-होम्योपैथिक उपचार में किये विशेष कार्यों के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी गूंजा डॉ पीके शुक्ला का नाम
-याद आई पिता की सीख- ‘बैट पकड़ने के लिए नहीं, स्टेथोस्कोप पकड़ने के लिए बने हैं तुम्हारे हाथ’

सेहत टाइम्स
लखनऊ। किशोरावस्था की अपरिपक्व सोच में क्रिकेटर बनने की धुन में मगन रहने वाले उस युवा को जब पिता की अनुभवी सीख ने चिकित्सक बनने की राह की ओर मोड़ा, तो मानव सेवा से जुड़े इस पेशे की राह में कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए पुत्र ने माता-पिता को कभी निराश नहीं किया।
चिकित्सीय क्षेत्र में सफलता-दर-सफलता की पायदानों पर चढ़ते हुए इस शख्स के कदम जब एक सप्ताह पूर्व 10 अप्रैल, 2026 को दुनिया के एक बड़े देश इंग्लैण्ड की संसद में पहुंचे तो उस शख्स ने इसका श्रेय ईश्वर को देते हुए इसे अपने माता-पिता, गुरुओं का आशीर्वाद, परिवार का सहयोग और मित्रों व मरीजों का उनके प्रति लगाव का परिणाम बताया। जिस शख्स की हम बात कर रहे हैं वे हैं राजधानी लखनऊ के इन्दिरा नगर में साढ़े तीन दशकों से मारुति होम्योपैथिक क्लिनिक का संचालन करने वाले खुशमिजाज स्वभाव के धनी डॉ प्रदीप कुमार शुक्ला (डॉ पीके शुक्ला)।
होम्योपैथी के जनक डॉ सैमुअल हैनिमैन की जयंती के मौके पर लंदन और ऑक्सफोर्ड में आयोजित तीन समारोहों में डॉ पीके शुक्ला को सम्मानित किया गया। उनकी इस खुशी को साझा करने के लिए ‘सेहत टाइम्स’ ने उनसे विशेष वार्ता की जिसमें डॉ शुक्ला ने इंग्लैंड के इस दौरे के पन्नों को खोला और इस बारे में विस्तार से बात की।
डॉ शुक्ला बताते हैं कि 10 अप्रैल को लंदन स्थित हाउस ऑफ़ पार्लियामेंट में आयोजित नेशनल होलिस्टिक कांफ्रेंस में उन्हें उनकी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और शोध कार्य के लिए सम्मानित किया गया। यहां दुनिया भर से जुटे 150 चुनिंदा विशेषज्ञों के बीच उन्होंने ऑटोइम्यून डिसीज पर अपना रिसर्च ओरिएंटेड केस प्रेजेंट किया। डॉ पीके शुक्ला को ब्रिटिश सांसद लॉर्ड कृष्ण रावल और शिवानी राजा ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डॉ शुक्ला को मिला यह सम्मान उनके वर्षों के कड़े परिश्रम और संघर्ष का प्रतिफल है। डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का संक्रमण काल होने पर पूरी-पूरी रात क्लीनिक पर बैठकर मरीजों की लम्बी कतारों को अपनी सेवाएं देना डॉ शुक्ला की आदत बन गयी है।
डॉ शुक्ला ने बताया कि अगले दिन 11 अप्रैल का भव्य समारोह लंदन में ही नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम में आयोजित किया गया था, उसमें उन्हें अर्थराइटिस और एंटीवायरल ड्रग्स पर किए गए शोध के लिए मशहूर क्रिकेटर्स एलिस्टेयर कुक, इयान मॉर्गन और स्टुअर्ट ब्रॉड, जो इंग्लैंड के पूर्व कप्तान हैं, द्वारा सम्मानित किया गया।
इसके बाद डॉ पी.के. शुक्ला को लंदन प्रवास के चौथे दिन, यानी 13 अप्रैल 2026 को, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपना शोधपत्र प्रस्तुत करने का मौका मिला, यहां पर मिलीं प्रशंसाओं के बीच इंग्लैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिवीय सलाहकार माइलस टैसी द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।
कुछ अलग ही एहसास हुआ
यह पूछने पर कि इंग्लैंड की धरती पर सम्मानित होने पर कैसा महसूस हुआ, इस पर उन्होंने कहा कि सम्मानित होना निश्चित रूप से गौरव का क्षण होता है लेकिन इंग्लैंड में तिरंगे के साथ सम्मानित होना एक अलग ही एहसास करा गया।

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