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प्रो. कमलेश्वर सिंह नेशनल डेंटल कमीशन की एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य नामित

-केजीएमयू में प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग में प्रोफेसर डॉ कमलेश्वर सिंह ने पहले भी हासिल की हैं कई उपलब्धियां

डॉ कमलेश्वर सिंह

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के प्रतिष्ठित संकाय सदस्य प्रो. डॉ. कमलेश्वर सिंह को नेशनल डेंटल कमीशन (NDC), नई दिल्ली की डेंटल एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य नामित किया गया है।

डॉ. कमलेश्वर सिंह वर्तमान में केजीएमयू, लखनऊ के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा इसी प्रतिष्ठित संस्थान से प्राप्त की है और लगातार शिक्षण, शोध एवं नैदानिक सेवाओं में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है।

एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षाविद् के रूप में, डॉ. सिंह का चयन जापान में आयोजित जापान प्रोस्थोडॉन्टिक सोसाइटी एवं इंडियन प्रोस्थोडॉन्टिक सोसाइटी के संयुक्त इंटरनेशनल साइंटिफिक एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए किया गया था। वे यंग बायोमेडिकल साइंटिस्ट्स स्कीम के अंतर्गत प्रतिष्ठित ICMR इंटरनेशनल फेलोशिप (ICMR-IF) के भी प्राप्तकर्ता हैं।

अपने शैक्षणिक योगदान के अतिरिक्त, डॉ. सिंह रोगी देखभाल में भी सक्रिय रूप से संलग्न हैं। वे व्यापक प्रोस्थोडॉन्टिक उपचार प्रदान करते हैं, जिनका उद्देश्य कार्यक्षमता, सौंदर्य एवं समग्र मौखिक स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना है। उनकी विशेषज्ञता जटिल दंत मामलों के पुनर्वास में है, जिससे उच्च स्तरीय उपचार एवं रोगी संतुष्टि सुनिश्चित होती है।

डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 60 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं तथा अनेक स्नातकोत्तर शोध प्रबंधों का मार्गदर्शन किया है, जिससे प्रोस्थोडॉन्टिक शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

नेशनल डेंटल कमीशन की डेंटल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य के रूप में, डॉ. सिंह भारत में एक प्रगतिशील एवं रोगी-केंद्रित दंत शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना करते हैं। उनकी दृष्टि आधुनिक तकनीक के समावेशन, साक्ष्य-आधारित नैदानिक प्रशिक्षण, अंतर्विषयक शिक्षा तथा सशक्त अनुसंधान संस्कृति पर केंद्रित है। वे वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दंत स्नातक तकनीकी दक्षता, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से परिपूर्ण हों, ताकि देश में मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा सके।