-शिशुओं की जान के साथ ही सरकार के 290 करोड़ रुपये भी बचायेगा यह मोबाइल ऐप
-देश-विदेश की 40 भाषाओं में विकसित ऐप का उद्घाटन किया संस्थान के निदेशक ने

सेहत टाइम्स
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रसिद्ध पीडियाट्रिक हेपेटोलॉजिस्ट एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष उपाध्याय ने तीन वर्षों के प्रयास और पिछले डेढ़ वर्ष की गहन मेहनत के बाद भारत का पहला AI-असिस्टेड मोबाइल एप्लिकेशन – “लिवर पूप” (LiverPoop) – विकसित किया है। इस ऐप का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. सी.एम. सिंह द्वारा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. अरविंद कुमार सिंह, डॉ. प्रद्युम्न सिंह, डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, डॉ. दीप्ति अग्रवाल, डॉ. पीयूष उपाध्याय सहित अन्य संकाय सदस्य की उपस्थिति में किया गया।
डॉ पीयूष उपाध्याय ने बताया कि यह क्रांतिकारी उपकरण, नवजातों की जान बचाने के साथ सरकार के ₹290 करोड़ से अधिक बचाएगा। क्योंकि अभी सरकार स्टूल (मल) की फोटो परचे छपवाकर लोगों को वितरण करने में यह खर्च कर रही है, ऐसे में इस ऐप के आने से यह खर्च बचाया जा सकता है। डॉ. उपाध्याय ने बताया “हमारा उद्देश्य इस बीमारी को जन्म के तुरंत बाद पहचानना है, ताकि कोई भी बच्चा बिना इलाज के न रहे। यह ऐप हर माँ, हर ASHA कार्यकर्ता को सशक्त बनाता है। भारत को अब पेपर स्टूल चार्ट पर करोड़ों खर्च करने की आवश्यकता नहीं है – AI आधारित यह ऐप ही भविष्य है।”

डॉ पीयूष ने बताया कि इस ऐप का इस्तेमाल करना बहुत आसान है, स्टूल की फोटो लें → स्क्रीन पर टैप करें → इसके बाद आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस AI बताएगा कि स्थिति “सामान्य” है या “खतरे का संकेत”। उन्होंने बताया कि अगर एआई ने खतरे का संकेत दिया है तो तुरंत ही माता-पिता को चाहिये कि वे चिकित्सक से मिलें।
ऐप क्या करता है?
यह ऐप नवजात शिशुओं (0–1 वर्ष) में बिलीरी एट्रेसिया नामक जानलेवा पित्त नली रोग की स्क्रीनिंग करता है। अध्ययन में इसकी सेंसिटिविटी 100% पाई गई है। डॉ पीयूष ने बताया कि बिलीरी एट्रेसिया एक गंभीर बीमारी है जिसमें 60 दिनों के भीतर ऑपरेशन (कसाई सर्जरी) होने पर बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। 90 दिनों के बाद लिवर इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि केवल महंगा लिवर ट्रांसप्लांट या मृत्यु ही विकल्प रह जाता है।
वैश्विक उपयोगिता
डॉ पीयूष बताते हैं कि यह ऐप केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विकासशील विश्व के लिए उपयोगी है। उन्होंने कहा कि 18 भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अरबी, स्पेनिश, फ्रेंच, रूसी, चीनी, जापानी आदि 22 विदेशी भाषाओं में यह ऐप उपलब्ध है। SAARC, ASEAN और अफ्रीकी देशों में उपयोग योग्य प्रवासी श्रमिक भी अपनी भाषा में इसका उपयोग कर सकते हैं।
स्वास्थ्य तंत्र के लिए अवसर
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ASHA/आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आसानी से उपयोग कर सकती हैं। इसी के साथ समय पर पहचान से लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत में 20% तक कमी आने की संभवना है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल इस ऐप को एंड्रॉइड फोन में वेबसाइट https://liverpoop.netlify.app/ से फ्री डाउनलोड किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जल्दी ही यह ऐप जल्द ही: Google Play Store एवं Apple App Store पर भी उपलब्ध होगा।

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