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‘आशा, खुशी और सामान्य जीवन के साक्ष्य’ का संगम बना टेस्ट ट्यूब बेबी मीट

-अजंता हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर के वार्षिकोत्सव में जुटे महीनों से लेकर 27 वर्ष तक की आयु वाले टेस्ट ट्यूब बेबी

-समारोह में अजंता आईवीएफ सेंटर की प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी प्रार्थना भी पहुंची अपनी चार वर्षीया बच्ची के साथ

सेहत टाइम्स

लखनऊ। संतान सुख को लेकर लम्बे समय तक छाये रहे निराशा के बादलों के छंटने के बाद आशा के सूरज की रोशनी देखने वाले दम्पतियों और उनकी संतानों को समर्पित अजंता हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर का वार्षिकोत्सव ‘टेस्ट ट्यूब बेबी मीट’ रविवार 5 अप्रैल को यहां होटल पिकैडली में मनाया गया। ‘आशा, खुशी और सामान्य जीवन का साक्ष्य’ का संगम बने इस समारोह ने लोगों में इस विश्वास को पुख्ता किया कि आईवीएफ तकनीक पर विश्वास जताते हुए अपनी आशा की ज्योति जलाये रखें, और टेस्ट ट्यूब बेबी भी दूसरे बच्चों की तरह होता है जो समय आने पर प्राकृतिक और सामान्य रूप से संतानोत्पत्ति भी कर सकता है। समारोह में कुछ माह के शिशुओं से लेकर 27 वर्ष की उम्र वाले युवा टेस्ट ट्यूब बेबीज ने अपनी ‘डॉक्टर मम्मी’ का आशीर्वाद और प्यार पाया।

टेस्ट ट्यूब बेबी प्रार्थना अपनी बच्ची के साथ

मंच पर आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ गीता खन्ना ने आये हुए सभी टेस्ट ट्यूब बेबीज और उनके माता-पिता के माथे पर टीका लगाकर, उपहार देकर उन्हें शुभकामनाएं दीं वहीं संतान सुख पाये दम्पतियों ने भी भावुकता भरे शब्दोें में डॉ गीता खन्ना के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की। इस पल को यादगार बनाया डॉ गीता खन्ना के प्रयासों के पेड़ (अजंता आईवीएफ सेंटर) में 1998 में लगे प्रथम फल यानी टेस्ट ट्यूब बेबी प्रार्थना की उपस्थिति ने। प्रार्थना अपनी चार वर्षीय बच्ची के साथ कार्यक्रम में आयी थी, प्रार्थना की इस बच्ची का जन्म 2022 में अजन्ता अस्पताल में ही सामान्य प्रसव से हुआ था। प्रार्थना ने मंच से सभी के सामने अपने बारे में जानकारी देकर लोगों में यह विश्वास भरने की कोशिश की कि टेस्ट ट्यूब बेबी भी दूसरे सामान्य बच्चों की भांति होता है, वह भी सामान्य तरीके से संतान को जन्म दे सकता है, मैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हूं। प्रार्थना के अलावा कई दूसरे परिवारों ने अपने संघर्ष, उम्मीद और सफलता की भावुक कहानियाँ साझा कीं। इनमें राजभवन में कार्यरत एक पिता भी शामिल थे, जो अपनी पत्नी और संतान के साथ कार्यक्रम में आये थे, उन्होंने मंच पर अपनी भावनाओं को स्वरचित कविता के माध्यम से व्यक्त किया।

डॉ गीता खन्ना ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ खुशियों का संगम नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों का उत्सव भी है जो विज्ञान की मदद से साकार हुए हैं, इसके साथ ही बढ़ती बांझपन की समस्या पर जागरूकता फैलाने का यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक (ART) किस तरह नि:संतान दम्पतियों की ज़िंदगी में नई रोशनी लाई है, इसे यहां स्पष्ट देखा जा सकता है। तकनीक के परिणाम से जन्मे ये बच्चे पढ़ाई और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि वे पूरी तरह स्वस्थ, सामान्य और सफल जीवन जी रहे हैं।

डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि आज के समय में बांझपन के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके पीछे देर से परिवार शुरू करना, मानसिक तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली, मोटापा, PCOS व थायरॉइड जैसी समस्याएँ और पुरुषों में घटती शुक्राणु गुणवत्ता जैसे कई कारण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गर्भधारण के लिए 22 से 30 वर्ष की आयु सबसे उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन सही समय पर चिकित्सकीय सहयोग मिलने से बाद में भी माता-पिता बनने का सपना पूरा किया जा सकता है।

डॉ. गीता खन्ना ने इस अवसर पर आधुनिक और उन्नत तकनीकों की जानकारी भी दी, जिनमें AI आधारित एम्ब्रियो ग्रेडिंग और सीमेन एनालिसिस, व्यक्तिगत उपचार योजना, माइक्रोफ्लूडिक्स स्पर्म सॉर्टिंग, प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक स्क्रीनिंग और आधुनिक क्रायोप्रिज़र्वेशन तकनीक शामिल हैं। सेंटर सुरक्षित प्रक्रियाओं जैसे सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर को बढ़ावा देता है और दंपतियों को निरंतर काउंसलिंग सहयोग भी प्रदान करता है।