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लव जेहाद प्रकरण : केजीएमयू की ऐतिहासिक कार्रवाई, आरोपी डॉ रमीज होगा बर्खास्त

-विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट में दोषी पाये गये आरोपी रेजीडेंट डॉक्टर के खिलाफ बर्खास्तगी की सिफारिश भेजी गयी डीजीएमई को


सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में हिन्दू रेजीडेंट डॉक्टर द्वारा आत्महत्या का प्रयास किये जाने के बाद उजागर हुए कथित लव जेहाद मामले में आरोपी रेजीडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन (डॉ रमीज) पर केजीएमयू प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय के इतिहास की सबसे कठोर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त करने का निर्णय लिया है, प्रशासन द्वारा उसका दाखिला रद करने की सिफारिश को अनुमोदन और आगे की कार्यवाही के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के पास भेजा गया है।

प्रशासनिक भवन स्थित ब्राउन हॉल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व में विशाखा समिति की अध्यक्ष डॉ. मोनिका कोहली, कुलानुशासक डॉ. आर. ए. एस. कुशवाहा, शिक्षक संघ के अध्यक्ष एवं मीडिया सेल प्रभारी डॉ. के. के. सिंह, सह प्रभारी डॉ. प्रेमराज सिंह एवं डॉ. अमिय अग्रवाल, शिक्षक संघ के महासचिव डॉ संतोष कुमार के साथ-साथ नर्सिंग संघ, कर्मचारी संघ तथा छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से एक मंच से संबोधन किया। सभी वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय इस प्रकरण को केवल एक आंतरिक विषय नहीं, बल्कि महिला सम्मान, नैतिकता और कानून के पालन से जुड़ा गंभीर मामला मानता है।

केजीएमयू प्रशासन ने पैथोलॉजी विभाग के आरोपी रेजीडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन पर आत्महत्या का प्रयास करने वाली पैथोलॉजी विभाग की ही हिन्दू रेजीडेंट डॉक्टर का यौन उत्पीड़न करने, शादी-शुदा होने की बात छिपाते हुए रेजीडेंट डॉक्टर के साथ प्यार का नाटक करके उसका यौन उत्पीड़न करने आदि के प्रकरण पर केजीएमयू में विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट की जानकारी देने के लिए केजीएमयू प्रशासन ने आज प्रात: 11 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलायी थी। इस कॉन्फ्रेंस में कुलपति पद्मश्री डॉ सोनिया नित्यानंद के साथ ही विशाखा कमेटी की अध्यक्ष प्रो मोनिका कोहली सहित प्रवक्ता प्रो केके सिंह, प्रॉक्टर डॉ आरएएस कुशवाहा, केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रेमराज सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ अमिय अग्रवाल, पल्मोनरी विभाग के डॉ संतोष कुमार आदि लोग पत्रकारों से रूबरू थे।

केजीएमयू प्रशासन द्वारा कहा गया है कि कथित यौन उत्पीड़न के अत्यंत गंभीर प्रकरण की विशाखा समिति द्वारा विस्तृत, निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच की गई। 15 दिन के अंदर समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया कि मीडिया को तथ्यों से अवगत कराना उसका दायित्व है, जिससे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना का प्रसार न हो। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय में एक मीडिया संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया है।

कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि विशाखा समिति ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित पक्षों के बयानों तथा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए डॉ. रमीज़ को दोषी पाया है। ऐसे में उसका दाखिला निरस्त करने की सिफारिश कमेटी द्वारा की गयी है, इस सिफारिश को अनुमोदन और आगे की कार्यवाही के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के पास भेजा गया है। कहा गया कि समिति ने विश्वविद्यालय के इतिहास में अब तक की सबसे कठोर अनुशंसा करते हुए उनका दाखिला रद करने का प्रस्ताव निदेशालय चिकित्सा शिक्षा को भेजने का निर्णय लिया है।

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