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टूटे बांध के सैलाब की तरह हो रहे हैं केजीएमयू के बिगड़ते हालात

-लव जेहाद प्रकरण के उजागर होने के बाद से दबे कई मामले फिर उभर रहे

-कुल​पति की अपील पर शिक्षक-कर्मचारी संगठनों ने कार्य बहिष्कार एक दिन और टाला

सेहत टाइम्स

लखनऊ। मौसम बहुत सर्द है लेकिन केजीएमयू का माहौल बहुत गर्म है। यहां के पैथोलॉजी विभाग के रेजीडेंट डॉक्टर रमीज द्वारा विभाग में ही कार्यरत हिन्दू महिला रेजीडेंट डॉक्टर का यौन शोषण, मतांतरण का दबाव जैसे कारणों को लेकर महिला रेजीडेंट डॉक्टर द्वारा किये गये आत्महत्या के प्रयास के बाद बोतल से निकले लव जेहाद के जिन्न के बाद से नये-नये जिन्न निकल रहे हैं, स्थिति यह है कि जिस प्रकार बांध टूटने के बाद पानी के वेग को थामना मुश्किल होता है उसी प्रकार केजीएमयू में दिन पर दिन बिगड़ रहे माहौल को बिगड़ने से रोकना मुश्किल होता जा रहा है। एक बड़ी परेशानी जो सिर पर खड़ी है वह है यहां की ओपीडी सेवाओं पर लटकती तलवार। दूसरी ओर केजीएमयू प्रकरण की जांच मुख्यमंत्री ने एसटीएफ को सौंप दी है, केजीएमयू प्रशासन द्वारा जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग समिति भंग कर दी गयी है। यानी अब इस प्रकरण में जो भी जांच होगी वह एसटीएफ द्वारा ही की जायेगी।

लव जेहाद मामला उजागर होने के बाद जो मामले उभर रहे हैं वे हैं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की प्रोफेसर द्वारा एक फैकल्टी पर लगाया गया छेड़छाड़ का आरोप, बिना लाइसेंस ब्लड बैंक का संचालन, कुलपति कार्यालय में ओएसडी के रूप में तैनात वर्ग विशेष के रिटायर्ड कर्मचारी की तैनाती का मामला, कुलपति कार्यालय परिसर में एक साल पूर्व हुई मुस्लिम तकरीर की घटनाएं आदि शामिल हैं।

ज्ञात हो पीडि़ता की शिकायत के बाद से मामले की जांच कर रहे राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के बीते शुक्रवार 9 जनवरी को केजीएमयू दौरे के समय कुलपति कार्यालय पर पैदा हुई जबरदस्त हंगामे की स्थिति के लिए केजीएमयू प्रशासन और अपर्णा यादव एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं, अपर्णा यादव का कहना है कि मैं केजीएमयू कुलपति से मुलाकात के लिए जब पहुंची तो उस समय अगर कुलपति उनसे मुलाकात कर लेतीं तो वहां पर जुटे उनके समर्थकों में आक्रोश नहीं फैलता, जबकि केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि चूंकि अपर्णा यादव पूर्व से सूचना दिये बगैर आयी थीं, और उस समय वे संकाय सदस्यों के प्रोन्नति के इंटरव्यू लेने में व्यस्त थीं, इसलिए मिलना संभव नहीं था। लेकिन अपर्णा यादव के साथ आये उनके समर्थकों ने किया वह शर्मनाक है।

इस मसले को लेकर केजीएमयू प्रशासन की ओर से दी गयी तहरीर पर 72 घंटे बाद भी मुकदमा दर्ज न किये जाने को लेकर केजीएमयू का शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ, नर्सिंग एसोसिएशन आदि में गहरी नाराजगी है, इन सभी ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी, पहले सोमवार से कार्य बहिष्कार किये जाने का दबाव था लेकिन फिर एक दिन यानी मंगलवार तक के लिए टाल दिया गया था, इस बीच सोमवार को मुख्यमंत्री से मिलने गयीं कुलपति ने वहां से आने के बाद एक बार फिर कार्य बहिष्कार पर आमादा संघों से बात कर कार्य बहिष्कार के निर्णय को एक और दिन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यानी अब मंगलवार को आम दिनों की तरह ओपीडी सेवाएं जारी रहेंगी, इसके बाद बुधवार के लिए निर्णय लिया जायेगा।

कुलपति की मुख्यमंत्री से भेंट के बारे में केजीएमयू द्वारा बताया गया है कि कुलपति ने मुख्यमंत्री से उनको वर्तमान घटनाक्रम एवं विशाखा समिति के सन्दर्भ में कमेटी की रिपोर्ट से अवगत कराकर मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए भेंट की। विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस विषय में उठाये गये कदमों पर संतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं कुलपति कार्यालय के गौरव एवं इसकी सुरक्षा सरकार का सर्वोच्च दायित्व है। विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने धर्मान्तरण के परिप्रेक्ष्य में कहा, क्योकिं इसका परिक्षेत्र विस्तृत है अतः इसकी जाँच विश्वविद्यालय प्रशासन की क्षमता के बाहर होने के कारण, इसकी एसटीएफ द्वारा जाँच कराई जा रही है। साथ ही मुख्यमंत्री ने इस कठिन घड़ी में के०जी०एम०यू० परिवार के सदस्यों के धैर्य की प्रशंसा की एवं इसको बनाये रखने के लिए निर्देशित किया।

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