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भारत में पहली बार शुरू हुआ CPME कार्यक्रम, केजीएमयू करायेगा पेटेंट

पैरामेडिकल कर्मियों के लिए सतत पैरामेडिकल प्रशिक्षण का आयोजन का उद्देश्‍य नयी-नयी बातों का प्रशिक्षण देना जिसका सीधा लाभ मरीजों तक पहुंचे

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय ने आज प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक नया अध्‍याय लिखा है। भारत वर्ष में पहली बार पैरामेडिकल स्‍टाफ के लिए सतत् पैरामेडिकल प्रशिक्षण (CPME) कार्यक्रम के आयोजन की शुरुआत की गयी। इस तरह के प्रशिक्षण से पैरामेडिकल कर्मियों को नयी-नयी जानकारियां मिलती रहेंगी जिसका सीधा लाभ रोगी तक पहुंचेगा क्‍योंकि पैरामेडिकल स्‍टाफ और रोगी का सम्‍बन्‍ध बहुत नजदीकी होता है। के.जी.एम.यू. इन्सटीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइन्सेज के तत्वावधान में कराये जाने व़ाले सीपीटी अध्‍याय की शुरुआत ‘चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम’ आज 11 अगस्त को हुई। इसके तहत पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं तथा अन्य पैरामेडिकल कर्मियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की एक और खास बात यह है कि वरिष्‍ठ चिकित्‍सकों की उपस्थिति में पैरामेडिकल कर्मियों को सम्‍बन्धित विषय पर अपना व्‍याख्‍यान देने का मौका मिलेगा।

 

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति, किंग जार्ज चिकित्सा विश्‍वविद्यालय, प्रो.एम.एल.बी.भट्ट ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कुलपति प्रो.भट्ट ने अपने सम्बोधन में इस नई शुरूआत की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार का कार्यक्रम एक इनोवेशन (खोज) है जिसे के.जी.एम.यू. द्वारा पेटेन्ट कराया जायेगा तथा देश के अन्य संस्थानों को भी इस प्रकार के कार्यक्रम करने के लिए प्रेरित किया जायेगा।

डॉ विनोद जैन, अधिष्ठाता, पैरामेडिकल विज्ञान संकाय ने बताया कि पैरामेडिकल क्षेत्र में इस प्रकार की सतत् चिकित्सा प्रषिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भारत में पहली बार हुआ है। डॉ जैन ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं तथा पैरामेडिकल कर्मियों को नवीनतम जानकारी प्रदान करना है जिससे इसका सीधा लाभ वे रोगियों तक पहुंचा सकें। उन्होने यह भी जानकारी दी कि यह प्रथम सतत् पैरामेडिकल प्रशिक्षण है जिसका विषय ‘चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम’ है। प्रत्येक 2 माह पर विभिन्न विषयों पर पैरामेडिकल प्रशिक्षण का आयोजन किया जायेगा।

 

डीन, रिसर्च प्रो.आर.के.गर्ग ने पैरामेडिकल क्षेत्र में शोध कार्य करने पर बल दिया। डीन, छात्र कल्याण, प्रो.जी.पी.सिंह ने इस कार्यक्रम को के.जी.एम.यू. में मील का पत्थर बताते हुए सभी छात्र-छात्राओं को ऐसे कार्यक्रमों में अधिक से अधिक प्रतिभाग करने के लिए प्रेरित किया।

 

इस कार्यक्रम की यह विशेषता थी कि पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं द्वारा ही संक्रमण नियन्त्रण से सम्बंधित विषयों पर व्याख्यान दिया गया जिस पर के.जी.एम.यू. के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा भी अपनी राय दी गई। डॉ विनोद जैन ने बताया छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास एवं विषय में रुचि के लिए ऐसे कार्यक्रम लाभकारी हैं।

धन्यवाद ज्ञापन सहायक अधिष्ठाता डॉ अतिन सिंघई द्वारा दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ.गीतिका नन्दा सिंह, डॉ समीर मिश्रा,  डा.एन.के.पेनुली, डॉ पारिजात सूर्यवंशी, डॉ.आर.के.दीक्षित इत्यादि अनेकों वरिष्ठ चिकित्सक थे।

 

चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम’ पर व्याख्यान

 

उद्घाटन सत्र के बाद ‘चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम’ विषय पर विश्‍व विद्यालय पर्यावरण विभाग की अध्यक्ष प्रो.कीर्ती श्रीवास्तव ने कचरा प्रबन्धन विषय पर अतिथि व्याख्यान दिया। इस विष्य पर बोलते हुए उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे कचरे को इधर-उधर न फेंकें। कचरे को विश्‍व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्थापित मानकों के अनुसार ही पृथक-पृथक पात्र में निस्तारित करें। उन्होंने अपने व्याख्यान को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ते हुए बताया कि हमें कचरा निस्तारण के लिए स्वयं अच्छी आदतों को अपनाना चाहिए तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

कार्यक्रम संयोजक डॉ अंकिता जौहरी ने बताया कि इस सतत् प्रशिक्षण कार्यक्रम में पैरामेडिकल संकाय के 20 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया तथा सभी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन के.जी.एम.यू. की सीनियर फैकल्टी द्वारा किया गया। सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों को के.जी.एम.यू. पैरामेडिकल के वार्षिक समारोह में पुरस्कृत किया जायेगा। इस अवसर पर डॉ. विनोद जैन एवं डॉ.अंकिता जौहरी द्वारा परिकल्पित एवं लिखित ’चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण की रोकथाम’ पुस्तिका को इस विषय की सुलभ जानकारी प्रदान करने के उद्देश्‍य से सभी प्रतिभागियों को वितरित की गई। पुस्तिका में संक्रमण के कारक, बचाव, प्रबन्धन आदि का सचित्र विवरण है।

 

 

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