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इप्‍सेफ का सवाल, सांसद-विधायक को पेंशन तो कर्मचारियों को क्‍यों नहीं

-देश भर के कर्मचारियों से एक होकर सरकार पर दबाव बनाने का आह्वान

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. पी मिश्र एवं महामंत्री प्रेमचंद्र ने कहा है कि अंग्रेजों के समय से मिल रही पेंशन को बहाल न करना अन्यायपूर्ण है, भारत सरकार प्रधानमंत्री, सांसद एवं विधायक सभी को पेंशन दे रही है। चिंता का विषय है कि सरकारी कर्मचारी गांव से लेकर सचिवालय तक का सभी कार्य कर्मचारी ही तो करता है। कोविड-19 महामारी में डॉक्टर एवं कर्मचारियों ने मेहनत से जान पर खेलकर देश का नाम रोशन किया है, फिर उनके साथ अन्याय क्यों?

श्री मिश्र ने खेद व्यक्त किया है कि प्रधानमंत्री को सभी सांसदों विधायकों ने पेंशन बहाली के लिए पत्र लिखा था। उन्होंने देशभर के कर्मचारियों को भी आगाह किया है कि उनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ता जा रहा है। रिक्त पदों पर नियमित भर्ती नहीं हो रही है। चिकित्सालय सहित सभी विभागों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से कार्य कराया जा रहा है, जिससे सरकारी कार्यों में समुचित प्रगति नहीं हो रही है। ऐसा आभास हो रहा है कि अधिकतर संस्थानों में जब निजीकरण किया जा रहा है तो फिर पुरानी पेंशन पा रहे कर्मचारियों का भी भविष्य कहां सुरक्षित है, एनपीएस वाले कर्मचारी जब सेवानिवृत्त होंगे तो उनकी रोजी रोटी कैसे चलेगी। बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय है।

श्री मिश्र ने देशभर के कर्मचारियों/संगठनों से अपील की है कि पुरानी पेंशन बहाली एवं निजीकरण रोकने के लिए तत्काल एकजुट होकर इप्सेफ के साथ भारत सरकार पर दबाव बनाएं। अलग-अलग संघर्ष करने से कुछ नहीं मिलेगा।

राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि सांसद की हैसियत से उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पुरानी पेंशन बहाली करने की संस्तुति की थी कि उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाल क्यों नहीं कर रहे हैं जैसे सात राज्य सरकारों ने पुरानी पेंशन बहाल कर दी है।

उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह किया है कि पेंशन बहाल न होने पर आगामी लोकसभा चुनाव में कई करोड़ कर्मचारी परिवार का वोट नहीं मिलेगा।

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