Wednesday , April 22 2026

केजीएमयू में हिन्दू छात्राओं को अपने झांसे में लेने वाला जेहादी फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया

-एमबीबीएस और पैरामेडिकल की छात्राओं को फंसाता था अपने जाल में

-29 अप्रैल को आठ छात्राओं को दिल्ली ले जाने की थी पूरी तैयारी

-पैथोलॉजी से जुड़े लव जेहाद मामले में गठित समिति ने योजनाबद्ध तरीके से पकड़ा

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बीते दिनों पैथोलॉजी विभाग में हुए मुस्लिम रेजीडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन (डॉ रमीज) द्वारा हिन्दू रेजीडेंट डॉक्टर के साथ लव जेहाद के मामले में गठित आंतरिक समिति के हाथ एक ऐसा शख्स लगा है, जो सिर्फ इंटर पास होते भी गले में स्टेथोस्कोप डालकर डॉक्टर बन कर केजीएमयू के हिन्दू छात्राओं को अपने जाल में फंसा रहा था, यह शख्स लगभग चार वर्ष से एमबीबीएस और पैरामेडिकल दोनों की छात्राओं को अपने जाल में फंसाने के कार्य में लगा हुआ है। यही नहीं इस शख्स के मोबाइल में केजीएमयू के फर्जी लेटर हेड पर फर्जी हस्ताक्षरों से जारी पत्र मिले हैं। इन पत्रों से ज्ञात हुआ है कि आगामी 29 अप्रैल को यह शख्स यहां की आठ छात्राओं को दिल्ली ले जाने की पूरी तैयारी कर ली थी। इस शख्स का नाम हस्साम अहमद बताया जा रहा है।

शख्स को मीडिया के सामने भी लाया गया, और पत्रकारों को उससे सीधे प्रश्न पूछने को कहा गया। केजीएमयू प्रशासन द्वारा पकड़े गये व्यक्ति को पुलिस को सौंप दिया गया है। माना यह जा रहा है कि पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद इस शख्स के जरिये बहुत बड़ी साजिश और साजिश के जुड़े लोगों का पता लग सकता है।

केजीएमयू में आज बुलायी गयी पत्रकार वार्ता में इस शख्स के बारे में जानकारी डॉ रमीज के मामले में केजीएमयू में संगठित तरीके से चल रही गतिविधियों के बारे में पता लगाने को लेकर गठित समिति के अध्यक्ष केजीएमयू के प्रवक्ता व डीन डॉ केके सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि समिति को लगभग 15 दिन पूर्व जानकारी मिली थी कि एक माइनॉरिटी का आदमी केजीएमयू में आता है, यहां की छात्राओं से मिलता है, उन्हें स्कॉलरशिप दिलाने की बात करता है, मरीज दिखाने की बात करता है, उन्हें मेडिकल कैम्प में ले जाने की बात करता है। डॉ सिंह ने बताया कि इसके बाद हमने एक छात्र के जरिये इस शख्स द्वारा गत दिवस 20 अप्रैल को लगाये गये शिविर में जाने का प्लान बनाया।

डॉ सिंह ने बताया कि जब मैं शिविर में पहुंचा तो देखा तो मैं चौंक गया वहां मेडिकल और पैरामेडिकल के करीब 10 विद्यार्थी मौजूद थे, उन्होंने बताया कि जब मैंने उनमें एक छात्रा को बुलाकर पूछा कि तुम लोग बिना परमीशन के केजीएमयू कैम्पस से बाहर यहां कैम्प में भाग ले रही हो, तुम्हें कैम्प में जाना था तो यहां आउटरीच प्रोग्राम चलता है, उसके जरिये कैम्प में भाग लो, इस बारे में छात्रा ने कहा कि सर ये लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, इस शख्स ने छात्राओं पर अपना काफी प्रभाव डाल रखा था। उन्होंने बताया कि इसके बाद मामले की गहराई को देखते हुए कुछ छात्रों से कहा कि तुम लोग इस शख्स पर नजर रखना अगर यह दिख जाये तो हमें बताना, आज जब यह शख्स केजीएमयू में आया और पूर्व की भांति घूम रहा था तभी इसकी सूचना बच्चों ने उन्हें दी, जिसके बाद हम लोगों ने तत्काल पहुंचकर इस शख्स को पकड़ लिया, जब इसकी जेब से मिले मोबाइल को चेक किया तो आंखें फटी रह गयीं, मोबाइल में केजीएमयू के फर्जी लेटर हेड, उस पर डीन डॉ केके सिंह के नकली हस्ताक्षर बनाते हुए एक पत्र मिला, जिसमें पता चला कि आगामी 29 अप्रैल को केजीएमयू की आठ बच्चियों को दिल्ली ले जाना चाहता था, उस लेटर में बाकायदा उन छात्राओं का सिलेक्शन होने की बात करते हुए उन्हें दिल्ली एम्स ले जाने और वहां उन्हें अमेरिका के डॉक्टरों से मिलवाने की बात कही गयी है, जिससे कि बच्चियों के घरवालों को भी किसी तरह का शक न हो। डॉ केके सिंह ने कहा कि इसके बाद हम लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी।

उन्होंने बताया कि उससे पहले हम लोगों ने बहुत कुछ जानने की कोशिश की लेकिन वह बहुत शातिर किस्म का है, कुछ ठीक से नहीं बता रहा है, बाकी अब उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जहां आगे की पूछताछ तो पुलिस ही करेगी।

मीडिया के सामने जब पकड़े गये शख्स को लाया गया तो उससे कई प्रकार के सवाल हुए, इन सवालों के जवाब उसने दिये, इन्हीं जवाबों में जब उससे पूछा गया कि तुम्हारे सम्पर्क में कौन-कौन से डॉक्टर हैं तो उसने यहां के प्रतिष्ठित निजी संस्थानों तथा एक सरकारी संस्थान से जुड़े कुल चार डॉक्टरों के नाम बताये। हालांकि जब तक इन नामों और उनका सम्बन्ध बताये गये संस्थानों से होने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक निजता और प्रतिष्ठा को देखते हुए इन संस्थानों व चिकित्सकों ने नाम यहां उजागर नहीं किये जा रहे हैं