धूम्रपान के 30% धुएं से खुद को, 70% से दूसरों को बीमार करते हैं लोग

वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य को होने वाले खतरे पर व्याख्यान दिया डॉ. सूर्यकान्त ने

 

लखनऊ. देश में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुकी है. वायु प्रदूषण के अनेक कारण हैं, इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार वाहन प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, खाना पकाने के लिए लकड़ी जलाने वाला चूल्हा तथा धूम्रपान करना है. अगर हम बात धूम्रपान की करें तो जो व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसका नुकसान सिर्फ उसे ही नहीं होता है बल्कि दूसरों को भी होता है क्योंकि धूम्रपान करते समय 30% धुआं पीने वाले के अंदर जाता है तथा बाकी 70% वातावरण में घुल जाता है.

 

यह जानकारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत ने आज यहां आईटी कॉलेज में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में दी. डॉ सूर्यकांत में ‘वायु प्रदूषण एवं इसका स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव’ विषय पर बोलते हुए अपने व्याख्यान में कहा कि वायु प्रदूषण से पूरी दुनिया में 70 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है जबकि भारत में इस से 7 लाख लोगों की मौत हो जाती है. डॉ सूर्यकांत ने बताया की शहरी आबादी में 36% लोग तथा ग्रामीण आबादी में 74 प्रतिशत लोग लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं जिसके कारण घर के अंदर व बाहर का वातावरण प्रदूषित हो जाता है.

 

उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सभी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है उन्होंने बताया कि बच्चों में वायु प्रदूषण के चलते जन्मजात बीमारियां जैसे अस्थमा, एलर्जी, कम वजन होना, सांस का बार-बार संक्रमण होना आदि खतरे होते हैं, जबकि वयस्कों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस तथा सांस की अन्य बीमारियां, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर रोग, माइग्रेन तथा स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर सूर्यकांत ने कहा कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए वृक्षारोपण बहुत कारगर उपाय है क्योंकि जितने ज्यादा वृक्ष होंगे, हमें उतना ही शुद्ध ऑक्सीजन का वातावरण मिलेगा, जो कि हमारे स्वास्थ्य को अच्छा बनाएगा. इसके अतिरिक्त धूम्रपान पर भी रोक लगाई जानी चाहिए. वाहनों से होने वाले प्रदूषण के बारे में उनका कहना था कि वाहनों को CNG एवं बैटरी चालित वाहनों को अगर बढ़ावा दिया जाए तो वायु प्रदूषण रोकने में काफी मदद मिलेगी.