Tuesday , November 30 2021

अस्‍पतालों में तोड़फोड़ के लिए ‘झोलाछाप’ पैथोलॉजी लैब भी जिम्‍मेदार

क्‍योंकि जांच रिपोर्ट की गुणवत्‍ता प्रभावित करती है डायग्‍नोसिस को

बरेली/लखनऊ। आजकल मरीजों का विश्वास और मरीज-डॉक्टर के बीच रिश्ता, दोनों ही कम होते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि आये दिन किसी न किसी अस्पताल से तोड़ फोड़ की घटना का समाचार मिलना आम बात हो गयी है। इस तरह की घटनाओं और विश्वास के इस रिश्ते में कमी का एक बहुत बड़ा कारण सही जांच रिपोर्टों का न होना भी है। आप सोचिये कि अगर गलत हाथों द्वारा गलत रिपोर्ट दी जाएगी तो चिकित्सा कर रहे डॉक्टर द्वारा गलत डायग्नोसिस बनेगी, गलत इलाज चलेगा और नतीजा रोग में फायदा न पहुंचने से लेकर मरीज की मौत तक हो सकता है। इसलिए आवश्‍यकता इस बात की है कि पैथोलॉजी जांच अधिकृत लैब से ही हो, जहां रिपोर्ट देने वाला व्‍यक्ति आवश्‍यक अर्हताधारक यानी पोस्‍ट ग्रेजुएट पैथोलॉजिस्‍ट हो।

 

डॉ संजीव कुमार सक्‍सेना

यह बात एसोसिएशन ऑफ बरेली पैथोलॉजिस्‍ट्स की एक्‍शन कोर कमेटी के अध्‍यक्ष डॉ संजीव कुमार सक्‍सेना ने ‘सेहत टाइम्‍स’ से वार्ता के दौरान कहीं। उन्‍होंने कहा कि इलाज करने वाले चिकित्सकों को चाहिए कि वे मरीजों की जांच केवल AUTHORISED  लैब से ही करवाएं जिसका इंचार्ज एक क्वालिफाइड पोस्ट ग्रेजुएट पैथोलोजिस्ट हो, जो उस लैब पर नियमित रूप से बैठता भी हो और जिस से किसी भी शंका का ,मिल कर या बात कर के समाधान भी मिले। इसका सम्मान और उपयोगिता को आजकल फलफूल रही कॉर्पोरेट और गैरकानूनी  झोलाछाप लैब्स ने अप्रासंगिक कर दिया है | उन्‍होंने बताया कि मरीजों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इस‍के लिए हम लोगों ने एक हैंड बिल छपवाया है जिसे हर जांच रिपोर्ट के साथ दिया जायेगा जिससे कि लोगों के बीच जागरूकता हो कि वे कैसी पैथोलॉजी लैब पर जांच करायें।

 

उन्‍होंने बताया कि आजकल कई कॉर्पोरेट लैब की शाखाएं हर शहर में खुलने लगी हैं जिन में से अधिकतर मात्र कलेक्शन सेण्टर हैं जिन पर तकनीकी रूप से अशिक्षित स्टाफ द्वारा मरीजों की जांच प्रकिया को संचालित किया जाता है कुछ ऐसी लैब्स पर कोई नियमित पैथोलोजिस्ट भी नहीं होता सिर्फ किसी पैथोलोजिस्ट के नाम और हस्ताक्षर पर सारा काम चलता है| कई तरह के सस्ते और बिना जरुरत किये जाने वाले प्रोफाइल और सस्ती जांचों के बल पर इन लैब्स का टर्नओवर बेस्ड धंधा जोरों से चल रहा है। इन्‍हें पैथोलॉजी कहना गलत होगा क्‍योंकि पैथोलॉजी की प्रैक्टिस तो एक इबादत है, पूजा है। वास्तव में पैथोलॉजी की MD डिग्री और अन्‍य मान्‍य कोर्स प्राप्त करना अत्यंत कठिन परिश्रम के बाद संभव होती है। इसका सम्मान और उपयोगिता को आजकल फलफूल रही इन कॉर्पोरेट लैब्स ने अप्रासंगिक कर दिया है।

 

उन्‍होंने कहा कि बरेली क्षेत्र में एसोसिएशन ऑफ़ बरेली पैथोलोजिस्ट द्वारा अध्यक्ष डॉ अरुण मित्तल, सचिव डॉ सुमित अग्रवाल एवं कोर एक्शन समिति के सदस्यों द्वारा 12 टीमों का गठन कर चिकित्सकों एवं आम जनता के बीच उचित पैथोलॉजी और पैथोलोजिस्ट की जानकारी के प्रसार का बीड़ा उठाया गया है जिससे पैथोलॉजी के क्षेत्र में झोलाछाप प्रैक्टिस को रोका जा सके और मरीजों को सही जांच के औचित्य और उपयोगिता को बताया जा सके।