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प्रीमेच्‍योर शिशु के जन्‍म के बाद रेटिना की जांच आवश्‍यक

-एसजीपीजीआई में दो दिवसीय स्नातकोत्तर शिक्षण पाठ्यक्रम सेमिनार सम्‍पन्‍न

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। प्रीमेच्‍योर बच्‍चों में रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्‍योरिटी (आरओपी) होने की संभावना रहती है, ऐसे में आवश्‍यकता इस बात की है कि यदि बच्‍चे का जन्‍म 32 सप्‍ताह की गर्भावस्‍था में या इससे पूर्व हुआ है तो जन्‍म के बाद रेटिनोपैथी की जांच करनी आवश्‍यक है। अगर बच्‍चे में रेटिना पूरी तरह नहीं बना है तो लेजर या अन्‍य विधि से इसे डेवलप किया जा सकता है जिससे बच्‍चे को अंधेपन से बचाया जा सकता है।

आयोजन सचिव व एसजीपीजीआई के नेत्र विज्ञान विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रो विकास कनौजिया ने बताया कि यह जानकारी यूपी राज्य नेत्र विज्ञान सोसायटी  के तत्वावधान में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के ऑप्थलमोलॉजी विभाग द्वारा संस्‍थान में आयोजित दो दिवसीय स्नातकोत्तर शिक्षण पाठ्यक्रम के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को प्रीमेच्‍योर शिशुओं पर लाइव परफॉरमेंस के साथ दी।

उन्‍होंने बताया‍ कि प्रतिभागियों को बताया गया कि लोगों में इस जागरूकता को फैलाने की जरूरत है। उन्‍हें बताया गया कि प्रीमेच्‍योर बच्‍चों की किस प्रकार स्‍क्रीनिंग करके रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्‍योरिटी को डायग्‍नोस किया जाता है। पूरे उत्‍तर प्रदेश से आये प्रतिभागी चिकित्‍सकों ने प्रैक्टिकली सेशन से इस विषय में आसानी और अच्‍छे से जानकारी ली।

आयोजन टीम में शामिल प्रो रचना अग्रवाल ने बताया कि इससे पूर्व बीते दिवस 15 जुलाई को पोस्‍ट ग्रेजुएट कोर्स कॉन्‍फ्रेंस के पहले दिन संस्‍थान के निदेशक प्रो आरके धीमन ने कॉन्‍फ्रेंस का दीप प्रज्‍ज्‍वलन के साथ उद्घाटन किया। पहले दिन अन्‍य जानकारियों के साथ बताया गया कि ब्‍लड प्रेशर की तरह आंखों का भी प्रेशर नापा जाता है, अगर यह प्रेशर बढ़ा होता है तो उसका इलाज किया जाता है, समय पर इलाज ने होने से ऑप्टिक नर्व डैमेज होने का डर रहता है। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि 40 वर्ष की आयु के बाद आंख की जांच करके इसका प्रेशर लेना चाहिये।

कॉन्‍फ्रेंस में राज्य नेत्र विज्ञान सोसायटी  के उपाध्‍यक्ष डॉ विनोद राय, सचिव डॉ मोहिता शर्मा, साइंटिफि‍क कमेटी के चेयरमैन डॉ अभिषेक चंद्रा, पूर्व विभागाध्‍यक्ष प्रो कु‍मुदिनी शर्मा, डॉ दीपक मिश्रा सहित अन्‍य चिकित्‍सकों ने हिस्‍सा लिया। डॉ विकास ने बताया कि इस आयोजन की सफलता में डॉ रचना अग्रवाल, डॉ वैभव कुमार जैन, डॉ आलोक प्रताप सिंह, डॉ अंकिता ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायी।