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संजय गांधी पीजीआई में फ्रोजन शोल्डर का इलाज अब सिर्फ दो से तीन माह में

-पेन एंड पेलिएटिव क्लीनिक में प्लाज्मा रिच थैरेपी से किया जा रहा इलाज कारगर साबित हो रहा

-लम्बे समय से हैं अगर दर्द से परेशान तो एसजीपीजीआई आने की सलाह दी चिकित्सकों ने

सेहत टाइम्स
लखनऊ। कंधों की जकड़न (फ्रोजन शोल्डर) की पीड़ा से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है कि संजय गांधी पीजीआई में पीआरपी (प्लाज्मा रिच थैरेपी) से किये जा रहे इसके उपचार की अवधि घट कर लगभग आधी हो गयी है, अब दो से तीन माह में ही मरीज को कंधे और हाथ के भीषण दर्द से राहत मिल रही है। पीआरपी एक आधुनिक उपचार है, जो सूजन कम करने और टिश्यू की मरम्मत में मदद करता है।

सोमवार 22 दिसम्बर को पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए टीम इंचार्ज प्रो सुजीत गौतम ने बताया कि पीआरपी विधि से फ्रोजन शोल्डर का इलाज की प्रक्रिया को लेकर लगातार बेहतरी करना हमारे शोध और स्टडी का हिस्सा है, इसी क्रम में हम लोगों ने उपचार की प्रक्रिया में बदलाव लाते हुए ओपीडी में आये मरीज के परीक्षण के बाद उन्हें प्लाज्मा का पहला इंजेक्शन लगाकर घर नहीं भेजते हैं, बल्कि उन्हें अब लगभग चार से पांच दिन के लिए भर्ती करते हैं, इस दौरान इंजेक्शन का असर देखकर कंधे के आसपास जो मांसपेशियां और नसें होती हैं, उनमें भी मूवमेंट करा देते हैं, इससे मरीज की रिकवरी जल्दी होती है। प्रो सुजीत ने बताया कि पहले पीआरपी का इंजेक्शन लगाकर मरीज को घर भेज दिया जाता था, फिर अगली बार बुलाया जाता था, इस प्रक्रिया में करीब छह से सात माह का समय लग जाता था।

प्रो सुजीत ने बताया कि फ्रोज़न शोल्डर अक्सर डायबिटीज़ वाले लोगों में देखा जाता है, लेकिन यह चोट लगने या अन्य दर्द वाली समस्याओं के बाद भी हो सकता है। एसजीपीजीआई के दर्द क्लिनिक ने पिछले एक साल में 50 से ज़्यादा ऐसे मरीजों को PRP थेरेपी से लाभ पहुँचाया है।

भर्ती करके उपचार करने वाले मरीज का उदाहरण देते हुए उन्होेंने बताया कि देवरिया की 51 वर्षीय सुमन पांडे, जो कई महीनों से कंधे और बांह के तेज़ दर्द से परेशान थीं, को एसजीपीजीआई के पेन और पैलिएटिव केयर क्लिनिक में इलाज के बाद काफी राहत मिली और कंधे की हरकत में भी सुधार हुआ। उन्हें फ्रोज़न शोल्डर (एडहेसिव कैप्सूलाइटिस) नाम की समस्या थी, जिसमें कंधे और हाथ में तेज़ दर्द हो जाता है और हाथ उठाना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने बताया कि सामान्य इलाज से आराम न मिलने पर उन्हें दर्द प्रबंधन के लिए भर्ती किया गया। प्रो. सुजीत गौतम और उनकी टीम ने उन्हें पीआरपी (प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा) थेरेपी दी। इसके साथ-साथ उन्हें कंधे के व्यायाम भी करवाए गए। इलाज के बाद उनके दर्द में काफी कमी आई, कंधे के मूवमेंट में सुधार हुआ और उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी आसान हो गई।

दर्द प्रबंधन चिकित्सा टीम का कहना है कि यह इलाज केवल अंतिम विकल्प नहीं, बल्कि आराम, चलने-फिरने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सक्रिय और वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। अगर किसी को लंबे समय से दर्द है या दर्द कम नहीं हो रहा है, तो वे एसजीपीजीआई के पेन एंड पैलिएटिव केयर क्लीनिक में विशेषज्ञ सलाह ले सकते हैं। ओपीडी सेवाएं रोज़ाना संस्थान में डी ब्लॉक, ग्राउंड फ्लोर, नवीन ओपीडी, में उपलब्ध हैं।