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केेजीएमयू में लव जेहाद प्रकरण : राजनीति का अखाड़ा बन गया कुलपति कार्यालय, बात एफआईआर तक

-महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव कुलपति के न मिलने से नाराज, समर्थकों का जोरदार हंगामा, नारेबाजी

-लम्बे समय से फरार चल रहा आरोपी डॉ रमीज अंतत: पुलिस के हत्थे चढ़ा

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन ने शुक्रवार को जो मंजर देखा उसकी कल्पना शायद ही किसी को रही होगी। यहां जो कुछ भी घटित हुआ उसके मूल में यहां के पैथोलॉजी विभाग में पिछले दिनों से शुरू हुआ लव जेहाद प्रकरण था। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के कुलपति से मिलने के लिए पहुंचने के बाद उनकी मुलाकात न होने पर समर्थकों द्वारा हंगामा किया गया, वहीं अपर्णा यादव द्वारा इस विषय में मीडिया से बात करते हुए नाराजगी दिखायी गयी। दूसरी ओर हंगामे से नाराज केजीएमयू प्रशासन द्वारा अपर्णा यादव के साथ आये 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखाने के लिए तहरीर दी गयी है। तहरीर में VC ऑफिस में तोड़फोड़, महिला शिक्षकों से अभद्रता और VC का मोबाइल चोरी करने का आरोप है। इस बीच अपर्णा यादव की सीएम योगी से हुई मुलाकात की फोटो भी सामने आ गई है। माना जा रहा है कि अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री को इस घटना की जानकारी देने के लिए मुलाकात की है। इस बीच पुलिस द्वारा खबर दी गयी कि आरोपी डॉ रमीज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, वह न्यायालय में सरेंडर करने जा रहा था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे दबोच लिया।


शुक्रवार के घटनाक्रम में केजीएमयू प्रशासन द्वारा विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी देने के लिए बुलायी गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस सम्पन्न होने केे कुछ समय बाद अपर्णा यादव कुलपति से मिलने के लिए केजीएमयू पहुंचीं, लेकिन उनकी मुलाकात कुलपति से नहीं हो सकी। उन्होंने इस बात का जिक्र अपर्णा यादव ने पत्रकारों से करते हुए नाराजगी जतायी और सवाल पूछा ​कि क्या महिला आयोग को केजीएमयू आने से पहले जानकारी देनी होगी। उन्होंने कहा कि पैथोलॉजी विभाग के दो प्रोफेसरों की आरोपी के भागने के बाद उससे दस दिनों तक बात हुई है, इसका ट्रैक रिकॉर्ड पुलिस के पास है, तो आखिर केजीएमयू प्रशासन ने उन दोनों को क्यों नहीं हटाया। उन्होंने कहा कि आज मैं यहां बिना लाइसेंस चल रहे ब्लड बैंक के प्रकरण को लेकर मिलने आयी थी। उन्होंने एक पीडि़त डॉक्टर के आयोग से मुलाकात किये जाने पर डॉक्टर पर केजीएमयू प्रशासन द्वारा दबाव डालने का आरोप भी लगाया।

इस बारे में केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि पत्रकार वार्ता समाप्त होेके के बाद कुलपति कार्यालय के बाहर अचानक कुछ लोगों की भीड़ एकत्रित होने लगी। बाद में यह जानकारी सामने आई कि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बिना किसी पूर्व सूचना के परिसर में प्रेस संबोधन अथवा भेंट के लिए आ रही थीं। इस संबंध में न तो विश्वविद्यालय प्रशासन को और न ही स्थानीय पुलिस को कोई पूर्व सूचना प्राप्त हुई थी, इसके बावजूद कुलपति के निर्देश पर संस्थागत शिष्टाचार और संवैधानिक मर्यादा का पालन करते हुए उनके स्वागत एवं भेंट की व्यवस्था की गई। समन्वय के लिए एक अतिरिक्त प्रॉक्टर नियुक्त किया गया तथा उपकुलपति, कुलानुशासक और विशाखा समिति की अध्यक्ष उन्हें ब्रीफ करने के लिए कार्यालय में उपस्थित रहीं। उनके आगमन पर उनसे निवेदन किया गया कि वे अंदर आकर कुलपति से मिल लें, किंतु उन्होंने अकेले मिलने से इनकार कर दिया और अपने साथ आई लगभग 200 लोगों की भीड़ के साथ ही मिलने पर अड़ी रहीं।

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि धीरे-धीरे भीड़ उत्तेजित होती चली गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते प्रदर्शनकारी जबरन दरवाज़े तोड़ते हुए कुलपति कार्यालय में घुस आए, प्रशासनिक कक्षों पर कब्जा कर लिया गया तथा तोड़-फोड़ और नारेबाजी शुरू हो गई। उस समय कुलपति महोदया प्रोन्नति समिति के साक्षात्कार में संलग्न थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन, सुरक्षा कर्मियों और उपस्थित अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए कुलपति महोदया को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जिससे उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक हानि न हो और परिस्थिति और अधिक विकराल न बने।

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि इस घटना की सूचना राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कार्यालयों को दी गई। निर्देश प्राप्त होते ही पुलिस बल पहुंचा और लगभग एक घंटे के प्रयासों के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। इस अराजकता का प्रत्यक्ष प्रभाव विश्वविद्यालय की नियमित गतिविधियों पर पड़ा। उसी भवन में प्रोमोशन कमेटी के साक्षात्कार चल रहे थे तथा ऊपरी तल पर एमबीबीएस की परीक्षाएं आयोजित थीं, जो बाधित हुई।

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि इस संदर्भ में विश्वविद्यालय दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान आकृष्ट करना चाहता है। प्रथम, यदि श्रीमती अपर्णा यादव को विशाखा समिति की रिपोर्ट पर चर्चा करनी थी तो उन्होंने सक्षम स्तर से पूर्व सूचना क्यों नहीं दी, जबकि वे स्वयं एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं। प्रशासन का कहना है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी पुनः स्पष्ट करता है कि वह एक ओर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है, वहीं दूसरी ओर संस्थान की गरिमा, शांति, कानून व्यवस्था, शैक्षणिक वातावरण और निर्बाध रोगी सेवाओं की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

लव जेहाद प्रकरण : केजीएमयू की ऐतिहासिक कार्रवाई, आरोपी डॉ रमीज होगा बर्खास्त

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