि इसके बाद पुजारी जी ने यहीं चांदगंज में सुनारों द्वारा बनवाये गये मुगलकालीन हनुमान मंदिर में राम दरबार को स्‍थापित करने का सुझाव दिया। इसके बाद मई 2013 में गाजे-बाजे के साथ राम बारात निकली और यहां चांदगंज में हनुमान मंदिर में रामदरबार की स्‍थापना कर दी गयी। धूमधाम से आयोजित इस समारोह में वर्तमान के विधायक डॉ नीरज बोरा, तत्‍कालीन मुख्‍य सचिव, कई पुलिस अधिकारी, अलीगंज थाने के सभी लोग कुल मिलाकर लगभग 500 भक्‍त सम्मिलित हुए थे, तब से बराबर पूजा-अर्चना हो रही है, तथा अनवरत प्रत्‍येक मंगलवार को मैं और पत्‍नी इस मंदिर में आते हैं, जहां सुंदरकांड का पाठ होता है। उन्‍होंने कहा कि मैं सभी भक्‍तों को अयोध्‍या में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की उपस्थिति में राम मंदिर के लिए हो रहे शिलान्‍यास के मौके पर हृदय से बधाई देताा हूं। यह पल मेरे लिए दो दशक पूर्व देखे गये बहुत बड़े सपने के पूरा होने की तरह है।