Sunday , December 4 2022

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य और उनकी पत्नी गिरफ्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने के कारण हो गयी थी बच्चों की मौत

डॉ. राजीव मिश्र
डॉ.पूर्णिमा शुक्ल

लखनऊ. गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के मामले में आरोपी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी होम्योपैथिक डॉ.पूर्णिमा शुक्ल को गिरफ्तार कर लिया गया है. इन दोनों की गिरफ्तारी कानपुर में तब हुई जब ये अपने वकील से मिलने साकेत नगर गये थे, बताया जाता है कि ये दोनों वहां से इलाहाबाद जा रहे थे तभी स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया। दूसरी ओर गोरखपुर में भी पुलिस और एसटीएफ एक अन्य आरोपी डॉ. कफील तक पहुँचने की कोशिश कर रही है लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। डॉ कफील की तलाश में गोरखपुर पुलिस और एसटीएफ ने कल दो बार उनके घर पर छापा मारा था, लेकिन पता चला कि वह दो दिन से घर पर नहीं हैं.

ज्ञात हो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बीती 10-11 अगस्त को लिक्विड ऑक्सीजन क सप्लाई बाधित होने के बाद 30 बच्चों की मौत हो गयी थी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जिसके बाद कार्रवाई होना शुरू हुआ है. समिति की रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्र, उनकी पत्नी और इंसेफलाइटिस वार्ड के इंचार्ज डॉ. कफील खान समेत 9 लोगों के खिलाफ केस मुकदमा दर्ज हुआ।

बताया जाता है कि डाक्टर दम्पति की गिरफ्तारी की खबर के बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हडकंप मचा हुआ है. सबसे पहले निलंबित किए गए पूर्व प्रिंसिपल डा. राजीव मिश्र और कमीशनखोरी व गलत तरीके से मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध किये जाने को लेकर उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ल की गिरफ्तारी के बाद अब सबकी निगाहें डॉ कफील की गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं।
डॉ. कफील घर से फरार हैं. कल सीओ कैंट की अगुवाई में मौके पर पहुंची पुलिस की टीम काफी देर तक उनके घर की तलाशी लेती रही। देर रात करीब 12 बजे के आसपास तुर्कमानपुर, राजघाट स्थित डॉ. कफील खान के आवास पर पुलिस छापेमारी के लिए पहुंची।

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग क्षेत्राधिकारियों के नेतृत्व में तीन टीमें बनाई गई हैं। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों को पुलिस खंगाल रही है।

बताया जा रहा है कि आरोपी गोरखपुर छोडक़र फरार हैं। वे इलाहाबाद और लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच में हलफनामा (कैविएट) दाखिल कर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, आरोपियों को कोई फायदा न मिले, इसके लिए सरकार भी कोर्ट में आवेदन कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

twenty + 3 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.