Sunday , April 14 2024

उपलब्धि : लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान को मिली एनएबीएच से मान्‍यता

-उत्‍तर भारत का प्रथम मल्‍टी स्‍पेशियलिटी सरकारी हॉस्पिटल जिसे यह प्रमाणपत्र मिला

 

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्‍थान लखनऊ को एनएबीएच (नेशनल ऐक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल National Accreditation Board for Hospitals) से मान्‍यता प्राप्‍त हुई है। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा मरीजों को दी जाने वाली  सेवाओं के गुणवत्तापरक होने की कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही एनएबीएच यह मान्‍यता प्रदान करती है।

यह जानकारी गुरुवार को संस्‍थान में आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में निदेशक प्रो सोनिया नित्‍यानंद ने दी। उन्‍होंने बताया कि उत्‍तर भारत में यह पहला मल्‍टी स्‍पेशियलिटी सरकारी संस्‍थान है जिसे एनएबीएच मान्‍यता मिली है। अभी तक इंस्‍टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज आईएलबीएस है जिसे एनएबीएच मिली है लेकिन वह संस्‍थान भी सिर्फ लिवर के लिए है। उन्‍होंने बताया‍ कि मरीज को दी जाने वाली सेवाओं की बारीक से बारीक गुणवत्‍ता को परखने के बाद ही यह मान्‍यता मिलती है। यह मेहनत पूरी टीम की है, इसमें एक साल से हम लोग इसकी तैयारी कर रहे थे।

प्रो सोनिया नित्‍यानंद ने बताया कि एक टीम है जो क्‍वालिटी को मॉनीटरिंग करती है, उन्‍होंने बताया‍ कि हम लोगों ने क्‍वालिटी सुधारने के लिए नयी-नयी और प्रभावी व्‍यवस्‍थाएं लागू की हैं जैसे इमरजेंसी में अलग-अलग सेवाओं के लिए कोड निर्धारित कर रखे हैं यानी अगर आग लगती है तो एक कोड एनाउंस किया जायेगा हमारी टीम के मेम्‍बर उस एनाउंसमेंट में कोड को सुनकर समझ जायेंगे कि क्‍या करना है जैसे आग लगने पर अलग कोड, इमरजेंसी में पहुंचे व्‍यक्ति को हार्ट अटैक आने का दूसरा कोड, संस्‍थान में आया बच्‍चा अगर खो जाये तो अलग कोड आदि-आदि। मरीज की सुरक्षा जैसे व्‍हील चेयर, स्‍ट्रेचर पर मरीज को सुरक्षित रखने के लिए, साइड गार्ड, बेल्‍ट सुनिश्चित रखना है। इसी प्रकार मरीज और स्‍टाफ को अगर कोई शिकायत होती है उसके समाधान के लिए ग्रीवांस सेल बनाया है।

एमएस डॉ विक्रम सिंह व डिप्‍टी एमएस डॉ स्मिता चौहान ने भी इस बारे में विस्‍तार से जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि मरीज की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष प्रकार से मॉनीटरिंग करते हुए उसके तात्‍कालिक हल की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित की जाती है। इसके तहत मरीज को संक्रमण न हो जाये, पहचान के लिए मरीज के हाथ में आईडी बैन्‍ड लगाना, अस्‍पताल से निकलने वाले बायोवेस्‍ट का निस्‍तारण, मेडिकल उपकरण की देखरेख आदि कार्यों को गुणवत्‍तापरक करना सुनिश्चित किया जाता है। डॉ विक्रम ने बताया कि मरीज को डिस्‍चार्ज करते समय उसके किये गये इलाज, जांच रिपोर्ट का रिकॉर्ड भी दिया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.