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मौजूदा स्थिति में बिना जोखिम वाली इन दवाओं से जान बचाने में हर्ज ही क्‍या है ?

-किसी भी वायरस से होने वाले आक्रमण से हर स्‍टेज पर ठीक करने वाली दवायें हैं होम्‍योपैथी में

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। कोरोना का वायरस सबको झकझोर रहा है, व्यवस्थाएं बेपटरी हो रही हैं, न ऑक्सीजन, न अस्पताल, न बेड कुछ भी आसानी से मुहैया नहीं हो रहे हैं, वजह बिल्कुल साफ है, उपलब्धता से कहीं ज्यादा मांग बढ़ चुकी है। ऐसे में होम्योपैथी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है बशर्ते इस पर सरकार को आगे आना होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें किसी प्रकार का जोखिम नहीं है, मरीजों को दिये जा रहे एलोपैथिक इलाज के साथ ही साथ इस होम्योपैथिक दवा को देकर भी मरीजों को लाभ पहुंचाया जा सकता है।

राजधानी लखनऊ स्थित गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च के संस्थापक वरिष्ठ होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ गिरीश गुप्ता के विभिन्न प्रकार के रोगों के होम्‍योपैथिक दवाओं से सफल इलाज करने के अब तक 70 रिसर्च पेपर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। इन्‍हीं में एक ‘एंटीवायरल स्क्रीनिंग ऑफ होम्योपैथिक ड्रग अगेंस्ट ह्यूमन एंड एनिमल वायरेसेस’ (Antiviral screening of Homoeopathic drugs against human and animal viruses) विषय पर की गयी रिसर्च का पेपर है। डॉ गिरीश गुप्ता ने सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्‍योपैथी (सीसीआरएच) द्वारा प्रायोजित इस रिसर्च कार्य को सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) लखनऊ के वायरोलॉजी विभाग में 1982 से 1985 तक किया था। 1985 में रिसर्च पूरी होने के बाद जुलाई 1985 में इसका प्रकाशन ब्रिटिश होम्योपैथिक जर्नल में हुआ था।

डॉ गिरीश गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी में वायरस के शरीर पर आक्रमण होने के बाद हर स्टेज के लिए अलग-अलग दवाएं मौजूद हैं जो वायरस के अटैक को वहीं पर रोक देती हैं और रोगी को ठीक कर देती हैं। उन्होंने बताया की जैसे पहले जब नाक में वायरस पहुंचता है और छींकें आती हैं, उस स्‍तर पर, फि‍र गले में पहुंचने की स्‍टेज पर, फि‍र छाती में पहुंचने की स्‍टेज पर ब्रॉन्‍काइटिस पैदा करने पर, फि‍र फेफड़ों में पहुंचने की स्‍टेज पर, बलगम आने की स्‍टेज के लिए अलग-अलग दवायें मौजूद हैं। उन्‍होंने कहा कि वायरस के आक्रमण से बचने की भी दवायें भी होम्‍योपैथिक में मौजूद हैं, ये दवायें शरीर में एंटीबॉडीज बनाती हैं, जो इम्‍युनिटी बढ़ाती हैं, जिससे वायरस के शरीर में प्रवेश करते ही उससे लड़ने में शरीर सक्षम होता है।

उन्‍होंने कहा कि कहने का तात्पर्य है कि वायरस के शरीर पर आक्रमण शुरू होने से लेकर उसकी गंभीरता की स्थिति तक पहुंचने की अलग-अलग स्टेज के लिए अलग-अलग दवाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक वर्तमान में कॉविड-19 वायरस से पीड़ितों की बात करें तो इसमें भी ये दवाएं कारगर पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इन दवाओं की सबसे अच्छी बात यह है कि मरीजों को इन दवाओं को देने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है, साथ ही जो एलोपैथिक दवाएं चल रही हैं, उन्हें भी बंद करने की बाध्यता नहीं है। उन्‍होंने बताया कि आधुनिक चिकित्‍सा से जुड़े अनेक चिकित्‍सक स्‍वयं इन दवाओं पर न सिर्फ विश्‍वास करते हैं बल्कि बचाव के लिए उसका सेवन भी कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि‍ महामारी की इस घड़ी में होम्‍योपैथिक दवायें महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

‘सेहत टाइम्‍स‘ का सुझाव

‘सेहत टाइम्स’ का सरकार को सुझाव के साथ ही अपील भी है कि‍ जब होम्योपैथिक दवाएं नुकसान नहीं पहुंचाती हैं, और इन्हें देने के लिए एलोपैथिक दवाएं बंद करने की भी अनिवार्यता नहीं है। तो ऐसे में यदि मरीजों को आधुनिक इलाज के साथ होम्योपैथिक दवाएं भी दी जाएं तो इसके अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। यह देखते हुए कि‍ मौजूदा हालातों में जबरदस्त अफरा-तफरी है, व्यवस्थाएं की अपेक्षा मरीज बहुत ज्यादा हैं, तो ऐसे में राष्‍ट्रीय स्‍तर के संस्‍थान सीडीआरआई के वायरोलॉजी विभाग में होम्‍योपैथी की रिसर्च काउंसिल से प्रायोजित सफल रिसर्च और उसका प्रकाशन ब्रिटिश जर्नल में होने जैसी उपलब्धियों को देखते हुए, हानिरहित इन प्रमाणित दवाओं का उपयोग कोविड के मरीजों के लिए करके उन्हें स्वस्थ करने में मदद ली जा सकती है। पैथी कोई भी हो, सभी का उद्देश्य मनुष्य को स्वस्थ करना है, मानव जीवन बचाना है, तो ऐसे में इस निर्णय को सरकार को तुरंत लागू करने में शायद कोई परेशानी नहीं होनी चाहिये।