Friday , October 2 2026

रक्तदान में बाधक हैं मिथक और भ्रांतियां, इन्हें दूर करें : डॉ तूलिका चन्द्रा

-केजीएमयू ने एक पखवाड़े में आयोजित किये 11 आउटडोर व 2 इनडोर रक्तदान शिविर

-250 लोगों ने किया रक्तदान, डीबीटीटी के 130 विद्यार्थियों ने भरा रक्तदान शपथ पत्र

सेहत टाइम्स
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के उपलक्ष्य में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे स्वैच्छिक रक्तदान एवं जन-जागरूकता अभियान में सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए 11 आउटडोर एवं 2 इनडोर स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें 250 से अधिक स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने रक्तदान किया।

यह जानकारी देते हुए ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चन्द्रा ने बताया कि इन शिविरों का उद्देश्य रक्त की उपलब्धता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आमजन में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। उन्होंने बताया कि 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर विभाग के ब्लड ट्रांसफ्यूजन टेक्नोलॉजी (DBTT) के विद्यार्थियों द्वारा रक्तदान शपथ-पत्र भरा गया। इस अवसर पर 130 DBTT विद्यार्थियों के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों से आए स्वैच्छिक रक्तदाताओं एवं अन्य लोगों ने रक्तदान करने तथा समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

रक्तदान के बाद शरीर में स्वत: पूर्ति होती है रक्त की

इस अवसर पर डॉ. तूलिका चन्द्रा ने सभी विद्यार्थियों, रक्तदाताओं एवं आमजन को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं पात्र व्यक्तियों के लिए रक्तदान एक सुरक्षित प्रक्रिया है और नियमित स्वैच्छिक रक्तदान से संबंधित अनेक भ्रांतियों एवं गलत धारणाओं को दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि रक्तदान के पश्चात शरीर में रक्त कोशिकाओं की पूर्ति प्राकृतिक रूप से अस्थि-मज्जा (Bone Marrow) द्वारा होती है। निर्धारित अंतराल पर रक्तदान करने से शरीर की सामान्य रक्त निर्माण प्रक्रिया निरंतर सक्रिय रहती है।

डॉ. चन्द्रा ने बताया कि प्रत्येक रक्तदाता का रक्तदान से पूर्व चिकित्सकीय परीक्षण एवं स्वास्थ्य संबंधी जांच की जाती है। रक्तदान किए गए प्रत्येक रक्त यूनिट की HIV, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, सिफलिस एवं मलेरिया जैसे प्रमुख रक्त-संचारित संक्रमणों के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि रक्तदान से संबंधित मिथक एवं भ्रांतियां कई स्वस्थ एवं पात्र लोगों को नियमित रक्तदान करने से रोकती हैं, इसलिए जन-जागरूकता के माध्यम से लोगों को रक्तदान की सुरक्षा एवं महत्त्व के बारे में सही जानकारी देना आवश्यक है।

पुरुष 3 माह व महिला 4 माह के अंतराल पर कर सकते हैं रक्तदान

उन्होंने बताया कि निर्धारित चिकित्सकीय मानकों एवं स्वास्थ्य पात्रता के अनुसार पुरुष सामान्यतः प्रत्येक 3 माह तथा महिलाएं प्रत्येक 4 माह में रक्तदान कर सकती हैं, बशर्ते रक्तदान के समय वे चिकित्सकीय रूप से पात्र हों।
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग, केजीएमयू ने आमजन से अपील की कि सभी पात्र एवं स्वस्थ नागरिक स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करें, नियमित रक्तदाता बनें तथा अपने परिवार, मित्रों एवं समाज के अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करें। उन्होंने नारे “रक्तदान करें – जीवन बचाएं। स्वैच्छिक रक्तदान को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बनाएं।” के जरिये लोगों से रक्तदान की अपील की।