Saturday , January 29 2022

Exclusive-..अब जीवन रक्षक इंजेक्शन और आई ड्रॉप के नमूने फेल

-ब्‍लड प्रेशर का इंजेक्‍शन और आईड्रॉप के वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक
-उप्र मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन की निगरानी में हुई घटिया दवाओं की आपूर्ति रुक नहीं रही

पदमाकर पाण्डेय ‘’पद्म

लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में घटिया दवाओं की आपूर्ति रुक नहीं रही है। आंखों में कमीशन का काला चश्मा लगाकर खरीदने वाले उप्र मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन के जिम्मेदार अधिकारियों को सामान्य जनों के स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है। यही वजह है कि गुणवत्ता विहीन दवाओं की खरीद जारी है, अस्पतालों में दवा काउंटरों तक पहुंचने के बाद आदेश जारी होता है कि उक्त दवा के नमूने फेल हो चुके हैं,  इसलिए इन दवाओं के वितरण पर रोक लगायी जाती है। इसी कड़ी में अब आंखों की दवा फ्रेश आई ड्रॉप और जीवन रक्षक ब्‍लड प्रेशर की दवा इंजेक्शन डोबटामिन एचसीएल के नमूने लैब में फेल हो चुके हैं। इन दोनों दवाओं के वितरण पर 3 अक्‍टूबर को रोक लगा दी गयी है।  आपको बता दें कि गत माह भी रेनिटीडीन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन और लूकोनाजॉल 150 एमजी टैबलेट को अधोमानक होने की वजह से वितरण पर रोक लगाई गई थी।

गंभीर मरीज का बीपी लगातार गिर रहा हो, बीमारियां अपने दुष्प्रभाव बढ़ाती जा रही हों, एैसे में मरीज की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में डॉक्टर  बीपी बढ़ाने के लिए इंजेक्शन डोबटामिन एचसीएल की सलाह देते हैं, इसके बाद मरीज का बीपी बढ़ता है और ठीक होने की संभावना बढ़ती है। वर्तमान में यही जीवन रक्षक इंजेक्शन के गत्ते बैच नंबर एचएल 1124 सी, निर्माण तिथि मार्च 2019 ,  प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में गुणवत्ता वि‍हीन पहुंच चुके हैं। अगर किसी को लगाया भी गया तो मरीज को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि अस्पतालों में आपूर्ति के बाद यह इंजेक्शन लैब में फेल हो चुका है।

इतना ही नहीं अस्पतालों में पहुंच चुकी, आंखों के सूखेपन को दूर करने वाली और अत्यधिक उपयोगी कारबोक्सी मिथाइल सेलुलोज सोडियन 0.5 बैच नम्बर सीसीएम 402 ए, निर्माण तिथि अप्रैल 2019 भी लैब में फेल हो चुकी है। उक्त संवेदनशीन मुद्दे पर अस्पताल प्रशासन के अधिकारी सरकार के खिलाफ खुल कर बोलने से कतरा रहें हैं। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ.राजीव लोचन का कहना है कि बैच का मिलान कर, दवाओं को रोका जायेगा। दोनों ही दवाएं अत्यंत उपयोगी हैं, अस्पताल में न होने की दशा में मरीजों को दिक्कत होती है।

डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल के निदेशक डॉ.डीएस नेगी का कहना है कि दोनों ही बैच की दवाएं उनके अस्पताल में आपूर्ति नहीं हुई हैं। इसलिए दिक्कत नहीं होगी,  मगर अस्पताल में ये दवाएं नहीं है, यह भी तो परेशानी की बात है। इस बारे में जब सप्लाइज कार्पोरेशन की निदेशक श्रुति सिंह से बात करने को फोन किया गया तो फोन नहीं उठा,  जिसकी वजह से उनका पक्ष नहीं मिल सका।

स्वास्थ्य विभाग मजबूर है : स्वास्थ्य महानिदेशक

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.पद्माकर सिंह का कहना है कि मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन के अधिकारी इस मामले में सुधार कर सकते हैं क्योंकि खरीद-फरोख्‍त और आपूर्ति उन्हें ही करनी है। अगर उन्होंने वितरण पर रोक लगाई है तो दवाएं वापस जायेंगी।

क्‍या कहते हैं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री
जय प्रताप सिंह
जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने के बाद ही निर्णय लिया जायेगा : जय प्रताप सिंह

प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का कहना है कि दो दवाएं और अधोमानक हो चुकी हैं, उन्हें जानकारी नहीं है। बात की पुष्टि के लिए दवाओं के लैब रिपोर्ट देखने के बाद संबन्धित अधिकारियों से वार्ता की जायेगी। उसके बाद इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कठोर निर्णय लिया जायेगा। जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जायेगी।