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‘अगर क्लीनिक/छोटे अस्पताल बंद हुए तो महंगे कॉरपोरेट हॉस्पिटल में जाना मजबूरी बन जायेगा’

-आईएमए यूपी के प्रेसीडेंट डॉ राजीव गोयल ने ‘सेहत टाइम्स’ से विशेष वार्ता में जनता को दिया संदेश

डॉ राजीव गोयल

सेहत टाइम्स-धर्मेन्द्र सक्सेना

लखनऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के प्रेसीडेंट इलेक्ट डॉ राजीव गोयल ने कहा है कि डॉक्टरों को समझें, डॉक्टर आपकी सेवा में हैं, हो सकता है उसकी कुछ फीस हो क्योंकि यह उसकी आजीविका है, लेकिन मुख्य बात यह है कि आईएमए के डॉक्टर जनता की सेवा कर रहे हैं, अगर ये काम करते रहे तो चिकित्सा सुविधाएं सस्ती और रीजनेबुल दामों पर उपलब्ध रहेंगी लेकिन अगर ये डॉक्टर किन्हीं भी कारणों से कामयाब नहीं हो पाये, इनके अस्पताल/क्लीनिक बंद हो गये तो लोगों को कई-कई गुना ज्यादा महंगे कॉरपोरेट हॉस्पिटल्स में जाना उनकी मजबूरी बन जायेगी।

डॉ गोयल रविवार को यहां रिवर बैंक कॉलोनी स्थित आईएमए भवन में आईएमए लखनऊ द्वारा आयोजित स्टेट लेवल रिफ्रेशर कोर्स एंड सीएमई में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने आये थे। इस मौके पर ‘सेहत टाइम्स’ के साथ विशेष वार्ता में उन्होंने कहा कि क्लीनिक्स में आयेदिन होने वाली मारपीट की घटनाएं रुकनी चाहिये, लोगों को समझना चाहिये कि कोई भी चिकित्सक 100 फीसदी मरीजों को ठीक करने का रामबाण आश्वासन नहीं दे सकता है, करीब 5 प्रतिशत केसेज में दिक्कतें बढ़ती ही हैं और कई बार मृत्यु जैसी अप्रिय स्थितियां पैदा हो जाती हैं। लोगों को चाहिये कि वे यह न सोचें कि ऐसा सिर्फ डॉक्टर की गलती से ही हुआ है।

गुणवत्ताविहीन और अनावश्यक पैथोलॉजी जांचों के जाल में न फंसें, सेहत भी बची रहेगी और गाढ़ी कमाई भी

एक सवाल के जवाब में डॉ गोयल ने कहा कि लोगों को चाहिये कि वे चिकित्सक की सलाह पर ही पैथोलॉजी टेस्ट करवायें, अक्सर यह देखा जाता है कि घर पर सैम्पल कलेक्शन करने के लिए आने वाले लोग अपनी मर्जी से आपके वे टेस्ट भी करवा देते हैं जो जरूरी नहीं हैं, ऐसे में जहां सिर्फ दो सौ रुपये की जांच की आवश्यकता थी, वहां दो हजार रुपये के टेस्ट करवा लिये जाते हैं। इसके अलावा दिन-दिन भर धूप में सैम्पल लेकर घूमने के कारण सैम्पल की क्वालिटी खराब हो सकती है। इसके साथ ही ऐसे लोग सही केंद्रों पर टेस्ट नहीं कराते हैं, वे वहीं टेस्ट कराते हैं जहां उनका शेयर ज्यादा होता है, ऐसे में सही रिपोर्ट की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अच्छी गुणवत्ता रिपोर्ट के लिए लैब में जा कर सैंपल देना चाहिए गंभीर परिस्थित में घर से सैंपल दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि रजिस्टर्ड क्वालीफाइड पैथोलॉजिस्ट की देखरेख में की गयी जांचें ही सही परिणाम दे सकती हैं, ऐसे में टेस्ट करवाने से पूर्व यह देख लें कि उस सेंटर पर कौन पैथोलॉजिस्ट तैनात है, उसका नाम, रजिस्ट्रेशन संख्या क्या है। ऐसा करना न सिर्फ आपको आर्थिक हानि से बचायेगा बल्कि उससे भी बढ़कर आपकी अमूल्य जान को बचाने में मददगार होगा, क्योंकि अगर डायग्नोसिस गलत हुई तो दवा भी गलत एडवाइज होगी और नतीजा फायदा तो दूर, नुकसान होना तय है। जांच वहीं करायें जहां पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर की देखरेख मे काम हो रहा है तथा रिपोर्ट का वैलीडेशन मैनुअल सिग्नेचर से किया जा रहा है।

इस सिस्टम में सुधार के लिए आईएमए द्वारा क्या कदम उठाये जा रहे हैं, इस बारे में पूछने पर डॉ गोयल ने कहा कि आईएमए जनता को जागरूक कर सकती है, सलाह दे सकती है, क्योंकि हमारे पास संवैधानिक रूप से ऐसे लोगों को बलपूर्वक रोकने की न तो कोई शक्तियां नहीं है और न ही अधिकार है।