Wednesday , July 28 2021

जान से खिलवाड़ : ‘झोलाछाप’ अस्पताल मालिक ने की सर्जरी, नर्स ने किया बेहोशी देने का काम !

विवादों में बने रहने वाले निजी अस्पताल का एक और कारनामा, काररवाई करने पहुँची स्वास्थ्य विभाग की टीम को भगाया  

 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के शामली में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज अयोग्य लोगों के द्वारा किये जाने का मामला सामने आया है. यहाँ तक कि एनेस्थीसिया जैसे महत्वपूर्ण कार्य को एक नर्स द्वार अंजाम दिया गया और बिना आवश्यक डिग्रीधारक हॉस्पिटल मालिक ने ऑपरेशन किया. इससे सम्बंधित जब वीडियो स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया तो अधिकारी ऑपरेशन थिएटर को सील करने पहुंचे तो बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधन ने उनका विरोध किया तथा सीलिंग से रोक दिया. फिलहाल विभाग ने अस्पताल को लिखित नोटिस जारी करते हुए वीडियो के बारे में तीन दिन में स्पष्टीकरण माँगा है, तथा जवाब न मिलने पर कानूनी काररवाई करने की बात की है.

 

शहर का आर्यन हॉस्पिटल एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार हॉस्पिटल में अयोग्य लोगों द्वारा ऑपरेशन करने और एनेस्थीसिया देने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि यह वीडियो एक अस्पताल कर्मी ने ही स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया। वीडियो के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम आर्यन हॉस्पिटल ऑपरेशन थियेटर को सील करने पहुंची, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और एक स्थानीय नेता ने एसीएमओ को हड़काते हुए बगैर जांच के सील लगाने का विरोध कर दिया, जिसके चलते स्वास्थ्य टीम को बैरंग लौटना पड़ा। इसके बाद ही वीडियो के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए अस्पताल को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब माँगा गया है.  बताया जाता है कि शामली शहर के एमएसके रोड स्थित आर्यन हॉस्पिटल हमेशा से ही विवादों में घिरा रहता है। कभी लिंग परीक्षण को लेकर तो कभी मरीज को गलत खून चढ़ाने को लेकर आए दिन अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी होती रहती है। आर्यन हास्पिटल में अयोग्य लोगों द्वारा ऑपरेशन करने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की पांच सदस्यीय टीम अस्पताल में पहुंची थी।

 

एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार को एक वीडियो देते हुए शिकायत की गई थी कि अस्पताल में कोई भी सर्जन नहीं है। वीडियो आर्यन अस्पताल के अंदर ऑपरेशन थियेटर का बताया जा रहा है. वीडियो के अनुसार एक महिला ओटी में टेबल पर लेटी हुई है, जबकि एक डॉक्टर बगल में खड़ा है। वहीं, मरीज को एक महिला नर्स एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाती दिखाई दिख रही है। यही नहीं सर्जन के अलावा एक अन्य व्यक्ति भी महिला का ऑपरेशन करता हुआ दिख रहा है। बताया जा रहा है कि वीडियो में अस्पताल मालिक नरदेव, जिनके पास कोई डॉक्टरी की डिग्री है, सर्जरी करते दिख रहे हैं।

 

इसी के आधार पर सीएमओ डॉक्टर राजकुमार के निर्देश पर एसीएमओ डॉक्टर अशोक हांडा, एसीएमओ डॉक्टर केपी सिंह स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ आर्यन हॉस्पिटल पर पहुंचे और ऑपरेशन थियेटर पर सील लगाने की बात कही। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का वहां मौजूद अस्पताल प्रबंधन के कुछ लोगों ने विरोध कर दिया। वहीं, अस्पताल में नेता ने भी बगैर जांच के कार्रवाई करने को नियम विरुद्ध बताया। बताया जा रहा है कि इस नेता ने जांचकर्ताओं को हड़काते हुए ट्रांसफर की धमकी भी दी। विरोध होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम बगैर किसी कार्रवाई के लौट गई और इसकी जानकारी सीएमओ को दी.

 

बताया जाता है कि ए.सी.एम.ओ अशोक हाण्डा का कहना है कि अज्ञात लोगों ने मुख्य चिकित्साधिकारी को एक वीडियो सीडी भेजी थी। उसमें इनके यहाँ जो हॉस्पिटल मालिक हैं वो खड़े दिख रहे हैं। वहीं एक महिला इन्जेक्शन लगा रही है। इसी वीडियो में आगे जो सज्जन आपरेशन करते दिखाई दे रहे हैं वो असल में सर्जन नहीं है। बल्कि यहाँ के सर्जन डा.एके सिंह हैं जो वीडियो में ऑपरेशन के दौरान नदारद दिखे। बताया जाता है कि अस्पताल को किसी पार्टी के नेता के संरक्षण प्राप्त है। वे किस पाटी के नेता हैं, यह पूछने पर डॉक्टर ने अनभिज्ञता जताई है। डॉ. अशोक हांडा का कहना है कि इससे पहले भी हॉस्पिटल बिना सर्जन के ऑपरेशन करने के मामले में सील किया गया था और 12 अप्रैल को पुनः डा.ए.के.सिंह के हॉ़स्पिटल की पूर्ण जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने पर सील खोल दी गई थी.

 

ए.सी.एम.ओ. के.पी.सिंह का कहना है कि वीडियो की जांच की गई उसमें ऐसे लोग ऑपरेशन करते दिखाई दे रहे थे जो अधिकृत नहीं हैं और वीडियो जांच में ऐसा लग रहा है कि वे हॉस्पिटल के मालिक हैं। एनेस्थीसिया नर्स के द्वारा नहीं दिया जाना चाहिए यह भी जांच का विषय है और सरकारी कार्य होते समय किसी जनप्रतिनिधि को बुलाया जाना गलत है और उन्होंने हमें ओटी में जाने के लिए रोक दिया। 3 दिन का समय वीडियो के स्पष्टीकरण के लिए दिया है। उसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बारे में हॉस्पिटल मालिक नरदेव का कहना है कि हॉस्पिटल के खिलाफ कुछ लोगों की साजिश है जो हॉस्पिटल को बदनाम कर रहे हैं। हमने जांच टीम से वीडियो दिखाने के लिए कहा है। उन्होंने वीडियो नही दिखाई यह सब एक साजिश है।

 

क्या कहते हैं मुख्य चिकित्साधिकारी

इस बारे में जब ‘सेहत टाइम्स’ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार से बात की तो उनका कहना था कि जो वीडियो देखा गया था उसमें नर्स का चेहरा तो साफ़ दिख रहा था जो बेहोशी वाला इंजेक्शन लगा रही है लेकिन डॉक्टर का चेहरा स्पष्ट न होने के कारण उन्हें नोटिस देकर तीन दिन का समय दिया गया है कि वह वीडियो में दिख रहे डॉक्टर के बारे में जानकारी दें. सीएमओ का कहना था कि चेहरा अगर स्पष्ट होता तो ऑपरेशन थिएटर आज ही सील हो जाता. उन्होंने कहा कि नर्स द्वारा एनेस्थीसिया दिया जाना तो बिलकुल स्पष्ट दिख रहा है इसलिए काररवाई तो होगी ही. बस तीन दिन में उनके जवाब का इन्तजार है. यह पूछने पर कि इस अस्पताल कि खिलाफ पहले भी अनियमितता हुई हैं तो उन्होंने कहा कि हाँ पहले भी शिकायतें आयीं, काररवाई की गयी लेकिन शपथ पत्र देकर फिर अस्पताल चलाना शुरू कर देते हैं. उन्होंने कहा इस केस में पूरी तरह सख्ती बरती जाएगी. हॉस्पिटल के जवाब का इन्तजार है.

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