Friday , August 6 2021

नीति विरुद्ध स्‍थानांतरण पर भड़के स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारी, दी आंदोलन की चेतावनी

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री पर मनमाने तरीके से आदेश देने का लगाया आरोप

मुख्‍य सचिव से मिला प्रतिनिधिमंडल, मुख्‍यमंत्री को भी लिखा पत्र

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में समूह ‘ग’ के कर्मचारियों के नीति विरोध किये जा रहे स्‍थानांतरण पर राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद ने विरोध जताया है, परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्‍य सचिव से मिलकर अपना विरोध जताया है तथा चेतावनी दी है कि अगर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के मनमाने आदेशों का पालन कर नीति विरुद्ध तबादले हुए तो आंदोलन के लिए बाध्‍य होना पड़ेगा। परिषद ने इस सम्‍बन्‍ध में मुख्‍यमंत्री से भी हस्‍तक्षेप करने की अपील करते हुए उन्‍हें पत्र लिखा है।

 

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय पदाधिकारी व स्वास्थ्य विभाग के समस्त संगठनों के प्रान्तीय पदाधिकारियों की अतिआवश्यक बैठक सुरेश रावत की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में परिषद के चेयरमैन संघर्ष समिति व डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसो के प्रदेश अध्यक्ष संदीप बडोला, नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार, ऑप्टोमेट्रिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सर्वेश पाटिल,  लैब टेक्‍नीशियन एसोसिएशन के महामंत्री बी बी सिंह , एक्स रे एसोसिएशन के अध्यक्ष आर के पी सिंह , फिजियोथेरेपी एसोसिएशन के महामंत्री अनिल कुमार, कुष्ठ एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश यादव, एल ए एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश , आर एस राणा, राजेन्द्र पटेल, राजेश चौधरी, सुनील कुमार मीडिया प्रभारी आदि उपस्थित हुए।

 

परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि कार्मिक विभाग उ प्र द्वारा मंत्रिपरिषद से अनुमोदनोपरांत जारी स्थानांतरण नीति के विरुद्ध बड़े पैमाने पर पदाधिकारियों, दिव्यांग, दाम्पत्य नीति से आच्छादित कर्मियों के स्थानांतरण में राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध करते हुए आंदोलन की धमकी दी है ।

 

उन्‍होंने बताया कि कार्मिक विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण नीति में समूह ग के कर्मचारियों के लिये एक ही पटल पर यदि तीन वर्ष पूर्ण हो गये है तो पटल परिवर्तन का प्राविधान किया गया है जिसकी सीमा भी 20 प्रतिशत निर्धारित की गई है। ऐसे कर्मी जो दिव्यांग या दिव्यांग आश्रित हैं , पति पत्नी यदि दोनों सरकारी सेवा में है तो स्थान रिक्त होने की दशा में अनुरोध पर उनका स्थानांतरण कर दिया जाये। लेकिन अत्यंत खेद का विषय है कि स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसिस्ट सहित अनेक पैरामेडिकल कर्मियों के स्थानांतरण में नीति का उल्लंघन किया जा रहा है।

 

उन्‍होंने बताया कि परिषद के संज्ञान में यह भी आया है कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा तथ्यों का परीक्षण किए बगैर नीति विरुद्ध स्थानांतरण के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देशित कर दबाव बनाया जा रहा है , कई पदाधिकारियों के स्थानांतरण के मौखिक आदेश दिए जा रहे हैं जिससे विभाग के कर्मचारी आक्रोशित हैं।

 

स्थानांतरण में दांपत्य नीति, पदाधिकारी, दिव्यांग, दिव्यांग आश्रित आदि के स्थानांतरण न करने के निर्देश हैं, परंतु जनपदों से जो सूचना मांगी गई है उनमें नीति के इन तथ्यों का उल्लेख नही है। इसलिए जनपदों से आ रही सूचनाएं ही अपूर्ण हैं, अपूर्ण सूचनाओं के आधार पर स्थानांतरण से अनेक अनियमितताएं पैदा होंगी।

 

संदीप बडोला अध्यक्ष डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने बताया कि यदि फार्मासिस्टों के साथ भेदभाव का रवैया अपनाते हुए नीति विरुद्ध स्थानांतरण किया गया तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे जिसमें समस्त आवश्यक सेवाएं बन्द होंगी।

 

परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि इस सम्बंध में परिषद का प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्य सचिव से भेंट कर उन्‍हें इस बारे में अवगत कराया जिस पर मुख्य सचिव द्वारा आश्वस्त किया गया व महानिदेशक को निर्देशित किया गया कि संगठन के पदाधिकारियों का स्थानांतरण न करने का नीति में व्यवस्था की गई है ,नीति का उलंघन नही होना चाहिए।

 

परिषद ने मुख्यमंत्री से पत्र लिखकर अपील की है कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर स्थानांतरण में नीति का पूर्णतया पालन करते हुए पदाधिकारियों व त्रुटिपूर्ण स्थानांतरण निरस्त करने की मांग की है ।

 

 

 

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