खुशखबरी : 50 बेड तक के अस्‍पताल होंगे क्‍लीनिकल स्‍टेब्लिशमेंट एक्‍ट के दायरे से बाहर

प्रमुख सचिव के साथ आईएमए के लोगों की बैठक में बनी सहमति, फायर एनओसी, कचरा प्रबंधन पर भी मिली छूट

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के छोटे और मझोले स्‍तर की क्‍लीनिक्‍स, अस्‍पतालों, नर्सिंग होम के लिए राहत भरी खबर है कि शासन ने 50 बिस्‍तरों तक वाले अस्‍पतालों को क्‍लीनिकल स्‍टेब्लिशमेंट एक्‍ट के दायरे से बाहर करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जतायी है। साथ ही फायर, अस्‍पताली कचरा को लेकर भी राहत देने की बात कही है। आपको बता दें कि अगर छोटे अस्‍पताल भी क्‍लीनिकल स्‍टेब्लिशमेंट ऐक्‍ट के दायरे में आ जाते तो अनेक मानकों को पूरा करने के लिए अस्‍पतालों को बहुत खर्च करना पड़ता जिससे इलाज बहुत महंगा हो जाता जिसका असर कम आय वाले मरीजों के इलाज पर पड़ता। उदाहरण के लिए अभी प्राइवेट नर्सिेग होम में जो ऑपरेशन मात्र दस हजार रुपये में हो जाता है, वही ऑपरेशन 80 हजार रुपये में होता।

 

यह जानकारी इंडियन मेंडिकल एसोसिएशन यूपी के अध्‍यक्ष डॉ एएम खान और सचिव डॉ जयंत शर्मा ने आज यहां आईएमए भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दी। डॉ एएम खान ने कहा कि शासन में आईएमए प्रतिनिधिमंडल की आज प्रमुख सचिव चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सुरेश चंद्रा के साथ हुई बैठक में बहुत सकारात्‍मक परिणाम सामने आयें हैं। अधिकारियों ने बहुत ही सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में डॉक्‍टरों की परेशानी को समझा।

 

डॉ जयंत शर्मा ने बताया कि बैठक में अस्‍पताली कचरा के निस्‍तारण में अस्‍पतालों की जिम्‍मेदारी उसे नियमानुसार कलेक्‍ट करवाने की है। इसके अलावा 15 मीटर की ऊंचाई 500 मीटर के एरिया से कम वाले अस्‍पतालों को फायर विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र की बाध्‍यता भी समाप्‍त कर दी है। आपको बता दें वार्षिक पंजीकरण में यह मसला बहुत बड़ी बाधा बन रहा था।

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उन्‍होंने बताया कि आयोजित बैठक में आईएमए यूपी के अध्‍यक्ष डॉ एएम खान, सचिव डॉ जयंत शर्मा, राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष डॉ शरद अग्रवाल, आईएमए की क्‍लीनिकल स्‍टैब्लिशमेंट एक्‍ट समिति के अध्‍यक्ष डॉ अमिताभ श्रीवास्‍तव, यूपी आईएमए के संयुक्‍त सचिव डॉ आलोक कुलश्रेष्‍ठ, नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्‍यक्ष डॉ मक्‍कड़ भी शामिल रहे।

 

आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने इसी तर्ज पर अपने राज्‍य में क्‍लीनिकल स्‍टेब्लिशमेंट एक्‍ट लागू कर रखा है।