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केएसएसएससीआई में स्थापित हुआ रक्त को गहराई से विसंक्रमित करने वाला X-ray इरेडिएटर

-चुनिंदा संस्थानों में ही उपलब्ध इस उपकरण का उद्घाटन किया संस्थान के निदेशक ने

सेहत टाइम्स

लखनऊ। कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट के इम्यूनोहेमेटोलॉजी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में—अत्याधुनिक तकनीक से लैस—एक अत्याधुनिक X-ray इरेडिएटर का उद्घाटन किया गया। इसका उद्घाटन इंस्टीट्यूट के निदेशक, प्रोफेसर एम.एल.बी. भट्ट ने किया। इस उपकरण की कीमत 4.30 करोड़ रुपये है।

इस अवसर पर प्रोफेसर एम.एल.बी. भट्ट ने कहा कि इस उन्नत उपकरण के उपयोग से कैंसर रोगियों को दिए जाने वाले रक्त आधान (blood transfusions) में सुरक्षा के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने इम्यूनोहेमेटोलॉजी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की प्रमुख, डॉ. अंजू दुबे के प्रयासों की भी सराहना की, जिनकी बदौलत यह उपलब्धि हासिल हुई है। इस सुविधा के साथ, यह इंस्टीट्यूट राज्य के उन चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी सुविधा उपलब्ध है।

डॉ. अंजू दुबे ने बताया कि X-ray इरेडिएटर संक्रामक रोगों के उस सूक्ष्म से सूक्ष्म अवशिष्ट जोखिम को भी समाप्त करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है, जो रक्त की किसी यूनिट के नमूने में—गहन प्रारंभिक जांच के बाद भी—बना रह सकता है। KSSSCI एक ऐसा चिकित्सा संस्थान है जो विशेष रूप से कैंसर रोगियों के उपचार के लिए समर्पित है। X-ray इरेडिएटर उन प्रतिकूल दुष्प्रभावों के विरुद्ध सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत के रूप में कार्य करेगा—जैसे कि ‘ट्रांसफ्यूजन-एसोसिएटेड ग्राफ्ट-वर्सेस-होस्ट डिजीज’ (TA-GVHD), जो इन रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है—जो बार-बार रक्त आधान किए जाने के परिणामस्वरूप उत्पन्न हो सकते हैं।

ज्ञात हो कैंसर के मरीजो की रोग प्रतिरोधक क्षमता अत्यधिक कम हो जाती है, साथ में रेडियोथेरेपी, सर्जरी और केमोथेरेपी के कारण भी यह और कम हो जाती है, जिससे किसी भी प्रकार के सूक्ष्म संक्रमण को कैंसर मरीजों में पनपने की भारी संभावना रहती है। अतः रक्त में किसी भी प्रकार का न्यूनतम संक्रमण कैंसर मरीजों के लिए बहुत घातक हो सकता है। कैंसर ज्यादातर अधिक उम्र में होता है, जिन मरीजों की इम्युनिटी उम्र के कारण कम होती जाती है, और यदि साथ मे और भी कोई क्रोनिक बीमारी होती है, जैसे मधुमेह या गुर्दे की बीमारी तो उससे भी इम्युनिटी कम हो जाती है। इसी तरह अंग प्रत्यारोपण के मरीजों को तो इम्यून suppresion की दवा भी दी जाती है, ऐसे में उन्हें irradiated ब्लड सबसे सुरक्षित होता है।

इस अवसर पर इंस्टीट्यूट के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुण विजय, संकाय के डीन डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता, वित्त अधिकारी रजनीकांत वर्मा और कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. आयुष लोहिया भी उपस्थित रहे।