Tuesday , July 27 2021

सरकारी चिकित्‍सक भी नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के खिलाफ

एनएमसी बिल लाने का फैसला हठधर्मी व अदूरदर्शिता से भरा बताया

विधेयक में संशोधन करने या फि‍र बिल को रद करने की मांग उठायी

खनऊ। प्रॉविन्शियल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल पर अपना विरोध जताया है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को समाप्‍त कर एनएमसी बनाये जाने को अदूरदर्शी और हठधर्मी भरा फैसला बताते हुए सरकार से मांग की है कि इस फैसले को रद करें या फि‍र संशोधित करें।

महामंत्री डॉ अमित सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आज 31 जुलाई को एसोसिएशन के केंद्रीय प्रतिनिधियों की एक आपातकालीन बैठक संघ के मुख्‍यालय पर अध्‍यक्ष डॉ सचिन वैश्‍य की अध्‍यक्षता में हुई। इस बैठक में संघ ने एनएमसी बिल पर विरोध जताया। उन्‍होंने बताया कि एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ सचिन वैश्य का स्प्ष्ट रूप से यह मत है कि सरकार द्वारा एमसीआई को समाप्त कर एनएमसी बिल लागू करना एक गैर जरूरी, अदूरदर्शी और हठधर्मी फैसला है। भविष्य में यह एक बडी ऐतिहासिक भूल के रूप में चिन्हित किया जाएगा। एनएमसी बिल न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं का अहित कर रहा है, बल्कि देश और राज्य के सामान्य जन को नीम-हकीम के हवाले कर रहा है। जैसा कि विदित है कि एनएमसी की नियंत्रक समिति ब्यूरोक्रेट्स एवं राजनीतिक व्यक्तियों के हाथ में होगी जबकि एमसीआई चिकित्सा जगत से जुडे अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा नियंत्रित की जाती थी, चिकित्सा सेवा एक बेहद ही संवेदनशीन एवं विशेषज्ञ सेवा होती है, जिसे केवल विशेषज्ञ चिकित्सक ही नियंत्रित कर सकते हैं।

एसोसिएशन के महामंत्री डॉ अमित सिंह ने कहा कि लगभग 10 साल के सतत् और कठिन अध्ययन एवं प्रयोग के बाद समाज को एक चिकित्सक मिलता है जो नित्य प्रतिदिन अपने अनुभवों से अपने को परिष्कृत करता है तब जाकर वह समाज के लिए एक कुशल और योग्य चिकित्सक के रूप में स्थापित हो पाता है, जबकि एनएमसी बिल में यह व्यवस्था दी गयी है कि, वह व्यक्ति जो एमबीबीएस न हो वह भी एलोपैथिक चिकित्सा कर सकता है, चाहे वह आयुष का चिकित्सक हो या स्टाफ नर्स जिसे केवल 6 माह का ब्रिज कोर्स करा दिया जाएगा। यह निर्णय न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि आत्मघाती भी है। इस निर्णय से देश और प्रदेश का आम आदमी नीम-हकीम से अपनी चिकित्सा कराने को बाध्य होगा।

उपाध्यक्ष मुख्यालय डॉ विकासेन्दु अग्रवाल ने कहा कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटों के फीस का निर्धारण स्वयं उनके द्वारा किया जाएगा जिस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा इससे आर्थिक अराजकता बढ़ेगी। ज्ञात हो कि देश के अधिकतर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज समाज के किन लोगों के पास हैं, कहीं एनएमसी बिल ऐसे लोगों को या समूहों को फायदा पहुंचाने का षड्यंत्र तो नहीं है।

संघ ने कहा है कि प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य रक्षा के लिए सदैव सजग एवं समर्पित है। जनता के स्वास्थ्य के सम्बन्ध में किसी भी तरह के ऐसे निर्णय, जो भविष्य में जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से घातक हो सकते हैं, उसका विरोध करती है। एनएमसी बिल भी आने वाले समय में घातक होगा। प्रान्तीय चिकित्सा संघ केन्द्र और राज्य सरकार से मांग करता है कि समय रहते इस बिल पर पुनर्विचार करें एवं इससे यथासम्भव संशोधित करें या समाप्त करें।

इस बैठक में संघ के अध्यक्ष डॉ सचिन वैश्य, महामंत्री डॉ अमित सिंह के अलावा उपाध्यक्ष मुख्यालय डॉ विकासेन्दु अग्रवाल, वित्त सचिव डॉ मोहित सिंह आदि उपस्थित रहे।

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