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27 सितंबर को 51 जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी !

अस्‍पतालों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मी अपनी मांगों को लेकर 27 को लखनऊ में देंगे धरना

लखनऊ। संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ अपना आंदोलन जारी रखेगा, इसके तहत 20 सितंबर से 24 सितंबर तक काला फीता बांधकर विरोध किया जाना है, तथा 25 व 26 सितंबर को पूरे प्रदेश के सभी चिकित्सालयो,मेडिकल कॉलेजों में 2 घंटे का कार्यबहिष्कार तथा 27 सितंबर को इको गार्डन धरना स्थल लखनऊ में विशाल धरना प्रदर्शन का आंदोलन किया जायेगा।

यह बात संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्‍यक्ष रितेश मल्ल ने कही। उन्‍होंने कहा कि विभिन्न चिकित्सालयों में काला फीता बांधकर विरोध किया जा रहा है। संविदा कर्मचारी संघ के एक मांग यूपीएचएसएसपी परियोजना के कर्मचारियों का सेवा विस्तार के संदर्भ में 20 सितम्‍बर को निदेशक एनएचएम द्वारा एक माह का सेवा विस्तार तत्पश्चात सीएमएस द्वारा सेवा प्रदाता एजेंसि‍यों के माध्यम से पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती का आदेश जारी किया गया है। उन्‍होंने कहा कि यूपीएचएसएसपी परियोजना में लगभग 5000 पैरामेडिकल तथा 500 नान पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं, यूपीएचएसएसपी परियोजना आगामी 30 सितंबर को बंद हो रही है जिसमें नॉन पैरामेडिकल स्टाफ की नौकरी समाप्त हो जाएगी, नॉन पैरामेडिकल स्टाफ में इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, फार्मासिस्ट सहित कई महत्वपूर्ण कर्मचारी शामिल हैं जिससे कि अस्पताल की व्यवस्थाएं डगमगा जाएंगी।

मल्‍ल ने कहा कि मिशन निदेशक एनएचएम द्वारा 6 माह का बजट जारी करने के बाद भी कर्मचारियों का सेवा विस्तार केवल एक माह के लिए किया गया तथा 1 नवंबर 2019 से अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था की बात कही गई है जिसमें एक गंभीर समस्या यह है कि कभी भी एजेंसी पुराने कर्मचारियों को नहीं रखती है, ऐसे में 1 नवंबर से नई सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन हुआ तो इसमें 5000 पैरामेडिकल स्टाफ में से काफी लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। एजेंसी वाले अधिकारियों से मिलकर मनमानी तरीके से कर्मचारियों की नियुक्ति करते हैं।

उन्‍होंने कहा कि नॉन पैरामेडिकल स्टाफ जिसका बजट जारी नहीं हुआ वे सभी कर्मचारी बाहर हो जाएंगे। इस प्रकार प्रायः देखने में आ रहा है कि शासन के अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है, जहां एक और कर्मचारी एनएचएम में समायोजित किए जाने की मांग कर रहे हैं और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं आंदोलन की वजह से प्रभावित हो रही हैं, ऐसे में शासन के अधिकारियों द्वारा एक माह का सेवा विस्तार देकर उनके साथ धोखा किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि जिस व्यवस्था का कर्मचारी विरोध कर रहे हैं शासन उसी व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा  है।

मल्‍ल ने कहा कि इसलिए यूपीएचएसएसपी परियोजना के पैरामेडिकल तथा नॉन पैरामेडिकल कर्मचारियों के समायोजन सहित 5 सूत्री मांग पत्र को लेकर जब तक कि मुख्यमंत्री द्वारा मामले में हस्तक्षेप करते हुए कर्मचारियों को सुरक्षित नौकरी, उचित वेतन तथा आउटसोर्सिंग की स्थाई नीति प्रदेश में लागू करने की व्यवस्था तत्काल ना कर दी जाए, संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।