-विश्व इमरजेंसी मेडिसिन दिवस (27 मई) पर केजीएमयू के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ने आयोजित किया कार्यक्रम

सेहत टाइम्स
लखनऊ। के0जी0एम0यू0 K.G.M.U.के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में बुधवार 27 मई को विश्व इमरजेंसी मेडिसिन दिवस के अवसर पर एक सी0एम0ई0 सतत चिकित्सा शिक्षा (Continuing Medical Education) वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इमरजेंसी मेडिसिन के बढ़ते महत्व, गंभीर मरीजों के समय पर इलाज और विशेष तौर पर हीट स्ट्रोक से बचाव व इलाज पर चर्चा की गई।
यह जानकारी देते हुए केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रेम राज सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के शुरुआती संबोधन में प्रो0 हैदर अब्बास, विभागाध्यक्ष, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ने गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाने में इमरजेंसी मेडिसिन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी मेडिसिन गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल का पहला संपर्क बिन्दु है, जहाँ त्वरित निर्णय, शीघ्र उपचार एवं समन्वित टीम वर्क से मृत्यु दर और विकलांगता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लाल बत्ती से शुरू हुआ था सफर
प्रो0 हैदर ने कहा कि इस 120 वर्ष पुराने संस्थान में इमरजेंसी चिकित्सा सेवाओं ने एक लम्बा सफर तय किया है – पहले जहाँ “लाल बत्ती” (सामान्य कैजुअल्टी General Casualty) व्यवस्था थी, वहीं आज इमरजेंसी मेडिसिन विभाग आधुनिक सुविधाओं एवं प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम के साथ कार्य कर रहा है। विभाग में स्ट्रोक, पॉइजनिंग, सर्पदंश, सेप्सिस, श्वसन संकट, हीट स्ट्रोक तथा अन्य गंभीर स्थितियों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हीट स्ट्रोक एक वास्तविक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें शीघ्र पहचान, तत्काल शरीर को ठंडा करना एवं समय पर अस्पताल पहुँचना अत्यंत आवश्यक है। सही समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
सशक्त हुई हैं इमरजेंसी सेवाएं
प्रो हैदर अब्बास ने बताया कि विभाग में एम0डी0 इमरजेंसी मेडिसिन कार्यक्रम पाँच पी0जी0 सीटों के साथ संचालित हो रहा है। इस पाठ्यक्रम का प्रथम बैच पिछले वर्ष उत्तीर्ण हो चुका है और ये प्रशिक्षित चिकित्सक वर्तमान में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में सीनियर रेजीडेंट के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं, जिससे केजीएमयू की इमरजेन्सी सेवाएँ और सशक्त हुई हैं।
हीट स्ट्रोक की शीघ्र पहचान के महत्व पर जोर
सी0एम0ई0 सत्र के दौरान प्रो0 अविनाश अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, ने बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बीच हीट स्ट्रोक की शीघ्र पहचान के महत्व पर जोर दिया। डॉ0 प्रेम राज सिंह, सी0एम0एस0, ट्रॉमा सेंटर एवं डॉ0 मुकेश कुमार ने हीट स्ट्रोक से बचाव एवं उसके प्रबन्धन में जन-जागरूकता की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने पर्याप्त पानी पीने, लंबे समय तक धूप से बचने तथा चेतावनी वाले लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी।
डॉ0 देवांश गोयल ने हीट स्ट्रोक और उसके प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें बीमारी के लक्षण, प्राथमिक उपचार, शरीर को शीघ्र ठंडा करने के तरीके, संभावित जटिलताओं तथा बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम में मेडिकल छात्र, रेजीडेण्टस्, नर्सिंग ऑफिसर एवं स्वास्थ्य कर्मियों नें भाग लिया। समापन अवसर पर प्रो0 हैदर अब्बास ने सभी संकाय सदस्यों, रेजीडेण्ट्स, नर्सिंग ऑफिसरों, छात्रों एवं कर्मचारियों को विश्व इमरजेन्सी मेडिसिन दिवस की शुभकामनाएं दीं। धन्यवाद ज्ञापन डॉ मुकेश कुमार द्वारा दिया गया।

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