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कपड़े के बने मास्‍क की क्षमता पर शोध के बाद आयी बड़ी खबर

धोने-सुखाने से इसके छानने की क्षमता पर एक साल तक नहीं पड़ता है कोई असर

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

बीते डेढ़ साल से चल रहे कोविड काल के दौरान संक्रमण से बचने के लिए मास्‍क पहनना सरकार द्वारा जारी की गयी गाइडलाइंस के तहत आवश्‍यक प्रोटोकाल में हैं। तरह-तरह के मास्‍क जिसमें सर्जिकल मास्‍क से लेकर कपड़े के मास्‍क तक शामिल हैं। ऐसे में जो लोग कपड़े का बना मास्‍क पहनते हैं उनके लिए यह गुड न्‍यूज है कि एक स्‍टडी में पाया गया है कि कपड़े का मास्क एक वर्ष तक असरदार हो सकता है, क्योंकि बार-बार धोने और सुखाने से संक्रमण फैलाने वाले कणों को छानने की मास्‍क की क्षमता कम नहीं होती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एरोसोल एंड एयर क्वालिटी रिसर्च शोध पत्रिका में प्रकाशित शोध उन पिछले अध्ययनों की भी पुष्टि करता है कि सर्जिकल मास्क के ऊपर सूती कपड़े का मास्क लगाना, कपड़े के एक मास्क की तुलना में अधिक सुरक्षा प्रदान करता है।

अमेरिका में कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर और अध्ययन की प्रमुख लेखिका मरीना वेंस ने कहा कि पर्यावरण के लिहाज से भी यह अच्छी खबर है। इस पर हुए शोध के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया है कि शोधकर्ताओं ने कॉटन के दो-परत बनाए, उन्हें एक साल तक बार-बार धोने और सुखाने के माध्यम से परखा, और लगभग हर सात बार की सफाई के दौरान उनका परीक्षण किया। 

अध्ययन में पाया गया कि सूती कपड़े के मास्क 0.3 माइक्रोन के सूक्ष्म कण को 23 प्रतिशत तक छानने में कामयाब रहे। सर्जिकल मास्क के ऊपर सूती कपड़े के मास्क लगाने से छानने की क्षमता बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि केएन-95 और एन-95 मास्क ने इन सूक्ष्म कणों में से 83-99 प्रतिशत को छानकर सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।

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