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थायरॉयड में एलोपैथी+होम्योपैथी से बेहतर परिणाम हैं अकेले होम्योपैथिक उपचार के

-होम्योपैथी में भी पेटेन्ट दवाओं से नहीं, मनोदैहिक लक्षणों के आधार पर चुनी दवा से होना चाहिये उपचार

-जीसीसीएचआर लखनऊ में हुई स्टडी में पायी गयी सफलता 83.75 प्रतिशत

-विश्व थायरॉयड दिवस (25 मई) पर जीसीसीएचआर के चीफ कन्सल्टेंट डॉ गिरीश गुप्ता से विशेष वार्ता

डॉ गिरीश गुप्ता

सेहत टाइम्स

लखनऊ। गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च Gaurang Clinic and Centre for Homoeopathic Research (जीसीसीएचआर) के चीफ कन्सल्टेंट वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ गिरीश गुप्ता Dr. Girish Gupta का कहना है कि थायरॉयड की बीमारी ऑटो इम्यून भी है और एंडोक्राइन सिस्टम में खराबी के कारण भी होती है। इसका उपचार होम्योपैथी में उपलब्ध है, लेकिन जरूरी यह है कि इलाज कॉन्स्टिट्यूशनल तरीके से मनोदैहिक (Psychosomatic) लक्षणों के आधार पर चुनी गयी दवा से किया जाये, न कि पेटेन्ट दवाओं से। उन्होंने बताया कि केवल होम्योपैथी उपचार लेने वाले मरीज़ों के परिणाम उन लोगों की तुलना में बेहतर होते हैं, जो दोनों दवाएँ एक साथ ले रहे हैं।

विश्व थायरॉयड दिवस (25 मई) के अवसर पर ‘सेहत टाइम्स’ के साथ विशेष वार्ता में डॉ गिरीश गुप्ता ने बताया कि यदि थायरॉयड रोगी शुरुआत से ही हार्मोनल ऐलोपैथिक दवाओं पर निर्भर न होकर सीधे होम्योपैथिक उपचार ले, तो उसके ठीक होने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि जीसीसीएचआर में मरीजों के इलाज से पहले रक्त जांच, अल्ट्रासाउंड और सम्पूर्ण केस हिस्ट्री ली जाती है। इसमें मरीज की पसंद-नापसंद, स्वभाव, मानसिक आघात, अधूरी आकांक्षाएं, स्वप्न, डर और भ्रम जैसी मनोवैज्ञानिक स्थितियों का भी गहन अध्ययन किया जाता है। इसके बाद ही प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत दवा का चयन किया जाता है।

जीसीसीएचआर में हाइपोथायरॉयडिज्म और थायरॉयड lesions हुए शोध के परिणाम उत्साहजनक

डॉ गिरीश ने बताया कि ऐसे ही मरीजों के थायरॉयड रोगों पर किये गये शोध प्रतिष्ठित एशियन जर्नल ऑफ होम्योपैथी में प्रकाशित हो चुके हैं। हाइपोथायरॉयडिज्म के उपचार पर “Evidence based clinical study on inhibition of TSH in Hypothyroid cases in response to homoeopathic drugs” शीर्षक शोधपत्र फरवरी 2010 के अंक में प्रकाशित हुआ था। वहीं “Non surgical treatment of Thyroid lesions by homoeopathic drugs” शीर्षक मॉडल केस स्टडी अगस्त 2011 के अंक में प्रकाशित हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि प्रकाशित अध्ययन में थायरॉयड फंक्शन टेस्ट (टी3, टी4 और टीएसएच) द्वारा निदान के बाद कॉन्स्टिट्यूशनल होम्योपैथिक उपचार दिया गया, जिसके परिणाम उत्साहजनक रहे। उपचार के परिणामों का उल्लेख करते हुए डॉ गिरीश ने बताया कि कुल 80 में से 67 मरीजों यानी 83.75 प्रतिशत मामलों में स्पष्ट लाभ देखा गया, जबकि 13 मरीजों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अध्ययन के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि बिना हार्मोनल थेरेपी के भी होम्योपैथिक दवाओं द्वारा टीएसएच स्तर को सामान्य किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि होम्योपैथिक दवाएं गैर-हार्मोनल, सुरक्षित और कम खर्चीली होती हैं।

डॉ गिरीश गुप्ता के अनुसार आधुनिक चिकित्सा पद्धति में हाइपोथायरॉयडिज्म का उपचार प्रायः आजीवन थायरोक्सिन, थायरोनॉर्म या एल्ट्रॉक्सिन जैसी दवाओं पर आधारित होता है, जबकि होम्योपैथिक चिकित्सा मूल कारण पर कार्य कर स्थायी समाधान देने का प्रयास करती है।

थायरॉयड एडेनोमा, नोड्यूल्स, सिस्ट और मल्टी-नोड्यूलर गोइटर में भी मिली है सफलता

उन्होंने यह भी बताया कि थायरॉयड एडेनोमा, नोड्यूल्स, सिस्ट और मल्टी-नोड्यूलर गोइटर जैसे थायरॉयड lesions पर आधारित कुछ मॉडल केस भी एशियन जर्नल ऑफ होम्योपैथी में प्रकाशित किये गये हैं, जिनमें बिना सर्जरी के उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। उनके अनुसार आधुनिक चिकित्सा में ऐसे मामलों में अक्सर सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है, जबकि होम्योपैथी विभिन्न प्रकार के थायरॉयड lesions के उपचार में उपयोगी सिद्ध हुई है।

होम्योपैथिक उपचार में चुनौतियां

उन्होंने बताया कि जिन मरीजों में थायराइड के साथ दूसरे रोग होते हैं ऐसे लोग जब संपर्क करते हैं तो उनकी प्राथमिकता उनकी जरूरत के अनुसार देखनी होती है, इसे उदाहरण के साथ ऐसे समझा जा सकता है ​कि यदि किसी व्यक्ति को एक साथ पेट, लिवर की दिक्कत, अर्थराइटिस जैसी बीमारियां हैं तो होम्योपैथी में जब होलिस्टिक एप्रोच के साथ दवा दी जाती है तो आमतौर पर एक बीमारी पर ही फोकस रहता है, ऐसे में अगर थायरायड के बजाय दूसरी बीमारी पर फोकस किया गया तो थायरायड में फायदा नहीं होता है जिससे मरीज को निराशा हाथ लगती है, इसके विपरीत ऐलोपैथी में जितनी तरह की बीमारियां हैं, उतने ही प्रकार के विशेषज्ञों द्वारा दवायें दी जाती हैं, उससे प्रत्येक रोग में फायदा होता है जो कि मरीज को संतुष्ट करता है।