Tuesday , March 3 2026

ज्यादातर बच्चों में सुनने की क्षमता में कमी की सबसे बड़ी वजह है कान में मैल होना

-कम सुनने वाले बच्चों को चिन्हित करने स्कूलों में पहुंची एसजीपीजीआई की टीम

-संजय गांधी पीजीआई में विश्व श्रवण दिवस पर हुआ अनेक कार्यक्रमों का आयोजन

सेहत टाइम्स

लखनऊ। एसजीपीजीआई के हेड एंड नेक सर्जरी (Head and Neck Surgery) विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा पंजीकृत एक कार्यक्रम के साथ आज 2 मार्च को एसजीपीजीआई के एडवांस्ड डायबिटिक सेंटर में विश्व श्रवण दिवस 2026 मनाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस वर्ष की थीम समुदायों से कक्षाओं तक : सभी बच्चों के​ लिए श्रवण की देखभाल के मद्देनजर स्कूल पहुंची एसजीपीजीआई की टीम ने बच्चों, टीचर्स और उपस्थित अन्य लोगों को कम सुनने की रुकावट को दूर करने को लेकर जागरूक किया। इस मौके पर पोस्टर प्रतियोंगिता के साथ ही क्विज का भी आयोजन किया गया था। पोस्टर प्रतियोगिता के 48 बच्चों को एसजीपीजीआई में सर्टिफिकेट व अन्य उपहार के साथ पुरस्कृत किया गया।

इस बारे में जानकारी देते हुए हेड एंड नेक सर्जरी विभाग के हेड प्रो अमित केशरी ने बताया कि एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर आर. के. धीमन के मार्गदर्शन में लखनऊ के दो प्रमुख विद्यालयों में श्रवण जागरूकता और स्क्रीनिंग शिविर के साथ-साथ पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रोफेसर आर. के. धीमन ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता और स्क्रीनिंग कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए क्योंकि ये आउटरीच गतिविधियां एसजीपीजीआई के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। इससे समुदायों को लाभ होता है और श्रवण हानि के बारे में जागरूकता, शीघ्र निदान और शीघ्र उपचार में सहायता मिलती है।

प्रो केशरी ने बताया कि बीती 26 फरवरी को प्रिंसिपल डॉ. मंजुला गोस्वामी के मार्गदर्शन में द मिलेनियम स्कूल में श्रवण जागरूकता और स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें विशेष विद्यालय सभा में डॉ केसरी और ऑडियोलॉजिस्ट द्वारा जागरूकता व्याख्यान दिये गये। प्रो केशरी ने बच्चों को सुनने के महत्व और अपनी सुनने की क्षमता की रक्षा के सरल तरीकों के बारे में शिक्षित किया। स्क्रीनिंग शिविर में प्योर टोन ऑडियोमेट्री जैसे श्रवण परीक्षण शामिल थे, जिसके बाद चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता वाले लोगों को एसजीपीजीआई में निःशुल्क रेफरल दिया गया।

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार केंद्रीय विद्यालय में प्रिंसिपल डॉ. कौशलेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित श्रवण जागरूकता वार्ताएं श्रवण हानि के बारे में सामाजिक जागरूकता पैदा करने में प्रभावी रहीं और श्रवण हानि का शीघ्र पता लगाने पर जोर दिया गया। प्रो केशरी ने बताया कि दोनों शिविरों में की गयी बच्चों की स्क्रीनिंग में ज्यादातर बच्चों को कुछ कम सुनने की शिकायत मिली लेकिन उसकी मुख्य वजह कान में मैल होना था। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी यह बताया है कि ज्यादातर बच्चों में कान में वैक्स (मैल) होने की शिकायत पायी गयी है। उन्होंने बताया कि मैल होने के कारण बच्चे को कम सुनायी पड़ता है। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने इस बारे में शिक्षकों को जागरूक करते हुए कहा कि अचानक किसी बच्चे के परीक्षाओं में अंक आने कम हो जायें तो इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिये कि क्लास में जहां पर वह बच्चा बैठता है वहां पर उसे टीचर की आवाज ठीक से सुनायी पड़ती है या नहीं। यदि ऐसा दिखे तो बच्चे को कान, नाक, गले के चिकित्सक को दिखाने की सलाह देनी चाहिये।

दोनों विद्यालयों के कक्षा 1 से 8 तक के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें बच्चों की असाधारण प्रतिभा, रचनात्मकता और श्रवण संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता की सराहना की गई। प्रतियोगिता के 48 विजेताओं को आज 2 मार्च को आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि डीन प्रो शालीन कुमार ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, इस कार्यक्रम में दोनों विद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे। डीन ने बच्चों के बीच ऐसे आयोजनों के महत्व पर बल दिया, उन्होंने कहा कि आज के बच्चे कल के भारत के निर्माता हैं और हमारे देश का भविष्य उन पर ही निर्भर करता है।