भाषण की जद़दोजहद हो या हार-जीत का टेंशन, मीठी गोलियों से होगा छूमंतर

चुनावी पड़ावों में आने वाली व्‍याधियों की दवाएं मौजूद हैं होम्‍योपैथी में

 

लखनऊ. उत्‍तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों ने ठंड के मौसम में एकाएक गर्मी ला दी है। आजकल हर तरफ केवल चुनाव की ही चर्चा हैं। हर नेता किसी न किसी प्रकार चुनाव जीत कर मेयर और सभासद बनना चाहता है। इस दौरान प्रत्याशियों एवं उनके समर्थकों में अनेक स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां भी उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है जो चुनाव के मजे को किरकिरा कर सकती है। इनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि होम्योपैथी में ऐसी अनेक दवाएं हैं जो आपकी चुनावी परेशानियों को छू मंतर कर देंगी। यह कहना है वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के सदस्य डा0 अनुरूद्ध वर्मा का।

उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान भाषण देते-देते यदि नेता जी का गला बैठ जाये अथवा वोटों के गुणा भाग लगाने में आत्म विश्वास में कमी आ रही हो या नींद उड़ गयी हो इन सभी समस्याओं का समाधान होम्योपैथी में है और वह भी तात्कालिक असर के साथ।

उन्होंने बताया कि चुनाव में किसी भी प्रत्याशी के लिए चुनाव जीतने का नुस्खा होता है बातों से वोटरों को अपनी तरफ मोड़ना, इसके लिए दिन-रात सम्पर्क, फिर भाषण, ऐसे मे यदि गला ही बैठ जाए, मंच पर खड़े होते हाथ-पाँव कापने लगें, आत्म विश्वास में कमी आ जाए तो यह स्थितियां उसके सारे किये धरे पर पानी फेर सकती हैं, ऐसे में नेताओं को चाहिए कि वे होम्योपैथिक दवा की मीठी-मीठी गोलियां खाएं और चुनाव के मौसम में स्वस्थ रहें। यदि भाषण देते देते गला बैठ जाता हो तो भाषण से दो घंटे पहले कोका क्यू की पांच-पांच बूंद आधे-आधे घंटे में लेने से गला साफ हो जायेगा तथा आवाज पूरी तरह खुल जायेगी।

उन्होंने कहा कि अधिक बोलने से अक्सर स्वर यन्त्र की कार्य-शक्ति कमी हो जाती है और कई बार बोलते समय स्वर भंग हो जाता है, आवाज भारी हो जाती है ऐसे में ओरम ट्रिफाईलम 30 की कुछ खुराकें आपकी आवाज को ठीक करने में फायदेमंद हो सकतीं हैं। भाषण के दौरान आवाज फंसने लगे तो अर्जेन्ट मेट 30 की कुछ खुराकें आवाज को ठीक कर सकती हैं। भाषण के पश्चात यदि आवाज भारी हो जाए तो कास्टिकम 30 औषधि आपकी आवाज को पहले जैसा कर सकती हैं।

चुनाव के दौरान प्रत्याशी जीत के गुणा-भाग में लगे रहते हैं, जीत होगी की नहीं आदि की चिन्ता सताती रहती है, इन सब कारणों से प्रत्याशी में चिड़चिड़ापन, घबराहट, बेचैनी एवं आत्मविश्वास की कमी की परेशानी हो सकती है। ऐसे में यदि प्रत्याशी अर्जेटम नाइट्रिकम 30 की कुछ खुराकें ले ले तो इन परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है, क्योंकि होम्योपैथिक दवाएं आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। प्रत्याशी कल की चिन्ता करते हैं कि कल कहां से प्रचार शुरू करें, वहां रिसपान्स मिलेगा कि नहीं, अगर मिलेगा और मिलेगा तो कैसा मिलेगा, इन सब बातों को लेकर यदि आत्मविश्वास की कमी हो तो लाइकोपोडियम 30 की कुछ खुराकें प्रत्याशी में विश्वास पैदा कर सकती हैं.

उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान अक्सर नेताओं को नींद कम आती है जिससे वो दिन में आलस्य से ग्रसित रहतें है, बात करते-करते सो जातें है, ऐसे में नेताओं को पूरी नींद तो लेनी ही चाहिए, नींद न आने पर काली फास 6 एक्स औषधि नींद लाने में कारगर साबित हो सकती है। नींद के लिये एलोपैथिक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इन दवाइयों से लत पड़ने की सम्भावना है साथ ही साथ इनका शरीर पर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ता है।

चुनाव में दिन भर भागदौड़ से थकान आ जाती है, सुस्ती आ सकती है काम करने में मन नहीं लगता। ऐसे में सुबह जब प्रचार के लिये निकलें तो ऐवेना सटाइवा क्यू की 30 बंूद ले लें यह आपकी थकान को दूर कर देंगी। दिनभर की थकान के बाद यदि शरीर में दर्द हो तो रसटाक्स 30 एवं आर्निका 30 की कुछ खुराकें आपके शरीर के दर्द को छूमंतर कर देंगी। उन्होंने सलाह दी कि सर्दी के मौसम में पूरे कपड़े पहन कर ही प्रचार के लिये निकलना चाहिए साथ ही साथ हमेशा गुनगुना पानी ही पीना चाहिए।

डा. वर्मा ने बताया कि दिनभर भाषण, बहस, माथा-पच्ची, चिक-चिक एवं मतदाताओं को समझाने में दिमागी थकान आ जाती है, ऐसे में ऐसिड फांस 30, फेरम फास 6 एक्स औषधि के प्रयोग से आप का दिमाग तरो-ताजा हो जायेगा और आप जनता को बेहतर तरीके से अपने पक्ष में मोड़ सकेंगे। चुनाव के मौसम में होम्योपैथिक दवाईंया आपकी सेहत का ख्याल रखेंगी। तथा आपकी चुनावी वैतरणी पार करने में आपका सहयोग करेंगीं साथ ही चुनाव को खुशनुमा एवं सफल बनाकर आपकी जीत के सपने को साकार करने में मददगार होंगी, परन्तु यह औषधियां किसी होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए।