-22 फरवरी को एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में ब्रेन डेड घोषित किया गया था संदीप कुमार को

सेहत टाइम्स
लखनऊ। एक अत्यंत प्रेरक और मानवीय घटना में रविवार 22 फरवरी को संजय गांधी पीजीआई में ब्रेन डेड घोषित किए गए 42 वर्षीय संदीप कुमार के परिजनों ने देहदान एवं अंगदान का निर्णय लिया। उनके इस महान संकल्प ने उनके दान किये गये अंगों को प्राप्त करने वाले मरीजों के परिवारों को नई आशा दे दी। इन अंगों में लिवर का प्रत्यारोपण केजीएमयू में किया गया क्योंकि एसजीपीजीआई में लिवर के लिए उपयुक्त प्राप्तकर्ता मरीज उपलब्ध नहीं था।
यह जानकारी देते हुए केजीएमयू के मीडिया प्रवक्ता डॉ केके सिंह ने बताया कि पीजीआई में संदीप कुमार के अंगों का निष्कर्षण कर लिया गया, किंतु लिवर के लिए उपयुक्त रिसीपिएंट वहां उपलब्ध नहीं था। इस महत्वपूर्ण परिस्थिति में केजीएमयू की कुलपति डॉ सोनिया नित्यानंद से संपर्क किया गया। कुलपति ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वयं पूरे समन्वय की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली।
रिसीपिएंट की पहचान करते हुए 35 वर्षीय आर प्रताप सिंह को लिवर प्रत्यारोपण के लिए चयनित किया गया। प्रत्यारोपण की समस्त औपचारिकताएं युद्धस्तर पर पूरी करते हुए ऑपरेशन थिएटर, आवश्यक उपकरण, दवाएं और विशेषज्ञ टीम की व्यवस्था शीघ्रता से सुनिश्चित की गई। विशेषज्ञों की टीम ने 22 फरवरी रविवार सायं ऑपरेशन प्रारंभ किया, जो 23 फरवरी की प्रातः लगभग 4–5 बजे तक चला। जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया के बाद प्रत्यारोपण सफल रहा।
उन्होंने बताया कि आज रोगी को एक्स्ट्यूबेट कर दिया गया है, कृत्रिम श्वसन नली हटा दी गई है, और उनके सभी महत्वपूर्ण पैरामीटर सामान्य हैं। वे निरंतर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।
संदीप कुमार के परिजनों के इस महान दान ने एक जीवन को नया भविष्य दिया है। यह घटना अंगदान के महत्व और समय पर नेतृत्व की निर्णायक भूमिका का प्रेरक संदेश देती है।

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