-कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने कहा कर्मचारी की उपेक्षा सरकार को महंगी पड़ेगी

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने कहा है कि मुख्य सचिव स्तर पर 18 नवंबर 2020 को बैठक हुई थी उसके बाद उन्होंने समीक्षात्मक बैठक नहीं की, जिसके कारण वेतन विसंगतियां भत्तों, सेवा पुनर्गठन, सेवा नियमावली आदि मांगों पर निर्णय नहीं हो सका। इसी कारण मोर्चा द्वारा मंत्रियों, विधायकों को ज्ञापन देकर उनसे अनुरोध किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पर दबाव बनाकर मांगों पर निर्णय कराएं। इसके बाद जनता को भी अपनी पीड़ा से अवगत कराया जाएगा। सरकार की उपेक्षा पूर्ण नीति के कारण कर्मचारी परिवार नाराज हैं। उसकी नाराजगी के दुष्परिणाम सरकार को भुगतने होंगे।
यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार श्री मिश्र ने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी जान पर खेलकर मरीजों की जान बचाई। सरकार अपनी पीठ तो थपथपा रही है परंतु उनकी कठिनाइयों को सुनने को तैयार नहीं है।


श्री मिश्र ने नाराजगी व्यक्त की है कि निजीकरण नीति के तहत जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और जिला अस्पतालों को उन्हें लीज पर दिया जा रहा है, लीज पर देने पर कर्मचारियों की क्या स्थिति होगी इस पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। मोर्चा सरकारी संस्थाओं को निजीकरण करने का प्रबल विरोध करेगा।
श्री मिश्र ने मुख्यमंत्री से पुनः आग्रह किया है कि स्वयं हस्तक्षेप करके कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय कराकर सद्भाव का वातावरण बनाएं।
