Saturday , May 30 2026

दुर्लभ जन्मजात बीमारी कोेलेडोकल सिस्ट से ग्रस्त बच्ची की केजीएमयू में हुई रोबोटिक सर्जरी

-पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो जेडी रावत और उनकी टीम को कुलपति ने दी बधाई

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में दुर्लभ जन्मजात बीमारी कोेलेडोकल सिस्ट (Choledochal Cyst) से ग्रस्त 9 वर्षीय बच्ची की रोबोटिक सर्जरी कर उपचार करने में सफलता प्राप्त हुई है। यह रोबोटिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो जेडी रावत व उनकी टीम ने की। डॉक्टरों के अनुसार यह पित्त नलिकाओं (Bile ducts) की एक दुर्लभ, जन्मजात बीमारी है, जिसका यदि समय पर इलाज न किया जाए तो लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

कई अस्पतालों में दिखाया गया था मरीज को

इस बारे में मीडिया प्रवक्ता प्रो केके सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि राजीव गांधी नगर, फर्रुखाबाद के रहने वाले शख्स की 9 वर्षीया पुत्री को कोलेडोकल सिस्ट (Choledochal Cyst) नामक बीमारी थी। मरीज के माता-पिता का कहना है कि उन्होंने कई अस्पतालों में इलाज कराया किन्तु बच्चे की बीमारी के सम्बन्ध में कोई मदद नहीं मिली और अन्त में वे के०जी०एम०यू० के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओ०पी०डी० में मरीज को लेकर दिखाने आये।

27 अप्रैल को पहली बार ओपीडी पहुंची थी बच्ची

बताया जाता है कि विभाग की ओ०पी०डी० OPD  में आने पर डा० जे०डी० रावत और उनकी टीम ने मरीज की स्थिति की जटिलता को देखते हुए मरीज की आवश्यक जांचें करायी गयी और 27 अप्रैल, 2026 को ओपीडी के माध्यम से विभाग में भर्ती किया गया। प्रो० जे०डी० रावत की टीम ने इस मरीज की सटीक सर्जरी और तेजी से रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए मरीज के अभिभावक को रोबोटिक विधि से सर्जरी कराने का सुझाव दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद बीती 20 मई, 2026 को मरीज का ऑपरेशन रोबोटिक तकनीक से कर दिया गया। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में रोबोटिक विधि द्वारा इस बीमारी का यह पहला आपरेशन था जो कि पूर्णतया सफल रहा।

लिवर से आंत तक पित्त बहाव के लिए बनाया नया रास्ता

प्रो रावत के अनुसार कोलेडोकल सिस्ट सर्जरी में असामान्य पित्त नलिका Bile Duct को हटाकर लिवर से आंत तक पित्त के बहाव के लिए एक नया रास्ता बनाया जाता है। उन्नत रोबोटिक तकनीक के उपयोग से सर्जिकल टीम को बेहद छोटे चीरों के माध्यम से और अधिक स्पष्टता व सूक्ष्म सटीकता के साथ काम करने में मदद मिली। पारंपरिक ओपन सर्जरी Traditional Open Surgery की तुलना में यह तरीका ऑपरेशन के बाद के दर्द को काफी कम करता है, खून का बहाव न्यूनतम रखता है और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद करता है।

सर्जरी करने वाली टीम

सर्जन टीम में डा जे० डी० रावत, डा सुधीर सिंह, डा गुरमीत सिंह, डा कृति पटेल, डा अमोल, डा रौनक तथा नर्सिंग स्टाफ रीता, संजय और रिकेश शामिल थे और एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ मनीष सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सर्जरी के बाद से मरीज की रिकवरी अच्छी रही और मरीज स्वस्थ है जिससे मरीज को कल दिनांक 29.05.2026 को विभाग से डिस्चार्ज कर दिया गया।

कुलपति प्रो० सोनिया नित्यानन्द ने सर्जरी की सफलता पर पूरी टीम को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।