-एसजीपीजीआई में क्रायोएब्लेशन से स्तन, लिवर, किडनी जैसे अंगों के कैंसर का इलाज हो रहा
-एसजीपीजीआई में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सीएमई एवं एलुमनाई मीट में देशभर के विशेषज्ञों का जमावड़ा

सेहत टाइम्स
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) के रेडियोडायग्नोसिस विभाग द्वारा आयोजित इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सीएमई एवं एलुमनाई मीट के पहले दिन लगभग 200-250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारतीय वैस्कुलर एवं इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सोसाइटी (ISVIR) द्वारा अनुमोदित इस सम्मेलन में देशभर से अग्रणी विशेषज्ञ, पूर्व छात्र (एलुमनाई) एवं प्रशिक्षु शामिल हुए और इमेज-गाइडेड थेरेपी में नवीनतम प्रगति पर चर्चा की।
सीएमई के आयोजन अध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रो. अर्चना गुप्ता, विभागाध्यक्ष, रेडियोडायग्नोसिस तथा आयोजन सचिव की जिम्मेदारी डॉ. अस्मिता ने निभाई। कार्यक्रम में ISVIR के प्रेसीडेंट-इलेक्ट डॉ. एस. एस. बैजल तथा ISVIR के अध्यक्ष डॉ. अमर मुकुंद सहित देश के विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिष्ठित इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च ग्रांट पर जोर दिया निदेशक ने
सभा को संबोधित करते हुए एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने संस्थान के क्वाटरनरी केयर सेंटर के रूप में निरंतर हो रहे विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान की प्रगति में रोगी देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षण और प्रभावी शोध की केंद्रीय भूमिका पर विशेष बल दिया। प्रो. धीमन ने युवा संकाय सदस्यों को एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च ग्रांट के लिए सक्रिय रूप से प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के लिए भी प्रेरित किया और वित्तपोषित शोध को शैक्षणिक उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
वैज्ञानिक कार्यक्रम के अंतर्गत न्यूरोइंटरवेंशन, पोर्टल वेनस इंटरवेंशन, एम्बोलाइजेशन तकनीक, महिला स्वास्थ्य हस्तक्षेप तथा पेरिफेरल आर्टेरियल इंटरवेंशन पर केंद्रित अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने स्ट्रोक प्रबंधन, पोर्टल हाइपरटेंशन, ऑन्कोलॉजिक एम्बोलाइजेशन तथा जटिल एंडोवैस्कुलैर प्रक्रियाओं में विकसित हो रही रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया और आधुनिक चिकित्सा में न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
अपनी क्षमताओं को निरंतर उन्नत कर रहा विभाग
विभागाध्यक्ष रेडियोडायग्नोसिस विभाग डॉ अर्चना गुप्ता ने बताया कि विभाग निरंतर अपनी क्षमताओं को उन्नत कर रहा है। संस्थान में मल्टिपल सीटी स्कैनर, अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई सिस्टम तथा इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं के लिए समर्पित डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी प्रयोगशालाएं उपलब्ध हैं। हाल ही में न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी को एकीकृत करते हुए एक समर्पित स्ट्रोक यूनिट भी स्थापित की गई है, जिससे स्ट्रोक मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके। इसके साथ ही एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में नए इमेजिंग सिस्टम के माध्यम से आपातकालीन सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एसजीपीजीआईएमएस अब उन्नत इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं जैसे बैलून-ऑक्लूडेड ट्रांसआर्टेरियल कीमोएंबोलाइजेशन (B-TACE), ट्यूमर के लिए क्रायोएब्लेशन, घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन (GAE) तथा पेरिफेरल आर्टेरियल डिजीज में एथेरेक्टॉमी के लिए एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभर रहा है। ट्यूमर के लिए क्रायोएब्लेशन तकनीक का इस्तेमाल पिछले वर्ष शुरू किया गया है, इस तकनीक से बिना सर्जरी ट्यूमर को नष्ट कर दिया जाता है। ज्ञात हो क्रायोएब्लेशन एक न्यूनतम इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) चिकित्सा प्रक्रिया है, जो कैंसर ट्यूमर को नष्ट करने के लिए अत्यधिक ठंड (तरल नाइट्रोजन या आर्गन गैस) का उपयोग करती है। यह एक सटीक तकनीक है, जो स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुँचाए बिना ट्यूमर को जमाकर नष्ट कर देती है। एसजीपीजीआई में इस तकनीक से स्तन कैंसर, लिवर कैंसर, बोन कैंसर, किडनी कैंसर वाले मरीजों का उपचार सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इस तकनीक से स्तन कैंसर का इलाज करने वाली इस सीएमई की आयोजन सचिव डॉ अस्मिता ने बताया कि क्रायोएब्लेशन तकनीक सहित अन्य इंटरवेंशनल तकनीकियों से स्तन कैंसर का उपचार किया जा रहा है।
इसी क्रायोएब्लेशन तकनीक से लिवर, किडनी के कैंसरग्रस्त ट्यूमर का उपचार डॉ अविनाश गौतम द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभागाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता के विशेष प्रयासों से यूपी में पहली बार क्रायोएब्लेशन तकनीक से उपचार करने की मशीन एसजीपीजीआई में आयी है और इस तकनीक का इस्तेमाल हम लोग पिछले वर्ष से कर रहे हैं यह ट्यूमर को समाप्त करने में सौ फीसदी सफल रहा है।
प्रो. रत्नी गुजराल को एस.एस. सरकार गोल्ड मेडल एवं ओरेशन अवॉर्ड
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण प्रो. रत्नी गुजराल को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए एस.एस. सरकार गोल्ड मेडल एवं ओरेशन अवॉर्ड प्रदान किया जाना रहा। सम्मेलन का समापन वरिष्ठ विशेषज्ञों, एलुमनाई और रेजिडेंट्स के बीच सक्रिय शैक्षणिक चर्चा और उत्साहपूर्ण संवाद के साथ हुआ, जिसने विभाग की शिक्षा, नवाचार और सहयोगात्मक अधिगम के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

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