Wednesday , February 11 2026

लव जेहाद के ज्वालामुखी की तपिश ठंड में पैदा कर रही गरमी, केजीएमयू का एक और कदम

-पैथोलॉजी विभाग की गतिविधियों की जांच के लिए प्रो केके सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग की हिन्दू रेजीडेंट डॉक्टर द्वारा आत्महत्या की कोशिश के बाद उठे लव जेहाद के ज्वालामुखी की तपिश दिसम्बर के इस भीषण सर्द मौसम में भी केजीएमयू के वातावरण में गरमी पैदा किये हुए है। इस प्रकरण में पैथोलॉजी विभाग के ही आरोपी रेजीडेंट डॉ रमीज मलिक के निलम्बन के बाद अब विभाग में संगठित तरीके से चलायी जा रहीं कट्टरपंथी गतिविधियों के गंभीर आरोपों की जांच के लिए केजीएमयू प्रशासन द्वारा प्रो केके सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन कर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये गये हैं।

ज्ञात हो जान देने की कोशिश करने वाली हिन्दू महिला रेजीडेंट डॉक्टर द्वारा विभिन्न जगह की गयी शिकायतों और एफआईआर में पैथोलॉजी विभाग के ही एक मुस्लिम रेजीडेंट डॉक्टर पर उसका शोषण करने व मतान्तरण का दबाव डालने का आरोप लगाया था। इसके बाद आरोपी डॉ रमीज मलिक के खिलाफ एफआईआर लिखाकर उसे निलम्बित कर दिया गया था।

घटना के विरोध में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मां करणी सेना के साथ ही नेशनल मेडिको एसोसिएशन द्वारा तीखे तेवरों के साथ कुलपति, प्रवक्ता व प्रॉक्टर के समक्ष वार्ता में अनेक आरोप लगाये गये थे। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर केजीएमयू प्रशासन द्वारा इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद द्वारा जारी निर्देशों में समिति के गठन का ऐलान किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष प्रो केके सिंह के साथ केजीएमयू स्थित हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो सुरेश कुमार, प्रॉक्टर प्रो आरएएस कुशवाहा, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ हैदर अब्बास सदस्य और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रो सुमित रूंगटा सदस्य सचिव के रूप में शामिल हैं।

केजीएमयू द्वारा 26 दिसम्बर को जारी सरकुलर में कहा गया है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी विभाग में कथित कट्टरपंथ के बारे में खबरें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा 25 दिसंबर-2025 को रिपोर्ट की गई हैं। इसके अतिरिक्त, 24 दिसंबर-2025 को एनएमओ के साथ बैठक के दौरान, NMO द्वारा भी यही मुद्दा उठाया गया था, जिसमें पैथोलॉजी विभाग पर महिला जूनियर रेजिडेंट द्वारा आत्महत्या के प्रयास के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को रिपोर्ट करने में देरी का आरोप लगाया गया था। मीडिया रिपोर्टों और राष्ट्रीय चिकित्सा संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों को देखते हुए, और तथ्यों का पता लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, एक तथ्य-खोज समिति का गठन किया जा रहा है।

एनएमओ रखे है पैनी नजर

इस बीच सोशल मीडिया पर चल रहे एनएमओ के एक पदाधिकरी के बयान से पता चल रहा है कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन के आदेश जारी होने के बाद इस बात पर नजर रख रही है कि कमेटी द्वारा की जाने वाली पूछताछ का तरीका क्या होगा, सामूहिक या व्यक्तिगत। इस पदाधिकारी का मानना है कि गोपनीय तरीके से पूछताछ किये जाने पर ही विभाग के लोग सच कहने की हिम्मत कर पायेंगे।