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सावधान, ऐसा न हो कि दवा ‘दर्द’ बन जाये

-वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट प्रो एके त्रिपाठी के साथ ‘सेहत टाइम्स’ की विशेष शृंखला

-रक्त और उसके अवयव भाग – 6

सेहत टाइम्स

प्रो ए.के.त्रिपाठी

लखनऊ। रक्त (blood), अस्थि मज्जा (bone marrow), और लसीका प्रणाली (lymphatic system) से संबंधित बीमारियों के उपचार की विशिष्टता रखने वाले किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआई) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में महत्वपूर्ण पदों पर सेवारत रह चुके राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट प्रो ए.के.त्रिपाठी द्वारा स्वस्थ बने रहने के लिए ध्यान रखने योग्य बातों की जानकारी कारण सहित आसान शब्दों में देने के लिए ‘सेहत टाइम्स’ द्वारा शृंखला चलायी जा रही है। ये जानकारियां जहां किसी भी व्यक्ति को स्वस्थ रहने के गुणों को बारीकी से समझाने में सहायक है, वहीं स्नातक स्तर की पढ़ाई करने वाले मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है, चूंकि प्रो त्रिपाठी चिकित्सा के आचार्य यानी प्रोफेसर भी हैं, ऐसे में मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए उपयोगी जानकारियों के बारे में उन्हें लम्बा अनुभव है। उनके पढ़ाये हुए जॉर्जियंस आज देश-विदेश के अपना नाम कमा रहे हैं।

अब तक आपने पढ़ा…

भाग 1 में …‘हृदय और गुर्दा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है एनीमिया’,….क्लिक करें

भाग 2 में …‘झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी की वजह हो सकती है खून में आयरन की कमी’,…..क्लिक करें

भाग 3 में …‘सही तरीके’ और ‘सही समय’ से लेने पर ही लाभ देती हैं आयरन की गोलियां …..क्लिक करें

भाग 4 में …‘अगर आप दूध, दही अथवा मांस, मछली, अण्डा नहीं ले रहे हैं, तो गलत कर रहे हैं…क्लिक करें

भाग 5 में …ब्लड यूरिया का बढ़ा हुआ स्तर बन सकता है एनीमिया का कारण भी…क्लिक करें

अब प्रस्तुत है भाग 6, इस एपीसोड में दवाओं के सेवन से होने वाले एनीमिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

दवाओं के कुप्रभाव से एनीमिया

दवाओं का प्रयोग मरीजों में रोगों के उपचार के लिए किया जाता है, जिससे मरीज स्वस्थ जीवन बिता सके, लेकिन यही दवाएं व्यक्ति के लिए दूसरी बीमारियों का कारण बन सकती हैं, इसकी बड़ी वजह है बिना डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन करना। यह प्रवृत्ति जब आदत में शुमार हो जाती है तो फिर यही दवाएं दूसरे रोगों को पैदा करती हैं, इन्हीं में से एक है एनीमिया। इस एपीसोड में इसी विषय पर प्रो एके त्रिपाठी ने अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां दीं हैं।

प्रो एके त्रिपाठी बताते हैं कि अपेक्षा यह की जाती है कि दवाओं की वजह से शरीर को कोई नुक्सान न हो। अंग्रेजी पद्धति तथा अन्य पद्धतियों में भी दी जाने वाली दवाइयों के एक से अधिक प्रभाव हो सकते है। कुछ प्रभाव ऐच्छिक होते है परन्तु कुछ प्रभाव घातक हो सकते हैं। प्रो त्रिपाठी का कहना है कि बहुत सारी दवाइयां ऐसी हैं जिनका प्रयोग करने से दुष्परिणाम के रूप में एनीमिया हो सकता है। इसका यह मतलब नहीं कि इन दवाइयों को आवश्यकता रहने पर भी सेवन न करें, बल्कि कुप्रभाओं के रोकथाम के लिए, सावधान तथा जागरूक रहने की आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर लोग दवाइयों के रूप में दर्द निवारक गोलियां खाते हैं जिनमें इबूप्रोफेन, डाइक्लोफेनिक सोडियम, निमोस्लाईड प्रमुख है। प्रायः लोग इन दवाइयों को स्वतः खरीदकर बिना डाक्टरी सलाह के लेते रहते हैं। शायद उन्हें यह आभास नहीं होता है कि अपना दर्द ठीक करने के चक्कर में वे अन्य कई रोगों को न्योता दे रहे हैं।

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यदि आपके मन  में हैं इस विषय को लेकर कोई प्रश्न तो कृपया अपनी स्क्रीन पर बने व्हाट्सअप बटन पर क्लिक कर अपना प्रश्न भेजें, प्रश्न का उत्तर प्रो एके त्रिपाठी द्वारा दिया जायेगा

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प्रो त्रिपाठी ने बताया कि इन दवाइयों से होने वाला एक मुख्य नुकसान है एनीमिया। दर्द निवारक गोलियों के सेवन से आमाशय में छालें या घाव (Ulcer) हो सकते हैं, विशेषकर जब यह दवाइयाँ खाली पेट या अत्यधिक मात्रा में तथा लम्बे समय तक ली जायें। इससे पेट में दर्द पैदा हो जाता है। आमाशय के अलसर से धीरे-धीरे रक्त स्राव होता रहता है जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है। अधिक रक्त स्राव होने से मल का रंग काला हो सकता है (Malena)। सूक्ष्म मात्रा में रक्त स्राव होते रहने से मल का रंग नहीं बदलता है जिससे व्यक्ति को इसका आभास नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में मल की जांच कर इसका (occult blood) पता लगाया जा सकता है।

प्रो त्रिपाठी ने बताया कि दर्द निवारक गोलियां शरीर में एनीमिया और तरीकों से भी कर सकती है। कुछ लोगों में दर्द निवारक गोलियों का अस्थि मज्जा (Bone Marrow) जहाँ पर रक्त कणिकाओं की उत्पत्ति होती है, पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अस्थि मज्जा प्रभावित (Bone Marrow Suppresion) हो जाने से व्यक्ति एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia) का शिकार हो जाता है। इतना ही नहीं दर्द निवारक गोलियों का हमारे शरीर के गुर्दों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे गुर्दे की कार्यक्षमता कम हो जाती है और इनमें उपस्थित कोशिकाओं को नुकसान होता है। इससे गुर्दे की कुछ विशेष कोशिकाओं द्वारा स्रावित इरिथ्रोप्वाइटिन पर्याप्त रूप से नहीं बन पाता और मरीज को एनीमिया का शिकार बना देता है। इसके अलावा कुछ अन्य दवाओं जैसे क्लोरोमफेनिकाल, मीथोट्रेक्सेट, कैन्सर की कीमोथैरेपी की दवाएं अस्थि मज्जा को प्रभावित करती हैं, जिसके फलस्वरूप एप्लास्टिक एनीमिया हो सकता है।

उन्होंने बताया कि कुछ दवाएँ खास मरीजों या व्यक्तियों में नुकसान कर सकती हैं जबकि अन्य लोगों में नहीं। यह इसलिए होता है कि कुछ लोगों में पैदाइशी तौर पर कुछ खराबी होती है या रोग होता है। इस परिस्थिति में ये दवाएँ एक परिवार के कई लोगों को नुकसान पहुँचा सकती है। इसलिए दवा लिखने के पहले मरीज से यह पूछना आवश्यक है कि कभी किसी दवा से कोई नुकसान उसको या परिवार के अन्य सदस्य को तो नहीं हुआ है।

उदाहरण के तौर पर एक रोग होता है G6PD deficiency | इस रोग में RBC में एक प्रोटीन G6PD की कमी होती है। इस कमी की वजह से कोशिकाएं कमज़ोर होती हैं तथा आसानी से नष्ट हो जाती हैं। फलस्वरूप व्यक्ति एनीमिया का शिकार होता रहता है, विशेषकर कुछ परिस्थितियों में जैसे सल्फा दवाओं के सेवन से या किसी संक्रमण (Infection) के दौरान। अतः परिवार में कई सदस्यों को (यानि सगे भाई बहनों में) यदि एनीमिया बार-बार होता हो, विशेषकर दवाओं के सेवन के उपरान्त, तो G6PD इन्जाइम की कमी को जानने (diagnose) के लिए चिकित्सक की सलाह के अनुसार जाँच करा लेनी चाहिए।

दवाओं से होने वाले एनीमिया के कारण

1. पेट के अल्सर से रक्त स्राव
2. अस्थि मज्जा का प्रभावित होना
3. गुर्दों पर कुप्रभाव
4. लाल रक्त कोशिकाओं का जल्दी टूटकर नष्ट होना

…जारी